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बरेली की रामलीला: 456 साल से लीलाओं के मंचन से रघुनंदन का अभिनंदन, लखना स्टेट के राजा ने कराया था शुरू

Sun, 15 Oct 2023 01:26 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sun, 15 Oct 2023 01:26 AM IST
सार

बरेली में चौधरी तालाब से शुरू होने वाली रामलीला का मंचन बड़ा बाग और गुलाब नगर स्थित रानी साहब के फाटक पर प्रत्येक वर्ष धूमधाम से किया जाता है। मंचन के लिए कलाकार दूसरे जिलों व राज्यों से आते हैं। इसका इतिहास 456 साल पुराना है। 

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bareilly ramleela history is 456 years old
चौधरी तालाब के पास रामलीला में मंचन करते कलाकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली शहर साढ़े चार सौ साल से लीलाओं के जरिये रघुनंदन का अभिनंदन करता आ रहा है। यहां चौधरी तालाब किनारे 456 वर्षों से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इसके लिए दूसरे राज्यों से कलाकार बुुलाए जाते हैं। रामलीला के प्रति यहां के लोगों में गजब का उत्साह है। यूं तो जिले में कई स्थानों पर रामलीला का मंचन होता है पर शहर के तीन स्थान इनमें प्रमुख हैं। आज हम आपको इन्हीं रामलीलाओं के पीछे की कहानी से रूबरू करा रहे हैं।
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मंचन के लिए बाहर से आते हैं कलाकार
रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति के अध्यक्ष रामगोपाल मिश्रा ने बताया कि 456 वर्ष पूर्व लखना स्टेट के राजा जसवंत राव ने अपनी पुत्री राजकुमारी लक्ष्मीबाई के नाम पर रामलीला का मंचन शुरू कराया था। विवाह के बाद लक्ष्मीबाई के पति वसंत राव ने रामलीला मंचन के क्रम को आगे बढ़ाया।
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चौधरी तालाब से शुरू होने वाली रामलीला का मंचन बड़ा बाग और गुलाब नगर स्थित रानी साहब के फाटक पर प्रत्येक वर्ष धूमधाम से किया जाता है। मंचन के लिए कलाकार दूसरे जिलों व राज्यों से आते हैं। अब तक लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर व अन्य स्थानों के कलाकार रामलीला मंचन कर चुके हैं। मौजूदा समय में बिहार के मधुबनी जिले के श्री आदर्श रामलीला मंडल के 22 कलाकार रामलीला का मंचन कर रहे हैं।
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चौधरी तालाब था दूर, इसलिए शुरू किया मंचन
बात सन 1939 की है। सुभाषनगर निवासी रामसेवक शर्मा, बाला प्रसाद शुक्ला, भैरो प्रसाद टंडन व हजारी प्रसाद रामलीला देखने चौधरी तालाब जा रहे थे, लेकिन किसी कारणवश वहां नहीं पहुंच सके। फिर चारों लोगों ने सुभाषनगर में ही रामलीला मंचन करने की ठानी। जगह (सुभाषनगर में आज जहां सेेंट्रल बैंक है) भी मिल गई। तखत, लालटेन, पोशाक आदि का बंदोबस्त किया गया। मंचन शुरू हुआ। धीरे-धीरे दर्शक बढ़ने लगे।

इस पर वर्ष 1940 में पुरानी सब्जी मंडी में मंचन होने लगा। एक साल यहां रामलीला का मंचन हुआ। फिर सन 1941 में इसे रामलीला ग्राउंड में स्थायी रूप से स्थानांतरित कर दिया गया। अब 11 अक्तूबर से यहां 82वें वार्षिकोत्सव का आयोजन चल रहा है। रामलीला देखने के लिए यहां देर रात तक दर्शकों का हुजूम लगा रहता है। यहां होने वाली रामलीला पंडित राधेश्याम कथावाचक की रामायण पर आधारित है।

1968 में हुई शुरुआत
नवादा जोगियान स्थित बाबा वनखंडीनाथ मंदिर में रामलीला की शुरुआत वर्ष 1968 में हुई थी। उस समय ग्राम प्रधान ने रामलीला व दशहरा मेला लगाने का प्रस्ताव पारित कराया था। बाद में वर्ष 1972 में रामलीला कमेटी का गठन हुआ। रज्जू गिरि को सचिव बनाया गया। सचिव ने 30 अक्तूबर 1972 को रामलीला व दशहरा का पंजीकरण कराया। तब से अब तक वही कमेटी के सचिव हैं।

गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू रामलीला परिषद नवादा जोगियान के संरक्षक हैं। मेला संरक्षक हरिओम राठौर ने बताया कि पड़ोस के जिलों से भी लोग यहां रामलीला देखने आते हैं। परिषद की ओर से प्रतिवर्ष सुबह कृष्णलीला व रासलीला होती है। रात में रामलीला का मंचन 17 दिनों तक दशहरा मेला मैदान में होता है। विजयदशमी के दूसरे दिन शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं।

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