मच्छर मार रहे डंक: बरेली में अब तक 955 लोग मलेरिया की चपेट में, डेंगू के 19 मरीज मिले
बरेली जिले में इस साल भी मलेरिया का प्रकोप हावी है। मरीजों की संख्या एक हजार के करीब पहुंच गई है। वहीं प्रशासन रोकथाम के दावे कर रहा है।
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मच्छरजनित रोगों के लिहाज से प्रदेश की संवेदनशील सूची में बरेली जिला दर्ज है। हर साल अफसरों के दावे खोखले साबित हो रहे हैं, इधर मच्छरों के डंक से इंतजामों को भी मलेरिया हो गया है। नतीजा बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी मलेरिया का प्रकोप हावी है। अब तक 955 मरीज मिल चुके हैं। इसके अलावा डेंगू के 19 मरीज चिह्नित हुए हैं।
जिले में हजार के करीब मलेरिया के मरीज पहुंचने के बाद अब फिर रोकथाम के दावे हो रहे हैं। हालांकि, धरातल पर क्या स्थिति होगी यह आने वाले अगले तीन माह में स्पष्ट हो जाएगा। बता दें कि स्वास्थ्य विभाग ने बीते माह संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया था।
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संवेदनशील गांवों में व्यवस्थाओं के लिए सौ अफसरों को नोडल अधिकारी बनाया गया था। अभियान की पोल शासन से जारी रैंकिंग ने खोली। अभियान कुछ क्षेत्रों तक सीमित रहा। ज्यादातर गंदगी के अंबार से पटे रहे। नालियां बजबजाती रहीं। झाड़ियां बढ़ती गईं। संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग भी कम रही।
नतीजा प्रदेश में जिला 43वें पायदान पर दर्ज हुआ। सोमवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने स्वास्थ्य विभाग, नोडल अधिकारियों के साथ कैंप कार्यालय में बैठक की। मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए लार्वा न पनपे इसके लिए सभी संभावित कवायद धरातल पर उतारने के निर्देश दिए हैं।
वर्ष रक्त पट्टिका जांच मलेरिया एलाइजा जांच डेंगू
2021 2,10,677 2,372 7,447 595
2022 2,62,969 1,806 7,047 473
2023 4,06,942 3,490 17,143 1079
केंद्र पर किट उपलब्ध पर जांच नहीं
स्थानीय स्तर पर इलाज मुहैया कराने के लिए शहर में बने आरोग्य मंदिरों पर मलेरिया, डेंगू जांच के लिए आरडीटी किट मौजूद हैं, लेकिन स्टाफ के अभाव में जांच नहीं हो रही। किट धूल फांक रही हैं। विभाग के अनुसार जिले में 55 लैब टेक्नीशियन और 13 लैब असिस्टेंट हैं। सीएचसी, यूपीएचसी और पीएचसी पर तैनात हैं।
शहरी 34 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लैब टेक्नीशियन या सहायक स्टाफ नहीं हैं। मरीज रेफर हो रहे हैं।जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र के मुताबिक स्क्रीनिंग में गर्भवती में संदिग्ध लक्षण मिलने पर मलेरिया जांच हो रही है। कई स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में मच्छरदानी नहीं लगी हैं।
30 अतिसंवेदनशील गांवों में सात दिन वार
मलेरिया, डेंगू रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अबकी बार अफसरों ने सात दिन मच्छरों पर वार माइक्रोप्लान बनाया है। मलेरिया अधिकारी के अनुसार मच्छरजनित रोगों के लिहाज से अतिसंवेदनशील 30 गांवों में सितंबर 2024 से जनवरी 2025 पांच माह मुहिम चलेगी। इनमें शेरगढ़, मीरगंज, भमोरा, फतेहगंज पश्चिमी के 6-6 गांव और मझगवां, बिथरी के 4-4 गांव शामिल हैं। यहां प्रतिदिन एंटी लार्वा और फॉगिंग होगी।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि मलेरिया, डेंगू के संदिग्ध मरीजों को ट्रैक करने के लिए अब पहले से ज्यादा जांच हो रही है। इसलिए मरीज भी ज्यादा मिल रहे हैं। जिनका इलाज कराने के साथ फॉलोअप टेस्ट भी हो रहा है। ताकि पैरासाइट्स खत्म हो जाएं। हमारी सभी टीमें सक्रिय हैं। जो कमियां हैं, उसे दूर कराया जा रहा है।