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पुलिस भर्ती दौड़ में कई लड़कियां बेहोश हुईं
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:25 AM IST
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बरेली। पीएसी मैदान में चल रही पुलिस आरक्षी भर्ती दौड़ में रविवार को अजब नजारा दिखा। यहां कई लड़कियां बेहोश हो गईं। कुछ तो चक्कर भी पूरे नहीं लगा सकी थीं। एक ही एंबुलेंस की वजह से समस्या आई। भर्ती बोर्ड के चिकित्सकों ने वहीं इनका उपचार किया।
तीन दिन से प्रक्रिया चल रही है। लिखित परीक्षा और प्रमाणपत्र सत्यापन के बाद अभ्यर्थियों की दौड़ हो रही है। लड़कों को 25 मिनट में 4.8 किमी और लड़कियों को 14 मिनट में 2.4 किमी दौड़ लगाने पर क्वालिफाई किया जा रहा है। रविवार दोपहर पहली बार लड़कियों की दौड़ हुई। पूरे चक्कर लगाने से पहले लड़कियां गिरने लगीं तो हड़कंप मच गया। सीओ टू सीमा यादव के साथ महिला पुलिसकर्मी एक लड़की को उठातीं तो दूसरी गिर पड़ती। मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा की नेहा, बिलारी की आयुषी, मुरादाबाद की पूनम, कंचन, प्रियंका और हापुड़ की साक्षी समेत दस से ज्यादा लड़कियां बेहोश हो गईं। पूनम और प्रियंका को पहले एंबुलेंस में लिया गया पर होश आने पर मौके पर ही भर्ती बोर्ड के डॉ. रजनी कांत और डॉ. विवेक कुमार ने उपचार कर दिया। इससे पहले कई लड़के अचेत हुए। बोर्ड सदस्य सीमा यादव ने बताया कि बिना या कम तैयारी के दौड़ने से समस्या उत्पन्न हुई। सभी का मौके पर उपचार कर दिया गया है।
तेज धूप में दौड़ से बिगड़ी हालत
गश खाने वाले अभ्यर्थियों व उनके परिवार के लोगों का कहना था कि दौड़ सुबह या शाम के वक्त होनी चाहिए थी। धूप में दौड़ से यह हाल हुआ। डॉ. विवेक ने बताया कि लंबे समय तक खाद्य पदार्थ न लेने और परिश्रम से हाइपोग्लेसीमिया बन जाता है। ऑक्सीजन की कमी से भी अचेत होने की समस्या होती है।
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58 में दस लड़कियां ही पास
रविवार को 861 लड़कों ने दौड़ लगाई, जिनमें 518 पास हुए। कुल 58 लड़कियों ने दौड़ लगाई, जिनमें से 48 फेल हो गईं। भर्ती बोर्ड के मुताबिक रोज चालीस फीसदी अभ्यर्थी दौड़ में फेल हो रहे हैं। इनमें भी ज्यादा संख्या शहरी पृष्ठभूमि वालों की है। डॉ. रजनीकांत ने बताया कि फास्ट फूड पर निर्भरता वाले ज्यादा फेल हो रहे हैं। ग्रामीण परिवेश वाले युवा दमखम दिखा रहे हैं।
पहले ये थे मानक
पुलिस भर्ती में फिजिकल अब कम कर दिया गया है। भर्ती बोर्ड के सदस्य जेएन पांडेय ने बताया कि पहले दस किमी दौड़, बीम, लांग जंप, बॉल थ्रो और दंड बैठक कराई जाती थी। अगर पुराने मानक लागू होते तो दस फीसदी अभ्यर्थी ही पास हो पाते।
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तीन दिन से प्रक्रिया चल रही है। लिखित परीक्षा और प्रमाणपत्र सत्यापन के बाद अभ्यर्थियों की दौड़ हो रही है। लड़कों को 25 मिनट में 4.8 किमी और लड़कियों को 14 मिनट में 2.4 किमी दौड़ लगाने पर क्वालिफाई किया जा रहा है। रविवार दोपहर पहली बार लड़कियों की दौड़ हुई। पूरे चक्कर लगाने से पहले लड़कियां गिरने लगीं तो हड़कंप मच गया। सीओ टू सीमा यादव के साथ महिला पुलिसकर्मी एक लड़की को उठातीं तो दूसरी गिर पड़ती। मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा की नेहा, बिलारी की आयुषी, मुरादाबाद की पूनम, कंचन, प्रियंका और हापुड़ की साक्षी समेत दस से ज्यादा लड़कियां बेहोश हो गईं। पूनम और प्रियंका को पहले एंबुलेंस में लिया गया पर होश आने पर मौके पर ही भर्ती बोर्ड के डॉ. रजनी कांत और डॉ. विवेक कुमार ने उपचार कर दिया। इससे पहले कई लड़के अचेत हुए। बोर्ड सदस्य सीमा यादव ने बताया कि बिना या कम तैयारी के दौड़ने से समस्या उत्पन्न हुई। सभी का मौके पर उपचार कर दिया गया है।
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तेज धूप में दौड़ से बिगड़ी हालत
गश खाने वाले अभ्यर्थियों व उनके परिवार के लोगों का कहना था कि दौड़ सुबह या शाम के वक्त होनी चाहिए थी। धूप में दौड़ से यह हाल हुआ। डॉ. विवेक ने बताया कि लंबे समय तक खाद्य पदार्थ न लेने और परिश्रम से हाइपोग्लेसीमिया बन जाता है। ऑक्सीजन की कमी से भी अचेत होने की समस्या होती है।
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58 में दस लड़कियां ही पास
रविवार को 861 लड़कों ने दौड़ लगाई, जिनमें 518 पास हुए। कुल 58 लड़कियों ने दौड़ लगाई, जिनमें से 48 फेल हो गईं। भर्ती बोर्ड के मुताबिक रोज चालीस फीसदी अभ्यर्थी दौड़ में फेल हो रहे हैं। इनमें भी ज्यादा संख्या शहरी पृष्ठभूमि वालों की है। डॉ. रजनीकांत ने बताया कि फास्ट फूड पर निर्भरता वाले ज्यादा फेल हो रहे हैं। ग्रामीण परिवेश वाले युवा दमखम दिखा रहे हैं।
पहले ये थे मानक
पुलिस भर्ती में फिजिकल अब कम कर दिया गया है। भर्ती बोर्ड के सदस्य जेएन पांडेय ने बताया कि पहले दस किमी दौड़, बीम, लांग जंप, बॉल थ्रो और दंड बैठक कराई जाती थी। अगर पुराने मानक लागू होते तो दस फीसदी अभ्यर्थी ही पास हो पाते।