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‘...जीना है बस उसी का जिसने मरना जान लिया’
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बरेली। संजय कम्युनिटी हॉल में हिंदुस्तान फाउंडेशन की ओर से शुक्रवार को गीत गंगा ‘मौलश्री के दीप’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें विख्यात कवि व गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र ने अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह रहे।
शुभारंभ फाउंडेशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा, सचिव डॉ. शशांक शुक्ला ने अतिथियों के स्वागत से किया। इसके बाद डॉ. मिश्रा को पं. श्री राधेश्याम कथावाचक स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. मिश्र ने ‘एक बार और जाल फेंक रे मछेरे, जाने किस मछली में बंधन की चाह हो’, ‘जिंदगी को चाहिए क्या, धूप जल मिट्टी, हवा...’, शूल भी फूल हैं बस एक नजर गौर से जिंदगी तो देख’, ‘जिंदगी अभिशाप भी वरदान भी’, ‘अमर हुआ वह जिसने प्राणों का बलिदान किया, जीना है बस उसी का जिसने मरना जान लिया’ समेत अन्य रचनाएं सुनाकर मन मोह लिया। यहां एडीएमई राम सेवक द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट अशोक शुक्ला, सोन रूपा, भारत भूषण शील, तुषार अग्रवाल, रामकृष्ण शुक्ला, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, नीलिमा पाठक, डॉ. कविता अरोरा मौजूद रहीं।
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शुभारंभ फाउंडेशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा, सचिव डॉ. शशांक शुक्ला ने अतिथियों के स्वागत से किया। इसके बाद डॉ. मिश्रा को पं. श्री राधेश्याम कथावाचक स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. मिश्र ने ‘एक बार और जाल फेंक रे मछेरे, जाने किस मछली में बंधन की चाह हो’, ‘जिंदगी को चाहिए क्या, धूप जल मिट्टी, हवा...’, शूल भी फूल हैं बस एक नजर गौर से जिंदगी तो देख’, ‘जिंदगी अभिशाप भी वरदान भी’, ‘अमर हुआ वह जिसने प्राणों का बलिदान किया, जीना है बस उसी का जिसने मरना जान लिया’ समेत अन्य रचनाएं सुनाकर मन मोह लिया। यहां एडीएमई राम सेवक द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट अशोक शुक्ला, सोन रूपा, भारत भूषण शील, तुषार अग्रवाल, रामकृष्ण शुक्ला, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, नीलिमा पाठक, डॉ. कविता अरोरा मौजूद रहीं।
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