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स्वाइन फ्लूः रिपोर्ट का इंतजार बढ़ा रहा मरीजों की संख्या
Updated Thu, 24 Aug 2017 01:43 AM IST
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swine flu
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केस 1
एक अस्पताल में भर्ती दो मरीज को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। उनके सैंपल लिए जाने तक उन्हें अस्पताल में रखा गया। इनके आसपास डॉक्टर और नर्सों का आना-जाना लगा रहा। आइसोलेशन न होने की वजह से नर्स को भी वायरस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। उनके सैंपल लिए गए तो वह भी पॉजिटिव मिली।
केस 2
मेडिकल कॉलेज में भर्ती एक बच्चे के कांटेक्ट में आकर एक चिकित्सक को स्वाइन फ्लू हो गया। जब तक बच्चे का सैंपल लेकर उसे लखनऊ भेजा गया, उस दौरान सर्विलांस टीम ने उसका इलाज तो किया लेकिन आइसोलेशन में नहीं रखा। लोगाें से मिलना जुलना और कांटैक्ट में रहने के चलते वायरस अस्पताल के दो डॉक्टरों को हुआ।
स्वाइन फ्लू मामले में संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट देर से आने के चलते बीमारी बढ़ रही है। दो केस में यही हुआ है। महाराष्ट्र और लखनऊ से आए सेना के जवान बीमार हुए। वह सैन्य अस्पताल में भर्ती हुए तो नर्स उनके कांटैक्ट में आई। इससे नर्स को भी स्वाइन फ्लू हो गया। जिला सर्विलांस टीम द्वारा मरीजाें को संदिग्ध घोषित करके उनका सैंपल तो लिया जा रहा है, लेकिन उनको आइसोलेट नहीं किया जा रहा। मरीज अपने परिवार और अन्य लोगाें के संपर्क में लगातार रहता है, जिससे बीमारी बढ़ रही है। अभी तक सामने आए मामलों में ज्यादातर मामले ऐसे ही हैं जिसमें कांटैक्ट से स्वाइन फ्लू हुआ है। एक मेडिकल कॉलेज में दो डॉक्टर और एक मरीज, एक अस्पताल में दो मरीज और एक नर्स के अलावा दो अन्य मामलाें में भी साथ के लोग शामिल थे। स्वाइन फ्लू के अब तक 14 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं।
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कांटेक्ट में आए मरीजों को भी दी जा रही टेमी फ्लू
जिला सर्विलांस अधिकारी और एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि संदिग्ध मरीजों को टेमी फ्लू देने के साथ ही जो लोग इनके कांटैक्ट में आए हैं उनको भी टेमी फ्लू दी जा रही है, लेकिन कांटैक्ट वाले लोगाें को टेमी फ्लू तब दी जा रही है जब संदिग्ध मरीज में स्वाइन फ्लू वायरस की पुष्टि हो रही है।
लखनऊ जा रहे हैं सैंपल, मेल पर आ रही है रिपोर्ट
डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू की जांच बरेली में नहीं हो सकती। इसके सैंपल लखनऊ पीजीआई और केजीएमयू भेजी जा रही है। वहां से रिपोर्ट मेल द्वारा प्राप्त हो रही है। डॉ. अशोक ने बताया कि लखनऊ में पूरे प्रदेश से सैंपल आ रहे हैं, जिसके चलते एक से दो दिन का समय लग जाता है।
डायबिटीज पीड़ित और गर्भवती रखें खास ख्याल
डायबिटीज पीड़ित और गर्भवती महिलाआें को स्वाइन फ्लू में खास ख्याल रखने की जरूरत है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि डायबिटीज के मरीजों में जहां शुगर लेवल कम व अधिक हुआ वैसे ही वायरस उनको जकड़ सकता है। इसी तरह गर्भवती महिलाआें में गर्भावस्था के दौरान रोगाें से लड़ने की क्षमता कम होती है इसलिए वायरस इन्हें आसानी से गिरफ्त में ले लेता है। ऐसे लोग बीमार लोगाें के पास न जाएं।
