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लहराया अजहरी परचम, उर्स का आगाज
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दरगाह आला हजरत परिसर स्थित ताजुश्शरिया के आस्ताने पर गुलपोशी करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
असजद मियां ने अदा की परचम कुशाई की रस्म
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नातो मनकबत और मिलाद की महफिल सजी
बरेली। दरगाह आला हजरत परिसर स्थित ताजुश्शरिया के आस्ताने पर बुधवार को रूहानी माहौल के बीच अजहरी परचम लहरा उठा। इसी के साथ दो रोजा उर्स-ए-ताजुश्शरिया का आगाज हो गया। परचम कुशाई की रस्म काजी-ए-हिंदुस्तान एवं सज्जदानशीन मुफ्ती असजद रजा खां कादरी ने अदा की।
सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के मजहबी रहनुमा ताजुश्शरिया हजरत मुफ्ती अख्तर रजा खां (अजहरी मियां) के उर्स की तकरीब दरगाह शरीफ पर सुबह कुरान ख्वानी से हुई। इसके बाद नातो मनकबत की महफिल सजाई गई। शाम को परचम कुशाई से पहले शाहबाद से सैयद कैफी, आजमनगर से मोहम्मद साजिद और सैलानी से फहमी तहसीनी के निवास से परचम दरगाह शरीफ पहुंचे। परचमों को पांच-पांच मोटरसाइकिलों से दस-दस लोग सांकेतिक जुलूस के रूप में लेकर पहुंचे। साथ में फूलों की टोकरियां भी थीं। उन्हें मजार शरीफ पर पेश किया गया। सभी जुलूस आला हजरत दरगाह की गली के मोड़ तक आए। इसके बाद लोग उर्स-ए-ताजुश्शरिया के नारों के साथ दरगाह तक पैदल पहुंचे। दरगाह की ओर से उनका स्वागत किया गया।
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दरगाह पर परचम कुशाई की रस्म के बाद फातेहा और मुल्क की खुशहाली के साथ ही कोरोना के खात्मे की दुआ की गई। इस दौरान उर्स प्रभारी सलमान मियां, जमात रजा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां सहित चुनिंदा उलमा-ए-इकराम ही मौजूद रहे। रात को दरगाह पर मिलाद शरीफ की महफिल सजाई गई। इसमें नईम रजा तहसीनी और मुस्तफा मुर्तजा अजहरी ने ताजुश्शरिया के लिखे कलाम पेश किए। इस मौके पर मोईन खान, समरान खान, हाफिज इकराम रजा खां, मौलाना निजामुद्दीन, मुफ्ती अफजाल रजवी, मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारूकी, कारी काजिम रजा, मौलाना शम्स रजा आदि मौजूद रहे।
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कुल शरीफ आज
जमात रजा मुस्तफा के प्रवक्ता समरान खान ने बताया कि ताजुश्शरिया के उर्स का बृहस्पतिवार को आखिरी रोज है। कार्यक्रम के मुताबिक दरगाह ताजुश्शरिया और मथुरापुर स्थित मदरसा जामियतुर्रजा में सुबह छह बजे फज्र की नमाज के बाद कुरान ख्वानी और नातो मनकबत की महफिल होगी। इसके बाद ताजुश्शरिया के वालिद मुफ्फसिरे आजम हिंद हजरत इब्राहिम रजा खां (जिलानी मियां) का कुल शरीफ सुबह 7:10 बजे होगा। मुख्य कार्यक्रम शाम को अस्र की नमाज के बाद शाम छह बजे से होगा। इसमें नातो मनकबत की महफिल और उलमा की तकरीर होंगी। शाम 7:14 बजे ताजुश्शरिया के कुल शरीफ की रस्म होगी।
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नातो मनकबत और मिलाद की महफिल सजी बरेली। दरगाह आला हजरत परिसर स्थित ताजुश्शरिया के आस्ताने पर बुधवार को रूहानी माहौल के बीच अजहरी परचम लहरा उठा। इसी के साथ दो रोजा उर्स-ए-ताजुश्शरिया का आगाज हो गया। परचम कुशाई की रस्म काजी-ए-हिंदुस्तान एवं सज्जदानशीन मुफ्ती असजद रजा खां कादरी ने अदा की।
सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के मजहबी रहनुमा ताजुश्शरिया हजरत मुफ्ती अख्तर रजा खां (अजहरी मियां) के उर्स की तकरीब दरगाह शरीफ पर सुबह कुरान ख्वानी से हुई। इसके बाद नातो मनकबत की महफिल सजाई गई। शाम को परचम कुशाई से पहले शाहबाद से सैयद कैफी, आजमनगर से मोहम्मद साजिद और सैलानी से फहमी तहसीनी के निवास से परचम दरगाह शरीफ पहुंचे। परचमों को पांच-पांच मोटरसाइकिलों से दस-दस लोग सांकेतिक जुलूस के रूप में लेकर पहुंचे। साथ में फूलों की टोकरियां भी थीं। उन्हें मजार शरीफ पर पेश किया गया। सभी जुलूस आला हजरत दरगाह की गली के मोड़ तक आए। इसके बाद लोग उर्स-ए-ताजुश्शरिया के नारों के साथ दरगाह तक पैदल पहुंचे। दरगाह की ओर से उनका स्वागत किया गया।
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दरगाह पर परचम कुशाई की रस्म के बाद फातेहा और मुल्क की खुशहाली के साथ ही कोरोना के खात्मे की दुआ की गई। इस दौरान उर्स प्रभारी सलमान मियां, जमात रजा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां सहित चुनिंदा उलमा-ए-इकराम ही मौजूद रहे। रात को दरगाह पर मिलाद शरीफ की महफिल सजाई गई। इसमें नईम रजा तहसीनी और मुस्तफा मुर्तजा अजहरी ने ताजुश्शरिया के लिखे कलाम पेश किए। इस मौके पर मोईन खान, समरान खान, हाफिज इकराम रजा खां, मौलाना निजामुद्दीन, मुफ्ती अफजाल रजवी, मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारूकी, कारी काजिम रजा, मौलाना शम्स रजा आदि मौजूद रहे।
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