{"_id":"5c59ed7fbdec2232285b0894","slug":"191549397375-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीडब्ल्यूडी टेंडर में घपलों पर सख्ती, जांच शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीडब्ल्यूडी टेंडर में घपलों पर सख्ती, जांच शुरू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। पीडब्ल्यूडी में लाखों के टेंडर देने में घपले की जांच शुरू हो गई है। प्रांतीय खंड और निर्माण खंड भवन डिवीजन में हाल में अधिकारियों ने कई बड़े कामों के टेंडर किए थे। इसमें तमाम तरह की गंभीर गड़बड़ियां होने की बात सामने आई है। मुख्य अभियंता ने सभी मामलों में जांच के आदेश देते हुए संबंधित अधिकारियों से रिकॉर्ड भी तलब किए हैं।
पहला मामला सड़क निर्माण का है। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में सेंथल के पास मुझयाना संतोष और लाड़पुर-उस्मानपुर की दो सड़कों के लिए क्रमश: 80 लाख और 55 लाख रुपये के टेंडर हुए थे। अधीक्षण अभियंता स्तर से तीन बार टेंडर प्रक्रिया हुई है। पांच से छह निविदाएं पड़ी, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने कोई न कोई खामी बताते हुए टेंडर निरस्त कर दिए। वहीं, आखिर में एक-एक टेंडर पड़ने के बावजूद इन्हें निरस्त नहीं किया गया और मनमाने तरीके से ठेकेदारों के नाम फाइनल कर दिए गए। दूसरे मामले में हवालात मरम्मत के 10 लाख के दो कामों को लेकर भी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो चुके हैं। इन दोनों कामों के लिए पहली बार सिंगल टेंडर पड़े थे। इनका शुद्धि पत्र लगाते हुए फिर से टेंडर डलवाए गए। दोबारा दो-दो टेंडर पड़े। उसमें भी कोई न कोई कमी दिखाते हुए निरस्त कर दिया गया। मंडलीय कांट्रैक्टर एसोसिएशन ने चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी से इसकी लिखित शिकायत की कि आखिर में केवल दो निविदाएं खोलकर चहेतों को काम दे दिया गया। चीफ इंजीनियर ने मामले में जांच बैठा दी है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को पत्रावलियों के साथ तलब भी कर लिया है।
एक इंजीनियर के साले ने भी डाला टेंडर
पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड (भवन)फतेहगंज पूर्वी-दातागंज मार्ग के लिए 35 लाख का काम देने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए दस ठेकेदारों ने टेंडर डाले हैं। नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया में विभागीय अभियंता का कोई सगा संबंधी शामिल नहीं हो सकता है। इसके बावजूद विभाग में कार्यरत एक अभियंता का साला भी प्रक्रिया में शामिल हुआ है। बताते हैं कि गुपचुप तरीके से उसको काम देने की तैयारी भी चल रही है। हालांकि, यह मामला भी चीफ इंजीनियर दफ्तर पहुंच गया है।
विज्ञापन
कई टेंडरों की प्रक्रिया में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। इसके लिए मैंने संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड दिखाने के लिए कहा है। मामलों की जांच होगी। - राकेश राजवंशी, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी
विज्ञापन
पहला मामला सड़क निर्माण का है। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में सेंथल के पास मुझयाना संतोष और लाड़पुर-उस्मानपुर की दो सड़कों के लिए क्रमश: 80 लाख और 55 लाख रुपये के टेंडर हुए थे। अधीक्षण अभियंता स्तर से तीन बार टेंडर प्रक्रिया हुई है। पांच से छह निविदाएं पड़ी, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने कोई न कोई खामी बताते हुए टेंडर निरस्त कर दिए। वहीं, आखिर में एक-एक टेंडर पड़ने के बावजूद इन्हें निरस्त नहीं किया गया और मनमाने तरीके से ठेकेदारों के नाम फाइनल कर दिए गए। दूसरे मामले में हवालात मरम्मत के 10 लाख के दो कामों को लेकर भी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो चुके हैं। इन दोनों कामों के लिए पहली बार सिंगल टेंडर पड़े थे। इनका शुद्धि पत्र लगाते हुए फिर से टेंडर डलवाए गए। दोबारा दो-दो टेंडर पड़े। उसमें भी कोई न कोई कमी दिखाते हुए निरस्त कर दिया गया। मंडलीय कांट्रैक्टर एसोसिएशन ने चीफ इंजीनियर राकेश राजवंशी से इसकी लिखित शिकायत की कि आखिर में केवल दो निविदाएं खोलकर चहेतों को काम दे दिया गया। चीफ इंजीनियर ने मामले में जांच बैठा दी है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को पत्रावलियों के साथ तलब भी कर लिया है।
विज्ञापन
एक इंजीनियर के साले ने भी डाला टेंडर
पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड (भवन)फतेहगंज पूर्वी-दातागंज मार्ग के लिए 35 लाख का काम देने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए दस ठेकेदारों ने टेंडर डाले हैं। नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया में विभागीय अभियंता का कोई सगा संबंधी शामिल नहीं हो सकता है। इसके बावजूद विभाग में कार्यरत एक अभियंता का साला भी प्रक्रिया में शामिल हुआ है। बताते हैं कि गुपचुप तरीके से उसको काम देने की तैयारी भी चल रही है। हालांकि, यह मामला भी चीफ इंजीनियर दफ्तर पहुंच गया है।
विज्ञापन
कई टेंडरों की प्रक्रिया में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। इसके लिए मैंने संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड दिखाने के लिए कहा है। मामलों की जांच होगी। - राकेश राजवंशी, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी