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Bareilly News: आर्थिक प्रगति में एआई की भूमिका अहम, बढ़ेगा नवाचार, दक्षता और उत्पादकता
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बरेली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भारत की आर्थिक उन्नति में अहम भूमिका निभा रही है। वर्ष 2035 तक एआई द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में करीब 1000 बिलियन डॉलर के योगदान का अनुमान है। तकनीक, आर्थिक स्थिरता, उत्पादकता के संयोजन से भारत विकसित राष्ट्र बनेगा।
रुहेलखंड मैनेजमेंट एसोसिएशन (आरएमए) की ओर से भारत एवं नई वैश्विक आर्थिक व्यवस्था विषय पर आयोजित परिचर्चा के दौरान संगठन अध्यक्ष डॉ. मनीष शर्मा ने ये बातें कहीं। कहा कि एआई विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादकता, दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देकर समग्र आर्थिक विकास में योगदान कर रही है।
डॉ. स्वतंत्र कुमार ने कहा कि वर्तमान में आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक अस्थिरता का दौर है। जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। डॉ. राजेंद्र भारती ने कहा, विकास दर, रोजगार, व्यापार, निवेश जैसे क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव हो रहा है।
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आरएमए सचिव कदीर अहमद ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में शिक्षा, कौशल विकास, प्राकृतिक संसाधन, राजनीतिक स्थिरता, बुनियादी ढांचा, विदेशी और घरेलू निवेश की भूमिका है। सीए शरद मिश्रा ने भारतीय विदेशी नीति की समीक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया।
रोजगार के बढ़ रहे अवसर और देश की निर्यात क्षमता
इंजीनियर प्रदीप मधवार ने कहा कि उच्च उत्पादकता से उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ देश की निर्यात क्षमता मजबूत हो रही हैं। डाॅ. एके राय ने कहा कि जब समाज, उद्योग, कुशलता, समयबद्धता, गुणवत्ता शामिल हो तो समग्र उत्पादन क्षमता बढ़ती है। इंजीनियर केबी अग्रवाल ने देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5 से बढ़ाकर 10 फीसदी करने पर जोर दिया। इंजीनियर सुधीर गुप्ता, विवेक शर्मा, उद्यमी राजेश गुप्ता, कार्यक्रम निदेशक डॉ. नीरज सक्सेना ने भी विचार साझा किए। ब्यूरो
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रुहेलखंड मैनेजमेंट एसोसिएशन (आरएमए) की ओर से भारत एवं नई वैश्विक आर्थिक व्यवस्था विषय पर आयोजित परिचर्चा के दौरान संगठन अध्यक्ष डॉ. मनीष शर्मा ने ये बातें कहीं। कहा कि एआई विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादकता, दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देकर समग्र आर्थिक विकास में योगदान कर रही है।
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डॉ. स्वतंत्र कुमार ने कहा कि वर्तमान में आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक अस्थिरता का दौर है। जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। डॉ. राजेंद्र भारती ने कहा, विकास दर, रोजगार, व्यापार, निवेश जैसे क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव हो रहा है।
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आरएमए सचिव कदीर अहमद ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में शिक्षा, कौशल विकास, प्राकृतिक संसाधन, राजनीतिक स्थिरता, बुनियादी ढांचा, विदेशी और घरेलू निवेश की भूमिका है। सीए शरद मिश्रा ने भारतीय विदेशी नीति की समीक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया।
रोजगार के बढ़ रहे अवसर और देश की निर्यात क्षमता
इंजीनियर प्रदीप मधवार ने कहा कि उच्च उत्पादकता से उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ देश की निर्यात क्षमता मजबूत हो रही हैं। डाॅ. एके राय ने कहा कि जब समाज, उद्योग, कुशलता, समयबद्धता, गुणवत्ता शामिल हो तो समग्र उत्पादन क्षमता बढ़ती है। इंजीनियर केबी अग्रवाल ने देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5 से बढ़ाकर 10 फीसदी करने पर जोर दिया। इंजीनियर सुधीर गुप्ता, विवेक शर्मा, उद्यमी राजेश गुप्ता, कार्यक्रम निदेशक डॉ. नीरज सक्सेना ने भी विचार साझा किए। ब्यूरो