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डग्गामारों की बल्ले-बल्ले, पचास रुपये में पहुंचा रहे बदायूं
Updated Sun, 02 Dec 2018 01:56 AM IST
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बरेली। लाल फाटक रोड पर दिन में भारी वाहनों की नो एंट्री से डग्गामार वाहन संचालकों की मौज हो गई है। रोडवेज बसों को छोड़कर लोग इनसे सफर करना पसंद कर रहे हैं। जान जोखिम के बावजूद कम किराया और कम समय में पहुंचाने की वजह से इनका सफर लोगों की मजबूरी बन गया है।
लाल फाटक से बुखारा चौराहे तक भारी वाहनों का आवागमन बंद होने के बाद बरेली से बदायूं जाने वाली रोडवेज बसों को फरीदपुर होकर जाना पड़ रहा है। इसमें एक घंटा अतिरिक्त समय लगने के साथ ही करीब 93 रुपये किराया लग रहा है। इसका फायदा डग्गामार वाहन संचालकों ने उठाया है। चौपुला ओवरब्रिज के नीचे नेकपुर चीनी मिल के सामने से संचालित डग्गामार वाहन सिर्फ 50 रुपये में घंटे भर में बदायूं पहुंचाने का दम भरते हैं। मगर इन वाहनों में मुसाफिरों को भूसे की तरह ठूंसकर ले जाया जाता है। साथ ही हादसे की स्थिति में क्लेम मिलने की संभावना भी नहीं रहती। वहीं रोडवेज बसों के संचालन का रूट बदलने के बाद इन वाहनों की संख्या और फेरे भी बढ़ गए हैं। बरेली से बदायूं जाने वाले वाहनों में ज्यादा भीड़ होती है लेकिन वापसी में रोडवेज बसें चौपुला होकर शहर आने के चलते इनमें बहुत ज्यादा भीड़ नहीं रहती और किराया भी 59 रुपये ही लिया जाता है।
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लाल फाटक से बुखारा चौराहे तक भारी वाहनों का आवागमन बंद होने के बाद बरेली से बदायूं जाने वाली रोडवेज बसों को फरीदपुर होकर जाना पड़ रहा है। इसमें एक घंटा अतिरिक्त समय लगने के साथ ही करीब 93 रुपये किराया लग रहा है। इसका फायदा डग्गामार वाहन संचालकों ने उठाया है। चौपुला ओवरब्रिज के नीचे नेकपुर चीनी मिल के सामने से संचालित डग्गामार वाहन सिर्फ 50 रुपये में घंटे भर में बदायूं पहुंचाने का दम भरते हैं। मगर इन वाहनों में मुसाफिरों को भूसे की तरह ठूंसकर ले जाया जाता है। साथ ही हादसे की स्थिति में क्लेम मिलने की संभावना भी नहीं रहती। वहीं रोडवेज बसों के संचालन का रूट बदलने के बाद इन वाहनों की संख्या और फेरे भी बढ़ गए हैं। बरेली से बदायूं जाने वाले वाहनों में ज्यादा भीड़ होती है लेकिन वापसी में रोडवेज बसें चौपुला होकर शहर आने के चलते इनमें बहुत ज्यादा भीड़ नहीं रहती और किराया भी 59 रुपये ही लिया जाता है।
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