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रश्मि
Updated Sat, 14 Oct 2017 11:27 PM IST
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फोटो-13 बीडीएन-10
पैरों से हाथों का काम लेती है रश्मि
बचपन से बेजान हैं दोनों हाथ पर नहीं लेती किसी की मदद
खुद ही लगाती है बैग, क्लास में रहती है अव्वल
पंकज शर्मा
बिसौली (बदायूं)।
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रही है दोनों हाथों से दिव्यांग उच्च प्राथमिक विद्यालय परसिया की कक्षा छह की छात्रा रश्मि पाल। रश्मि के दोनों हाथ जन्म से ही बेजान हैं। इस कमी को उसने चुनौती के रूप में लिया और पैरों को ही हाथ बना लिया। वह अपने नन्हे पैरों की उंगलियों में पेन दबाकर लिखती हैं तो उसी पैर की उंगली में चम्मच दबाकर खाना भी खाती है। अधिकतर घरेलू कार्य चाहे झाड़ू लगाना ही क्यों न हो, वह भी कर लेती है। उसका एक ही मकसद है खूब पढ़ना।
तहसील क्षेत्र के ग्राम परसिया के किसान रमेश पाल के घर जन्मी रश्मि के दोनों हाथ कुहनी के नीचे जन्म से ही काम नहीं करते हैं। 12 वर्षीय रश्मि चार भाई बहनों में सबसे बड़ी है। लेकिन उसकी दिनचर्या बिना किसी के सहारे के गुजरती है। वह कहती है कि अधिकतर सहेलियां मेरी मदद को हर समय तैयार रहती हैं, लेकिन मैं मदद न लेने का हर संभव प्रयास करती हूं। जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है। बस एक ही मकसद है भविष्य में खूब पढ़ूं। अपना स्कूल बैग खुद ही कंधे पर टांगती हूं।
बाक्स
एसडीएम ने किया पुरस्कृत
रश्मि के कक्षाध्यापक अवनीश कुमार वर्मा बताते हैं कि सोमवार को उपजिलाधिकारी मोहम्मद अवेश ने उच्च प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। तब उन्होंने कई बच्चों से कुछ सवाल पूछे। एसडीएम ने रश्मि से भी कई सवाल किए, जिनका उसने जवाब दिया। सबसे ज्यादा सवालों के जवाब देने पर एसडीएम भी उसकी शिक्षा के प्रति लगन और मेहनत से खुश हुए। उन्होंने प्रभावित होकर रश्मि को पुरस्कार स्वरूप सौ रुपये दिए।
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बाक्स
आधार कार्ड नहीं बनने से हैं निराश
रश्मि वैसे तो अपनी किसी समस्या से परेशान नहीं है। लेकिन आधार कार्ड नहीं बन पाने से ज्यादा परेशान है। उसने कहा कि उसका अब तक एडमीशन के बाद पंजीकरण नहीं हो सका है। जिसके लिए बार-बार अध्यापक आधार कार्ड की मांग करते हैं।
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पैरों से हाथों का काम लेती है रश्मि
बचपन से बेजान हैं दोनों हाथ पर नहीं लेती किसी की मदद
खुद ही लगाती है बैग, क्लास में रहती है अव्वल
पंकज शर्मा
बिसौली (बदायूं)।
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रही है दोनों हाथों से दिव्यांग उच्च प्राथमिक विद्यालय परसिया की कक्षा छह की छात्रा रश्मि पाल। रश्मि के दोनों हाथ जन्म से ही बेजान हैं। इस कमी को उसने चुनौती के रूप में लिया और पैरों को ही हाथ बना लिया। वह अपने नन्हे पैरों की उंगलियों में पेन दबाकर लिखती हैं तो उसी पैर की उंगली में चम्मच दबाकर खाना भी खाती है। अधिकतर घरेलू कार्य चाहे झाड़ू लगाना ही क्यों न हो, वह भी कर लेती है। उसका एक ही मकसद है खूब पढ़ना।
तहसील क्षेत्र के ग्राम परसिया के किसान रमेश पाल के घर जन्मी रश्मि के दोनों हाथ कुहनी के नीचे जन्म से ही काम नहीं करते हैं। 12 वर्षीय रश्मि चार भाई बहनों में सबसे बड़ी है। लेकिन उसकी दिनचर्या बिना किसी के सहारे के गुजरती है। वह कहती है कि अधिकतर सहेलियां मेरी मदद को हर समय तैयार रहती हैं, लेकिन मैं मदद न लेने का हर संभव प्रयास करती हूं। जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है। बस एक ही मकसद है भविष्य में खूब पढ़ूं। अपना स्कूल बैग खुद ही कंधे पर टांगती हूं।
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एसडीएम ने किया पुरस्कृत
रश्मि के कक्षाध्यापक अवनीश कुमार वर्मा बताते हैं कि सोमवार को उपजिलाधिकारी मोहम्मद अवेश ने उच्च प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। तब उन्होंने कई बच्चों से कुछ सवाल पूछे। एसडीएम ने रश्मि से भी कई सवाल किए, जिनका उसने जवाब दिया। सबसे ज्यादा सवालों के जवाब देने पर एसडीएम भी उसकी शिक्षा के प्रति लगन और मेहनत से खुश हुए। उन्होंने प्रभावित होकर रश्मि को पुरस्कार स्वरूप सौ रुपये दिए।
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आधार कार्ड नहीं बनने से हैं निराश
रश्मि वैसे तो अपनी किसी समस्या से परेशान नहीं है। लेकिन आधार कार्ड नहीं बन पाने से ज्यादा परेशान है। उसने कहा कि उसका अब तक एडमीशन के बाद पंजीकरण नहीं हो सका है। जिसके लिए बार-बार अध्यापक आधार कार्ड की मांग करते हैं।