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एआरटी सेंटर ने उठाई बच्चों के एडमिशन की जिम्मेदारी
Updated Wed, 14 Jun 2017 10:06 PM IST
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बरेली।
एचआईवी पीड़ित मरीजों के बच्चे भी अब कांवेंट स्कूलों में पढ़ सकेंगे। इसकी जिम्मेदारी एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट) सेंटर ने उठाई है। बच्चों के एडमिशन के लिए सारे कागज यहीं से तैयार किए जाएंगे और डीएम व बीएसए को सूचित किया जाएगा। अभी 19 बच्चाें के एडमिशन कराए जाने हैं।
जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में इस समय 1375 एचआइवी मरीज पूरे मंडल के पंजीकृत हैं। इनमें बरेली से 638, बदायूं से 214, पीलीभीत से 150 और शाहजहांपुर से 142 मरीज यहां आते हैं। इन सभी रोगियाें में 59 बच्चे हैं। इनकी उम्र दो से 14 साल के बीच है। अधिकतर बच्चे तो पढ़ रहे हैं लेकिन करीब 19 बच्चाें के एडमिशन नहीं हुए हैं। इसके लिए एआरटी सेंटर बच्चाें की सभी प्रक्रिया पूरी करेगा। यहां के डाटा मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों का कांवेंट स्कूल में प्रथम कक्षा में एडमिशन कराया जाना है। इनको 12वीं तक मुफ्त शिक्षा मिले, इस पर जोर हैं। इसलिए ऐसे 19 बच्चाें की सूची डीएम व बीएसए तक पहुंचा दी गई है। एआरटी सेंटर के मेडिकल ऑफिसर डॉ. संजीव ने बताया कि आरटीई के तहत बच्चाें को मुफ्त शिक्षा दी जानी है। इसमें एचआईवी मरीजों के बच्चे भी शामिल हैं।
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एचआईवी पीड़ित मरीजों के बच्चे भी अब कांवेंट स्कूलों में पढ़ सकेंगे। इसकी जिम्मेदारी एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट) सेंटर ने उठाई है। बच्चों के एडमिशन के लिए सारे कागज यहीं से तैयार किए जाएंगे और डीएम व बीएसए को सूचित किया जाएगा। अभी 19 बच्चाें के एडमिशन कराए जाने हैं।
जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में इस समय 1375 एचआइवी मरीज पूरे मंडल के पंजीकृत हैं। इनमें बरेली से 638, बदायूं से 214, पीलीभीत से 150 और शाहजहांपुर से 142 मरीज यहां आते हैं। इन सभी रोगियाें में 59 बच्चे हैं। इनकी उम्र दो से 14 साल के बीच है। अधिकतर बच्चे तो पढ़ रहे हैं लेकिन करीब 19 बच्चाें के एडमिशन नहीं हुए हैं। इसके लिए एआरटी सेंटर बच्चाें की सभी प्रक्रिया पूरी करेगा। यहां के डाटा मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों का कांवेंट स्कूल में प्रथम कक्षा में एडमिशन कराया जाना है। इनको 12वीं तक मुफ्त शिक्षा मिले, इस पर जोर हैं। इसलिए ऐसे 19 बच्चाें की सूची डीएम व बीएसए तक पहुंचा दी गई है। एआरटी सेंटर के मेडिकल ऑफिसर डॉ. संजीव ने बताया कि आरटीई के तहत बच्चाें को मुफ्त शिक्षा दी जानी है। इसमें एचआईवी मरीजों के बच्चे भी शामिल हैं।
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