{"_id":"5ae8ce684f1c1b9e098b79c4","slug":"151525206632-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमके ठिकाने लग रहा सरकारी धन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमके ठिकाने लग रहा सरकारी धन
Updated Wed, 02 May 2018 07:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नियमों को नजरअंदाज करके ‘माननीयों’ की निधि को ठिकाने लगाने का सिलसिला जारी है। दरअसल, सांसद और विधायक निधि से मंजूर सड़कों के निर्माण में यह खेल जमकर हो रहा है। इसकी वजह से आरईएस के अभियंता रोड बनाने के मानकों को पूरा कराए बगैर आंख मूंदकर एस्टीमेट बना रहे हैं। इसमें यह भी नहीं देखा जा रहा है कि सांसद या विधायक जिस जगह पर सीसी, डामर या खड़ंजा रोड का प्रस्ताव दे रहे हैं, वहां रोड बनने लायक है भी या नहीं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की निधि से बनने वाली सड़कों के निर्माण में धन के दुरुपयोग के मामले सामने आ रहे हैं।
सांसद और विधायक क्षेत्र की जनता की डिमांड के आधार पर सीसी, डामर या खड़ंजा के निर्माण का प्रस्ताव जिला ग्राम्य एवं विकास अभिकरण (डीआरडीए) को देते हैं। डीएम और सीडीओ से होते हुए ये प्रस्ताव कार्यदायी संस्था आरईएस के पास पहुंचते हैं। नियम तो यह है कि आरईएस के अभियंता मौके पर पहुंचकर यह चेक करें कि जिस जगह के लिए रोड बनाने का प्रस्ताव है, उसकी वहां के लिए क्या उपयोगिता है। मसलन, कोई गली ज्यादा व्यस्त रहती है, वहां सीसी रोड नहीं बन सकती हैं। ऐसी जगह पर इंटर लॉकिंग रोड बनाने की तकनीकी सलाह आरईएस को देनी चाहिए। ऐसा ही सुझाव डामर या खड़ंजा रोड निर्माण को लेकर भी दिया जाना चाहिए। अगर कहीं जिस तरह की रोड की डिमांड की गई और वहां उसके मानक पूरे नहीं हो रहे हैं तो आरईएस को उसके निर्माण पर रोक लगाने का भी अधिकार है, जबकि सांसद और विधायकों की निधि की ठिकाने लगाने के लिए आरईएस के इंजीनियर इसका अनुपालन ही नहीं कर रहे हैं। डीआरडीए से आने वाले माननीयों के प्रस्ताव पर आंख बंदकर एस्टीमेट बना दिए जाते है। लंबे वक्त से आरईएस ने सड़कों के किसी प्रस्ताव पर ऐसी आपत्ति नहीं लगाई है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की निधि से बनने वाली तमाम सड़कें जल्द खराब हो रही है। इससे हर साल सरकारी धन को चूना लग रहा है।
केस नंबर-एक
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के संसदीय क्षेत्र ब्लॉक दमखोदा के इगरा में सांसद निधि से 115 मीटर खड़ंजा निर्माण कराया गया था। रोड का सही से परीक्षण कराए बगैर आरईएस ने यहां रोड बनवा दी, जो कुछ ही दिनों में उखड़ गई। शिकायत मेनका गांधी तक पहुंची तो उन्होंने आरईएस के अफसरों की जमकर क्लास ली। तब खड़ंजे को उखाड़ कर सही किया गया। इससे विभाग की काफी किरकरी हुई।
विज्ञापन
केस नंबर-दो
शहर के सुभाषनगर में पुरानी चांदमारी में रोड काफी व्यस्त रहता है। खुद आरईएस के अभियंता मानते हैं कि रोड पर इंटर लॉकिंग ईंट बिछाई जानी चाहिए, लेकिन यहां सीमेंट रोड बना दिया गया। इससे यह सड़क महीनेभर भी नहीं टिकी और अब इसे फिर से बनवाया जा रहा है।
जो प्रस्ताव डीआरडीए से होते हुए आरईएस में पहुंचते हैं, उनका एस्टीमेट बनाकर दे दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर यह भी देखा जाता है कि किस जगह पर सीसी या डामर रोड बननी चाहिए। - जगभूषण शर्मा, अधिशासी अभियंता, आरईएस
विज्ञापन
सांसद और विधायक क्षेत्र की जनता की डिमांड के आधार पर सीसी, डामर या खड़ंजा के निर्माण का प्रस्ताव जिला ग्राम्य एवं विकास अभिकरण (डीआरडीए) को देते हैं। डीएम और सीडीओ से होते हुए ये प्रस्ताव कार्यदायी संस्था आरईएस के पास पहुंचते हैं। नियम तो यह है कि आरईएस के अभियंता मौके पर पहुंचकर यह चेक करें कि जिस जगह के लिए रोड बनाने का प्रस्ताव है, उसकी वहां के लिए क्या उपयोगिता है। मसलन, कोई गली ज्यादा व्यस्त रहती है, वहां सीसी रोड नहीं बन सकती हैं। ऐसी जगह पर इंटर लॉकिंग रोड बनाने की तकनीकी सलाह आरईएस को देनी चाहिए। ऐसा ही सुझाव डामर या खड़ंजा रोड निर्माण को लेकर भी दिया जाना चाहिए। अगर कहीं जिस तरह की रोड की डिमांड की गई और वहां उसके मानक पूरे नहीं हो रहे हैं तो आरईएस को उसके निर्माण पर रोक लगाने का भी अधिकार है, जबकि सांसद और विधायकों की निधि की ठिकाने लगाने के लिए आरईएस के इंजीनियर इसका अनुपालन ही नहीं कर रहे हैं। डीआरडीए से आने वाले माननीयों के प्रस्ताव पर आंख बंदकर एस्टीमेट बना दिए जाते है। लंबे वक्त से आरईएस ने सड़कों के किसी प्रस्ताव पर ऐसी आपत्ति नहीं लगाई है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की निधि से बनने वाली तमाम सड़कें जल्द खराब हो रही है। इससे हर साल सरकारी धन को चूना लग रहा है।
विज्ञापन
केस नंबर-एक
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के संसदीय क्षेत्र ब्लॉक दमखोदा के इगरा में सांसद निधि से 115 मीटर खड़ंजा निर्माण कराया गया था। रोड का सही से परीक्षण कराए बगैर आरईएस ने यहां रोड बनवा दी, जो कुछ ही दिनों में उखड़ गई। शिकायत मेनका गांधी तक पहुंची तो उन्होंने आरईएस के अफसरों की जमकर क्लास ली। तब खड़ंजे को उखाड़ कर सही किया गया। इससे विभाग की काफी किरकरी हुई।
विज्ञापन
केस नंबर-दो
शहर के सुभाषनगर में पुरानी चांदमारी में रोड काफी व्यस्त रहता है। खुद आरईएस के अभियंता मानते हैं कि रोड पर इंटर लॉकिंग ईंट बिछाई जानी चाहिए, लेकिन यहां सीमेंट रोड बना दिया गया। इससे यह सड़क महीनेभर भी नहीं टिकी और अब इसे फिर से बनवाया जा रहा है।
जो प्रस्ताव डीआरडीए से होते हुए आरईएस में पहुंचते हैं, उनका एस्टीमेट बनाकर दे दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर यह भी देखा जाता है कि किस जगह पर सीसी या डामर रोड बननी चाहिए। - जगभूषण शर्मा, अधिशासी अभियंता, आरईएस