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बंद होने के कगार पर मानसिक चिकित्सालय
Bareilly
Updated Wed, 25 Jun 2014 05:33 AM IST
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बरेली। सूबे के तीन प्रमुख मानसिक चिकित्सालयों में एक बरेली का मानसिक चिकित्सालय अब बंद होने के कगार पर है। यहां इस समय तैनात ें इकलौते मनोचिकित्सक और प्रभारी निदेशक डा. विजय सिंह जुलाई माह में रिटायर हो जाएंगे। उनके बदले यहां नए मनोचिकित्सक की नियुक्त करने के बारे में शासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई संकेत नहीं मिला है। जब मनोचिकित्सक ही नहीं होंगे तो यहां भरती मनोरोगियों और ओपीडी में पहुंचने वाले ऐसे ही रोगियों की देखभाल कैसे होगी,इस वाल का फिलहाल कोई जवाब नहीं है।
इस स्थिति से शासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है। पत्र भेजे जा चुके हैं पर गत तीन साल से एक भी नियुक्ति नहीं हुई है। सूबे में मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने वाराणसी, आगरा और बरेली में मानसिक अस्पताल खोला था। बरेली के इस अस्पताल स्थापना सन 1862 में हुई थी। शुरूआती दौर में यहां के मानसिक अस्पताल की हालत बहुत बेहतर थी। मरीजों के लिए सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध थीं, लेकिन समय के साथ-साथ यह अस्पताल भी उपेक्षा का शिकार होता चला गया। इस समय यहां 13 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं पर तीन ही तैनात हैं। इन्हीं पर 400 मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी है। इनमें से ही 100 महिला मरीज भी हैं जिनके लिए कोई महिला डॉक्टर नहीं है। रोजाना ओपीडी के करीब 250 मरीजों के देखभाल का जिम्मा भी इन्हीं पर है।
शासन से अपर निदेशक और डीएम ने संपर्क साधा
आने वाले संकट को भांपकर ही अपर निदेशक स्वास्थ्य (बरेली मंडल) डा. वाईसी शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को हालात से अवगत कराते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कराने को कहा है पर अभी तक उस पर कुछ हुआ नहीं। मंगलवार को डीएम संजय कुमार ने कहा कि यह संकट उनके संज्ञान में है। शासन स्तर पर वह इसके लिए निजी तौर पर संपर्क कर जुलाई में मौजूदा मनोचिकित्सक के रिटायरमेंट से पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में लगे हैं। उन्हें उम्मीद है कि संकट समय रहते दूर कर लिया जाएगा।
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इस स्थिति से शासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है। पत्र भेजे जा चुके हैं पर गत तीन साल से एक भी नियुक्ति नहीं हुई है। सूबे में मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने वाराणसी, आगरा और बरेली में मानसिक अस्पताल खोला था। बरेली के इस अस्पताल स्थापना सन 1862 में हुई थी। शुरूआती दौर में यहां के मानसिक अस्पताल की हालत बहुत बेहतर थी। मरीजों के लिए सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध थीं, लेकिन समय के साथ-साथ यह अस्पताल भी उपेक्षा का शिकार होता चला गया। इस समय यहां 13 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं पर तीन ही तैनात हैं। इन्हीं पर 400 मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी है। इनमें से ही 100 महिला मरीज भी हैं जिनके लिए कोई महिला डॉक्टर नहीं है। रोजाना ओपीडी के करीब 250 मरीजों के देखभाल का जिम्मा भी इन्हीं पर है।
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शासन से अपर निदेशक और डीएम ने संपर्क साधा
आने वाले संकट को भांपकर ही अपर निदेशक स्वास्थ्य (बरेली मंडल) डा. वाईसी शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को हालात से अवगत कराते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कराने को कहा है पर अभी तक उस पर कुछ हुआ नहीं। मंगलवार को डीएम संजय कुमार ने कहा कि यह संकट उनके संज्ञान में है। शासन स्तर पर वह इसके लिए निजी तौर पर संपर्क कर जुलाई में मौजूदा मनोचिकित्सक के रिटायरमेंट से पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में लगे हैं। उन्हें उम्मीद है कि संकट समय रहते दूर कर लिया जाएगा।
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