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एक अस्पताल में भर्ती दो मरीज को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। उनके सैंपल लिए जाने तक उन्हें अस्पताल में रखा गया। इनके आसपास डॉक्टर और नर्सों का आना-जाना लगा रहा। आइसोलेशन न होने की वजह से नर्स को भी वायरस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। उनके सैंपल लिए गए तो वह भी पॉजिटिव मिली।
केस 2
मेडिकल कॉलेज में भर्ती एक बच्चे के कांटेक्ट में आकर एक चिकित्सक को स्वाइन फ्लू हो गया। जब तक बच्चे का सैंपल लेकर उसे लखनऊ भेजा गया, उस दौरान सर्विलांस टीम ने उसका इलाज तो किया लेकिन आइसोलेशन में नहीं रखा। लोगाें से मिलना जुलना और कांटैक्ट में रहने के चलते वायरस अस्पताल के दो डॉक्टरों को हुआ।
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स्वाइन फ्लू मामले में संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट देर से आने के चलते बीमारी बढ़ रही है। दो केस में यही हुआ है। महाराष्ट्र और लखनऊ से आए सेना के जवान बीमार हुए। वह सैन्य अस्पताल में भर्ती हुए तो नर्स उनके कांटैक्ट में आई। इससे नर्स को भी स्वाइन फ्लू हो गया। जिला सर्विलांस टीम द्वारा मरीजाें को संदिग्ध घोषित करके उनका सैंपल तो लिया जा रहा है, लेकिन उनको आइसोलेट नहीं किया जा रहा। मरीज अपने परिवार और अन्य लोगाें के संपर्क में लगातार रहता है, जिससे बीमारी बढ़ रही है। अभी तक सामने आए मामलों में ज्यादातर मामले ऐसे ही हैं जिसमें कांटैक्ट से स्वाइन फ्लू हुआ है। एक मेडिकल कॉलेज में दो डॉक्टर और एक मरीज, एक अस्पताल में दो मरीज और एक नर्स के अलावा दो अन्य मामलाें में भी साथ के लोग शामिल थे। स्वाइन फ्लू के अब तक 14 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं।
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कांटेक्ट में आए मरीजों को भी दी जा रही टेमी फ्लू
जिला सर्विलांस अधिकारी और एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि संदिग्ध मरीजों को टेमी फ्लू देने के साथ ही जो लोग इनके कांटैक्ट में आए हैं उनको भी टेमी फ्लू दी जा रही है, लेकिन कांटैक्ट वाले लोगाें को टेमी फ्लू तब दी जा रही है जब संदिग्ध मरीज में स्वाइन फ्लू वायरस की पुष्टि हो रही है।
लखनऊ जा रहे हैं सैंपल, मेल पर आ रही है रिपोर्ट
डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू की जांच बरेली में नहीं हो सकती। इसके सैंपल लखनऊ पीजीआई और केजीएमयू भेजी जा रही है। वहां से रिपोर्ट मेल द्वारा प्राप्त हो रही है। डॉ. अशोक ने बताया कि लखनऊ में पूरे प्रदेश से सैंपल आ रहे हैं, जिसके चलते एक से दो दिन का समय लग जाता है।
डायबिटीज पीड़ित और गर्भवती रखें खास ख्याल
डायबिटीज पीड़ित और गर्भवती महिलाआें को स्वाइन फ्लू में खास ख्याल रखने की जरूरत है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि डायबिटीज के मरीजों में जहां शुगर लेवल कम व अधिक हुआ वैसे ही वायरस उनको जकड़ सकता है। इसी तरह गर्भवती महिलाआें में गर्भावस्था के दौरान रोगाें से लड़ने की क्षमता कम होती है इसलिए वायरस इन्हें आसानी से गिरफ्त में ले लेता है। ऐसे लोग बीमार लोगाें के पास न जाएं।