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मरीजों काे फर्श पर लिटा वार्डबॉय कर रहे इलाज

Fri, 24 Jun 2016 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Fri, 24 Jun 2016 11:47 PM IST
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Patients are treated by ward boy lay on the floor
रोते परिवारीजन - फोटो : अमर उजाला
सूरतगंज सीएचसी पर उपचार के लिए आने वाले मरीजों को वार्ड में बेड भी नसीब नहीं हो रहा है। चिकित्सकों के न होने पर मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी वहां पर तैनात फार्मासिस्ट व वार्ड बॉय के जिम्मे है। वहीं पूरे परिसर में फैली गंदगी से लोग बेहाल रहते हैं।
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अमर उजाला टीम ने वहां जायजा लिया तो बढ़ती गर्मी से फैल रहे संक्रामक रोगों के प्रति स्वास्थ्य विभाग कितना सतर्क है, इसकी पोल खुल गई। आधे से ज्यादा चिकित्सक गायब मिले जिससे मरीज दिनभर इलाज के लिए भटकते रहे। वार्ड के फटे गंदे बेड, चारों ओर फैली गंदगी, खामोश पंखे, बिलबिलाते मरीज सीएचसी सूरतगंज की पहचान बन चुके हैं।
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इस सीएचसी पर प्रतिदिन 100-150 मरीजों की आमद होने के बावजूद भी चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने सीएचसी का भ्रमण किया तो हकीकत सामने आई। बबुरिहा निवासी मायादेवी (45) पेट दर्द से पीड़ित थी। जिन्हें परिवारीजनों ने उपचार के लिए सीएचसी पर भर्ती कराया। लेकिन चिकित्सकों ने उसे बेड के बजाए फर्श पर लिटा दिया। 
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वहीं हरसौली निवासी राजकुमारी (35) तेज बुखार व उल्टी दस्त से पीड़ित थी जो शुक्रवार को उपचार के लिए सीएचसी आई थी। इनको भी भर्ती करने के बाद जमीन पर लेटाया गया था। जबकि सीएचसी पर मरीजों को भर्ती करने के लिए वार्ड व बेड मौजूद हैं जिनकी सफाई नहीं कराई जाती है।

शुक्रवार को इमरजेंसी कक्ष भी बंद मिला। आठ डॉक्टरों में सिर्फ डॉ. तनुज,  डॉ. नवीन जायसवाल,  डॉ. जैसराज,  डॉ. सोनी अहुजा मौजूद थीं। जबकि प्रभारी अधीक्षक डॉ. मुकुंद पटेल समेत बाकी चिकित्सक नदारद थे। जिससे मरीजों को देखने का काम लगभग ठप था। जब चिकित्सक मरीजों को देखने बाहर नहीं आए तो कई मरीज मायूस होकर लौट गए। 


जंग खा रहा जनरेटर
बिजली न होने पर मरीजों को गर्मी से बचाने के लिए जनरेटर से पंखा चलाने का आदेश है। लेकिन डीजल बचाने के चक्कर में चिकित्सा प्रभारी जनरेटर नहीं चला रहे हैं। जिससे गर्मी से बेहाल मरीजों को हाथ से पंखा चलाकर गर्मी दूर करना पड़ रहा है।  
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