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डीआईजी के आदेश में बड़े बाबू ने कर दी ‘मिलावट’, जींस पहनकर आने पर लगवा दी पाबंदी
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बरेली। डीआईजी ने अपने स्टाफ के लिए सप्ताह में परेड वाले दो दिन के लिए वर्दी पहनकर आने की अनिवार्यता लागू करने को कहा था, लेकिन उनके दफ्तर के बड़े बाबू ने एक कदम और आगे बढ़कर उनसे यह आदेश भी जारी करा दिया कि कोई भी कर्मचारी दफ्तर में जींस पहनकर नहीं आएगा। बड़े बाबू की यह होशियारी दफ्तर के लोगों की सुगबुगाहट के बाद डीआईजी की जानकारी तक पहुंची तो उन्होंने बड़े बाबू को तलब कर जमकर फटकार लगाई और दोबारा ऐसी हरकत पर कार्रवाई की चेतावनी दी। जींस न पहनकर आने का आदेश भी निरस्त कर दिया।
डीआईजी से उनके ही दफ्तर के बड़े बाबू ने होशियारी दिखाकर ऐसा आदेश जारी करा लिया जिसने उनकी खासी फजीहत करा दी। दरअसल महकमे में पुराना नियम है कि मंगलवार और शुक्रवार को परेड के दिन लिपिक वर्ग और अन्य श्रेणी का स्टाफ भी दफ्तर में वर्दी पहनकर आएगा। समय-समय पर अधिकारी सरकुलर जारी कर स्टाफ को वर्दी पहनने के लिए सचेत करते रहते हैं। इसी आदेश का रिन्युवल दो दिन पहले बड़े बाबू ने डीआईजी राजेश कुमार पांडेय से कराया था। डीआईजी ने आदेश पर साइन कर दिया। यह राज बाद में खुला कि आदेश के बीच बड़े बाबू ने एक लाइन अपनी मर्जी से डाल दी, जिसमें लिख दिया कि कोई भी कर्मचारी सामान्य दिनों में भी जींस पहनकर दफ्तर न आए।
बताते हैं कि बुधवार को जब आदेश सार्वजनिक हुआ तो स्टाफ के कई लोग दुविधा में पड़ गए। इनमें से अधिकांश अक्सर जींस पहनकर आते हैं। कभी अफसरों ने भी इस पर एतराज नहीं किया। दोपहर के वक्त इसकी जानकारी डीआईजी तक पहुंची तो उन्होंने बड़े बाबू को तलब करके वह आदेश देखा। उन्होंने पूछा कि जींस पर पाबंदी लगाने के आदेश के बारे में उनसे चर्चा क्यों नहीं की गई। इस पर बड़े बाबू बगलें झांकने लगे। डीआईजी ने उन्हें फटकार लगाकर भविष्य में ऐसी गलती करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके साथ ही जींस संबंधी आदेश निरस्त कर दिया।
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डीआईजी से उनके ही दफ्तर के बड़े बाबू ने होशियारी दिखाकर ऐसा आदेश जारी करा लिया जिसने उनकी खासी फजीहत करा दी। दरअसल महकमे में पुराना नियम है कि मंगलवार और शुक्रवार को परेड के दिन लिपिक वर्ग और अन्य श्रेणी का स्टाफ भी दफ्तर में वर्दी पहनकर आएगा। समय-समय पर अधिकारी सरकुलर जारी कर स्टाफ को वर्दी पहनने के लिए सचेत करते रहते हैं। इसी आदेश का रिन्युवल दो दिन पहले बड़े बाबू ने डीआईजी राजेश कुमार पांडेय से कराया था। डीआईजी ने आदेश पर साइन कर दिया। यह राज बाद में खुला कि आदेश के बीच बड़े बाबू ने एक लाइन अपनी मर्जी से डाल दी, जिसमें लिख दिया कि कोई भी कर्मचारी सामान्य दिनों में भी जींस पहनकर दफ्तर न आए।
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बताते हैं कि बुधवार को जब आदेश सार्वजनिक हुआ तो स्टाफ के कई लोग दुविधा में पड़ गए। इनमें से अधिकांश अक्सर जींस पहनकर आते हैं। कभी अफसरों ने भी इस पर एतराज नहीं किया। दोपहर के वक्त इसकी जानकारी डीआईजी तक पहुंची तो उन्होंने बड़े बाबू को तलब करके वह आदेश देखा। उन्होंने पूछा कि जींस पर पाबंदी लगाने के आदेश के बारे में उनसे चर्चा क्यों नहीं की गई। इस पर बड़े बाबू बगलें झांकने लगे। डीआईजी ने उन्हें फटकार लगाकर भविष्य में ऐसी गलती करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके साथ ही जींस संबंधी आदेश निरस्त कर दिया।
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