{"_id":"5cdb2180bdec22073f3f1595","slug":"11557864832-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गन्ने की अर्ली प्रजातियों से किसानों की दो गुनी होगी आय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गन्ने की अर्ली प्रजातियों से किसानों की दो गुनी होगी आय
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बरेली। अर्ली प्रजातियों ने किसानों को बेहतर गन्ना उत्पादन का अवसर दे दिया है। गन्ना विभाग ने किसानों को अधिक उपज की प्रजातियों का गन्ना बोने और उसके साथ सहफसली खेती की सलाह दी है, ताकि उनकी आमदनी दो गुनी करने में मदद की जा सके।
कोयंबटूर की - 0238 अर्ली प्रजाति किसानों में बहुत पसंद की जा रही है। इस प्रजाति के गन्ने की उपज 800 क्विंटल से 2800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। रुहेलखंड में औसतन 70 फीसदी किसानों ने इसी प्रजाति के गन्ने की बुवाई की है, जिससे अगले सीजन में उत्पादन और बेहतर होने के आसार हैं।
गन्ने की अर्ली प्रजातियों में कोयंबटूर की को-0118 की प्रजाति भी उपज के लिहाज से बेहतर है। इन दोनों प्रजातियों के अलावा को-98014 प्रजाति भी किसानों की पसंद बनी हुई है। इस प्रजाति का गन्ना लंबा और सख्त होता है। जंगली सुअर या सियार इस प्रजाति का गन्ना आसानी से काट नहीं पाते। जलभराव वाले खेतों में कोलक -94194 की बुवाई बेहतर है। गन्ने की यह प्रजातियां कोयंबटूर की हैं। दूसरी ओर शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद ने कोएस-8272 प्रजाति इजाद की है। इस प्रजाति का गन्ना नरम है और आसानी से छीला जा सकता है। यह सब अर्ली प्रजातियां हैं, जिनकी बुवाई किसान 15 अक्तूबर से 15 नवंबर के बीच में करते हैं। इस समय बोया गया गन्ना न केवल वजन में अधिक होता है बल्कि इस गन्ने से चीनी की रिकवरी भी अधिक होती है।
विज्ञापन
सामान्य प्रजातियों से उत्पादन कम
गन्ने की सामान्य प्रजातियों कोसा-08279, 08432, 08276, 12232 और 96279 फरवरी से अप्रैल तक बोयी जाती हैं। कुछ किसान मई तक भी इन प्रजातियों के गन्ने की बुवाई करते हैं। विशेषज्ञों की माने तो सामान्य प्रजातियों के गन्ने का उत्पादन अर्ली प्रजातियों की तुलना में औसतन 20 से 30 फीसदी प्रति हेक्टेयर तक कम होता है। मगर, किसान गेहूं कटने के बाद इस गन्ने की बुवाई करते हैं। इसलिए वह अपना औसत निकाल लेते हैं।
गन्ने की अर्ली प्रजातियों में को-0238 सबसे अच्छी है। जो किसान इस प्रजाति के गन्ने की बेहतर देखभाल कर लेते हैं, उनके खेत में प्रति हेक्टेयर 3000 क्विंटल तक गन्ने की उपज हुई है। किसान इस प्रजाति के गन्ने के साथ सह फसली खेती करके अपनी आमदनी कई गुना तक बढ़ा सकते हैं। - सत्येंद्र सिंह, उपायुक्त गन्ना बरेली मंडल
कोयंबटूर की - 0238 अर्ली प्रजाति किसानों में बहुत पसंद की जा रही है। इस प्रजाति के गन्ने की उपज 800 क्विंटल से 2800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। रुहेलखंड में औसतन 70 फीसदी किसानों ने इसी प्रजाति के गन्ने की बुवाई की है, जिससे अगले सीजन में उत्पादन और बेहतर होने के आसार हैं।
विज्ञापन
गन्ने की अर्ली प्रजातियों में कोयंबटूर की को-0118 की प्रजाति भी उपज के लिहाज से बेहतर है। इन दोनों प्रजातियों के अलावा को-98014 प्रजाति भी किसानों की पसंद बनी हुई है। इस प्रजाति का गन्ना लंबा और सख्त होता है। जंगली सुअर या सियार इस प्रजाति का गन्ना आसानी से काट नहीं पाते। जलभराव वाले खेतों में कोलक -94194 की बुवाई बेहतर है। गन्ने की यह प्रजातियां कोयंबटूर की हैं। दूसरी ओर शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद ने कोएस-8272 प्रजाति इजाद की है। इस प्रजाति का गन्ना नरम है और आसानी से छीला जा सकता है। यह सब अर्ली प्रजातियां हैं, जिनकी बुवाई किसान 15 अक्तूबर से 15 नवंबर के बीच में करते हैं। इस समय बोया गया गन्ना न केवल वजन में अधिक होता है बल्कि इस गन्ने से चीनी की रिकवरी भी अधिक होती है।
विज्ञापन
सामान्य प्रजातियों से उत्पादन कम
गन्ने की सामान्य प्रजातियों कोसा-08279, 08432, 08276, 12232 और 96279 फरवरी से अप्रैल तक बोयी जाती हैं। कुछ किसान मई तक भी इन प्रजातियों के गन्ने की बुवाई करते हैं। विशेषज्ञों की माने तो सामान्य प्रजातियों के गन्ने का उत्पादन अर्ली प्रजातियों की तुलना में औसतन 20 से 30 फीसदी प्रति हेक्टेयर तक कम होता है। मगर, किसान गेहूं कटने के बाद इस गन्ने की बुवाई करते हैं। इसलिए वह अपना औसत निकाल लेते हैं।
गन्ने की अर्ली प्रजातियों में को-0238 सबसे अच्छी है। जो किसान इस प्रजाति के गन्ने की बेहतर देखभाल कर लेते हैं, उनके खेत में प्रति हेक्टेयर 3000 क्विंटल तक गन्ने की उपज हुई है। किसान इस प्रजाति के गन्ने के साथ सह फसली खेती करके अपनी आमदनी कई गुना तक बढ़ा सकते हैं। - सत्येंद्र सिंह, उपायुक्त गन्ना बरेली मंडल