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सपना-मुस्कान का ‘गीता-बबीता’ बनने का सपना अब होगा पूरा
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बरेली। दंगल गर्ल ‘गीता-बबीता’ को फिल्म में कुश्ती लड़ते देख सपना पाल और मुस्कान ने भी रेसलर बनने की ठानी थी, लेकिन आर्थिक तंगी के आगे उनको न तो उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिल सका और न ही महावीर फोगाट जैसा कोई कोच। हालांकि दोनों एक बार महावीर फोगाट से मिल भी चुकी हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह ठहरने का खर्चा नहीं उठा पाईं। बाद में दंगल और कुश्ती की कुछ फिल्में देखकर दांवपेंच सीखे। पिछले साल जिला, फिर मंडल और फिर प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने के बाद दोनों ने खेल निदेशालय के ट्रायल में भी मैदान मार लिया। फैजाबाद स्थित कुश्ती हॉस्टल में उनका चयन हो गया है। दोनों बरेली की पहली रेसलर हैं जिनका चयन हॉस्टल में हुआ है। देश के लिए ख्ेालना और मेडल जीतने का सपना अब शायद उनका पूरा हो जाए।
संजय नगर की रहने वाली सपना पाल रिखी सिंह गर्ल्स इंटर कॉलेज में बारहवीं की छात्रा है। पिता उमेश पाल एक दुकान चलाते हैं। पांच बहनें और दो भाई हैं। सपना बचपन से ही रेसलर बनना चाहती थी। वहीं संजय नगर की ही मुस्कान वर्मा के पिता हुकुम चंद प्राइवेट जॉब करते हैं। तीन बहनें और दो भाई हैं। दोनों ही खिलाड़ी आर्थिक तंगी के कारण प्रशिक्षण नहीं ले पाए। कई कोच के दरवाजे खटखटाए, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। स्टेडियम में भी कोई कोच न होने के कारण उनको मायूसी मिली। एक बार उनको प्रैक्टिस से भी रोक दिया गया था। पर दोनों ने हार नहीं मानी और घर पर ही प्रैक्टिस जारी रखी। इसके बाद उन्होंने निदेशालय के ट्रायल में हिस्सा लिया। अब दोनों का चयन हो गया है। दोनों का कहना है कि अब उनको अच्छी कोचिंग और सुविधाएं मिलेंगी। देश के लिए मेडल जीतने के लिए कड़ी मेहनत करेंगी। आरएसओ विजय कुमार ने स्टेडियम में दोनों को सम्मानित किया।
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संजय नगर की रहने वाली सपना पाल रिखी सिंह गर्ल्स इंटर कॉलेज में बारहवीं की छात्रा है। पिता उमेश पाल एक दुकान चलाते हैं। पांच बहनें और दो भाई हैं। सपना बचपन से ही रेसलर बनना चाहती थी। वहीं संजय नगर की ही मुस्कान वर्मा के पिता हुकुम चंद प्राइवेट जॉब करते हैं। तीन बहनें और दो भाई हैं। दोनों ही खिलाड़ी आर्थिक तंगी के कारण प्रशिक्षण नहीं ले पाए। कई कोच के दरवाजे खटखटाए, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। स्टेडियम में भी कोई कोच न होने के कारण उनको मायूसी मिली। एक बार उनको प्रैक्टिस से भी रोक दिया गया था। पर दोनों ने हार नहीं मानी और घर पर ही प्रैक्टिस जारी रखी। इसके बाद उन्होंने निदेशालय के ट्रायल में हिस्सा लिया। अब दोनों का चयन हो गया है। दोनों का कहना है कि अब उनको अच्छी कोचिंग और सुविधाएं मिलेंगी। देश के लिए मेडल जीतने के लिए कड़ी मेहनत करेंगी। आरएसओ विजय कुमार ने स्टेडियम में दोनों को सम्मानित किया।
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