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बरखा शर्मा प्रकरण में मंगेतर को 7 साल की कैद

Sun, 06 Dec 2015 01:54 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 06 Dec 2015 01:54 AM IST
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7 years' imprisonment in case fiance Barkha Sharma
बरेली। सगाई तोड़ने की धमकी पर आत्महत्या करने वाली बरेली कॉलेज की शिक्षिका बरखा शर्मा ने अपने सुसाइड नोट में किसी को सजा देने की गुजारिश तो नहीं की थी लेकिन इतना जरूर लिखा था कि वह अपने मंगेतर की वजह से जान दे रही है जिसने प्यार की जगह पैसे को अहमियत देकर उसे चोट पहुंचाई है। विशेष न्यायाधीश प्रिवेंशन आफ क्रप्शन एक्ट संजीव फौजदार ने इस पत्र को अहम साक्ष्य मानते हुए शनिवार को बरखा के मंगेतर मानिक शर्मा को सात वर्ष की कठोर कैद व बीस हजार रुपये जुर्माना व दहेज मांगने का दोषी पाये जाने पर एक वर्ष का कठोर कारावास व दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी है।
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रामचन्द्रपुरम निवासी बरखा शर्मा मानिक से प्यार करती थी दोनों का रिश्ता भी तय हो गया था । चार नवंबर 2007 की रात बरखा ने अपने कमरे में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी। उनकी बहन  डॉ. वंदना शर्मा ने अगले दिन थाना सुभाषनगर में रिपोर्ट लिखायी कि उनकी छोटी बहन बरखा शर्मा की शादी ओल्ड सन सिटी में रहने वाले पी.के. शर्मा के पुत्र मानिक शर्मा से तय हुई थी जिसके परिप्रेक्ष्य में चार नवंबर को सुबह दस बजे सगाई होनी थी लेकिन ऐन मौके पर बुलाने पर मानिक शर्मा, उसकी मां किरन शर्मा, भाई पारस शर्मा, बहन चांदनी शर्मा व भाभी गुड़िया शर्मा ने कहा कि जब तक तीन लाख रुपये नकद नहीं दोगो तब तक सगाई नहीं करेंगे। यह कहने पर कि घर पर रिश्तेदार आ गए हैं और हमारी इज्जत का सवाल है तो बमुश्किल तमाम मेरे पिता शिवकुमार शर्मा ने एक लाख रुपये नकद व अन्य सामान दिया। इन लोगों ने सगाई के तुरंत बाद जाते समय कहा कि एक हफ्ते के अंदर दो लाख रुपये नकद नहीं दिए तो सगाई खत्म समझना। बरखा यह सब सुनकर बहुत दुखी हुई रोई और अपने कमरे में चली गई। सुबह नौ बजे जब  उसके कमरे का दरवाजा खोला तो देखा कि वह पंखे से लटकी हुई थी तथा उसका सुसाइड नोट रखा था।
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ये मामला महिला आयोग तक भी पहुंचा और कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की। शहर में बरखा को न्या दिलाने के लिए छात्रों ने प्रदर्शन भी किए। लंबी सुनवाई में इस मामले में मानिक शर्मा, किरन शर्मा, पारस शर्मा, चांदनी शर्मा व गुड़िया शर्मा के खिलाफ आरोपों पर विचारण हुआ।  सभी आरोपी सत्र न्यायालय से जमानत पर थे। कोर्ट में सात गवाह पेश किए गए। विशेष न्यायाधीश प्रिवेंशन आफ क्रप्शन एक्ट संजीव फौजदार ने मामले के लिए सिर्फ मानिक शर्मा को ही दोषी पाया। अन्य को बरी कर दिया।
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परिवार ने लड़ी लंबी लड़ाई
बरेली। दहेज की भेंट चढ़ी बरखा की लड़ाई विश्वनाथ पुरम के शर्मा परिवार ने खूब लड़ी। शनिवार को अदालत फैसला होने के बाद सभी परिजनों ने सजा पर तसल्ली जताई। परिजनों का कहना है कि उनके बरखा तो नहीं आ सकती लेकिन जो उसकी मौत के लिए जिम्मेदार बने, उन्हें जेल होने से इस तरह के अन्य गुनहगारों को भी सबक मिलेगा।  
बरेली कालेज में राजनीतिक विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और बरखा की बहन डा. वंदना शर्मा बताती हैं कि पांच साल तक तो हमारे परिवार में कोई भी त्यौहार नहीं मना। मम्मी रोज सुबह बरखा के फ ोटो के आगे दिया जलाती। उनकी दूसरी बहन और सब रजिस्ट्रार विवेक शर्मा कहती हैं बरखा के जाने के 5 साल बाद मेरी बेटी पैदा हुई। एकदम बरखा जैसी, देखते ही सबके मुहं से निकला कि ये तो बरखा आ गई, तब से सफलता को ही बरखा का प्रतिरूप मानकर मम्मी-पापा ने मानों फि र से जीना शुरू कर दिया। घर में फि र से त्यौहार मनने लगे। स्कूल में बिटिया का नाम सफ लता लिखवाया है। पर घर में सब बरखा कह कर ही पुकारते हैं ।


हेडिंग
ये न्याय की जीत
विवेक शर्मा ‘डिंपल’ का कहना है कि मेरी बहन ने दुनिया से जाते जाते पत्र में जो लिखा, आज ठीक आठ साल बाद न्यायालय ने उसे सच माना और मानिक को बरखा की मौत के लिये जिम्मेदार मानते हुये 7 साल की सजा सुनाई । आज फि र पूरे परिवार की आंखो में आंसू हैं, बरखा तो लौट कर नहीं आ सकती पर उससे दहेज मांगने वाले को सजा दिला कर ये एहसास हुआ है कि न्याय हुआ।
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