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रबर फैक्ट्री की जमीन मिलने में कानूनी अड़ंगा बरकरार
Updated Sat, 07 Apr 2018 10:04 AM IST
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फोटो- रबर फैक्ट्री
रबर फैक्ट्री की जमीन से दूर नहीं हो पा रहे कानूनी पेच
फैक्ट्री के 1435 कर्मचारी मांग रहे हैं दो सौ करोड़ का पीएफ और फंड
राज्य सरकार को देनी होगी 1470 करोड़ की बैंक देनदारी भी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। रबर फैक्ट्री की 13 सौ एकड़ जमीन से कानूनी अड़चनें अभी दूर नहीं हो पा रही हैं। राज्य सरकार फैक्ट्री की जमीन पर मुंबई में चल रहा केस खत्म कराकर वहां नई इंडस्ट्री विकसित करना चाहती है। इसके लिए सरकार के प्रतिनिधि मुंबई हाईकोर्ट मेें केस की पैरवी भी कर रहे हैं, लेकिन रबर फैक्ट्री की कर्मचारी यूनियन को आपत्ति है कि राज्य सरकार फैक्ट्री की जमीन हासिल करने के लिए बैंक की 238 करोड़ की देनदारियां (ब्याज समेत लगभग 1470 करोड़) चुकाने की कोशिश तो कर रही है, लेकिन 18 साल से बेरोजगार 1435 कर्मचारियों का दो सौ करोड़ पीएफ देने के लिए कोई पहल नहीं हो रही। केंद्रीय श्रम राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने 17 दिसंबर, 2018 को आठ महीने की भविष्य निधि का भुगतान कराया, जो उसी समय से लंबित पड़ा था।
रबर फैक्ट्री पर बैंक की 238 करोड़ की देनदारियां हैं, जो अब बढ़कर 1470 करोड़ हो चुकी हैं। कर्मचारियों की मानें तो फैक्ट्री कार्यकाल में अक्तूबर 1998 से अगस्त 1999 तक की भविष्य निधि का भुगतान मार्च में नहीं हो पाया। कर्मचारी हजारी लाल, प्रमोद कुमार, सुभाष चौहान, पूरनलाल मौर्य, हैदर अली आदि का आरोप है कि मुंबई हाईकोर्ट की सुनवाई में उत्तर प्रदेश शासन की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके उनके पास साक्ष्य हैं। हालांकि जिलाधिकारी वीरेंद्र सिंह ने केस की पैरवी के लिए शासन के प्रतिनिधि के पहुंचने का दावा किया है। कर्मचारी यूनियन ने कहा कि सरकार या किसी उद्यमी का रबर फैक्ट्री में भ्रमण करने पर कर्मचारी यूनियन विरोध करेगी क्योंकि पहले उनका बकाया भुगतान चुकाया जाना चाहिए। वह इसके लिए 18 साल से संघर्ष कर रहे हैं। रजिस्टर में वह सब अब भी रबर फैक्ट्री के कर्मचारी हैं क्योंकि कंपनी ने उनको नौकरी से नहीं निकाला है।
कोट-
रबर फैक्ट्री की जमीन पर मुंबई उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। उसमें शासन की ओर से प्रतिनिधि भेजे गए थे। वह शनिवार को लौटेंगे। तब पता चलेगा कि केस में क्या प्रगति है। जमीन वापसी के लिए सरकार पूरे प्रयास कर रही है, ताकि वहां नए उद्योग लगाए जा सकें। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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रबर फैक्ट्री की जमीन से दूर नहीं हो पा रहे कानूनी पेच
फैक्ट्री के 1435 कर्मचारी मांग रहे हैं दो सौ करोड़ का पीएफ और फंड
राज्य सरकार को देनी होगी 1470 करोड़ की बैंक देनदारी भी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। रबर फैक्ट्री की 13 सौ एकड़ जमीन से कानूनी अड़चनें अभी दूर नहीं हो पा रही हैं। राज्य सरकार फैक्ट्री की जमीन पर मुंबई में चल रहा केस खत्म कराकर वहां नई इंडस्ट्री विकसित करना चाहती है। इसके लिए सरकार के प्रतिनिधि मुंबई हाईकोर्ट मेें केस की पैरवी भी कर रहे हैं, लेकिन रबर फैक्ट्री की कर्मचारी यूनियन को आपत्ति है कि राज्य सरकार फैक्ट्री की जमीन हासिल करने के लिए बैंक की 238 करोड़ की देनदारियां (ब्याज समेत लगभग 1470 करोड़) चुकाने की कोशिश तो कर रही है, लेकिन 18 साल से बेरोजगार 1435 कर्मचारियों का दो सौ करोड़ पीएफ देने के लिए कोई पहल नहीं हो रही। केंद्रीय श्रम राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने 17 दिसंबर, 2018 को आठ महीने की भविष्य निधि का भुगतान कराया, जो उसी समय से लंबित पड़ा था।
रबर फैक्ट्री पर बैंक की 238 करोड़ की देनदारियां हैं, जो अब बढ़कर 1470 करोड़ हो चुकी हैं। कर्मचारियों की मानें तो फैक्ट्री कार्यकाल में अक्तूबर 1998 से अगस्त 1999 तक की भविष्य निधि का भुगतान मार्च में नहीं हो पाया। कर्मचारी हजारी लाल, प्रमोद कुमार, सुभाष चौहान, पूरनलाल मौर्य, हैदर अली आदि का आरोप है कि मुंबई हाईकोर्ट की सुनवाई में उत्तर प्रदेश शासन की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके उनके पास साक्ष्य हैं। हालांकि जिलाधिकारी वीरेंद्र सिंह ने केस की पैरवी के लिए शासन के प्रतिनिधि के पहुंचने का दावा किया है। कर्मचारी यूनियन ने कहा कि सरकार या किसी उद्यमी का रबर फैक्ट्री में भ्रमण करने पर कर्मचारी यूनियन विरोध करेगी क्योंकि पहले उनका बकाया भुगतान चुकाया जाना चाहिए। वह इसके लिए 18 साल से संघर्ष कर रहे हैं। रजिस्टर में वह सब अब भी रबर फैक्ट्री के कर्मचारी हैं क्योंकि कंपनी ने उनको नौकरी से नहीं निकाला है।
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रबर फैक्ट्री की जमीन पर मुंबई उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। उसमें शासन की ओर से प्रतिनिधि भेजे गए थे। वह शनिवार को लौटेंगे। तब पता चलेगा कि केस में क्या प्रगति है। जमीन वापसी के लिए सरकार पूरे प्रयास कर रही है, ताकि वहां नए उद्योग लगाए जा सकें। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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