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जीएसपीएस की मंजूरी के बाद भी तीन के बजाए छह महीने परेशानी में डाला बैंक वालों ने
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बरेली। महिला और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गईं केंद्र सरकार की ऋण योजनाएं सिस्टम की मनमानी से लोगों को फायदा नहीं पहुंचा पा रही हैं। महिलाओं के लिए शुरू हुई स्टैंडअप योजना का भी यही हाल है। ‘अमर उजाला’ में बृहस्पतिवार को इसका खुलासा किए जाने के बाद छह महीने से बैंक की दौड़ लगा रही एक महिला को लोन की पहली किस्त तो मिल गई, लेकिन बैंक शाखा ने इसमें भी खेल कर दिया। इस वजह से उसे तीन महीने में सारी स्वीकृत राशि मिलने के बजाय छह महीने में भुगतान हो पाएगा।
मढ़ीनाथ में रहने वाली कल्पना और भुवनेश भारद्वाज ने केंद्र सरकार की स्टैंडअप योजना से प्रेरित होकर छह माह पहले बड़ौदा बैंक शाखा करगैना में आवेदन किया था। गर्वमेंट स्कीम प्रोसेगिंग सेल (जीएसपीएस) प्रभारी ने 13.40 लाख रुपये का लोन एक माह पहले स्वीकृत कर दिया था। स्वीकृति पत्र में लाभार्थी को इसका भुगतान भी तीन माह में करने को कहा गया। लेकिन बैंक शाखा प्रबंधक मयंक सांगवाल लगातार कोई न कोई बहाना बनाते रहे। बैंक में इशारा मिला कि ‘सैटिंग’ से जल्द काम होगा, लेकिन लाभार्थियों ने इस सिस्टम में आने से इंकार कर दिया। तब कोई न कोई अड़ंगा लगता रहा। ‘अमर उजाला’ ने सिस्र्टम की पोल खोली तो जीएम बड़ौदा बैंक एसके अरोरा ने फटकार लगाई। इस पर 24 घंटे में प्रभावित लोगाें गुरुवार दोपहर में उनको पहली किश्त 4.50 लाख रुपये का ड्राफ्ट मिल गया। बैंक शाखा ने तो इसमें भी खेल कर दिया है कि लोन धनराशि तीन माह में दी जानी है, लेकिन बैंक शाखा प्रबंधन ने इसकी अवधि छह माह कर दी है।
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मढ़ीनाथ में रहने वाली कल्पना और भुवनेश भारद्वाज ने केंद्र सरकार की स्टैंडअप योजना से प्रेरित होकर छह माह पहले बड़ौदा बैंक शाखा करगैना में आवेदन किया था। गर्वमेंट स्कीम प्रोसेगिंग सेल (जीएसपीएस) प्रभारी ने 13.40 लाख रुपये का लोन एक माह पहले स्वीकृत कर दिया था। स्वीकृति पत्र में लाभार्थी को इसका भुगतान भी तीन माह में करने को कहा गया। लेकिन बैंक शाखा प्रबंधक मयंक सांगवाल लगातार कोई न कोई बहाना बनाते रहे। बैंक में इशारा मिला कि ‘सैटिंग’ से जल्द काम होगा, लेकिन लाभार्थियों ने इस सिस्टम में आने से इंकार कर दिया। तब कोई न कोई अड़ंगा लगता रहा। ‘अमर उजाला’ ने सिस्र्टम की पोल खोली तो जीएम बड़ौदा बैंक एसके अरोरा ने फटकार लगाई। इस पर 24 घंटे में प्रभावित लोगाें गुरुवार दोपहर में उनको पहली किश्त 4.50 लाख रुपये का ड्राफ्ट मिल गया। बैंक शाखा ने तो इसमें भी खेल कर दिया है कि लोन धनराशि तीन माह में दी जानी है, लेकिन बैंक शाखा प्रबंधन ने इसकी अवधि छह माह कर दी है।
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