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नसबंदी के बाद गर्भवती हुई महिला
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:48 AM IST
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नसबंदी के बाद गर्भवती हुई महिला
बाराबंकी। एक महिला नसबंदी के बाद भी गर्भवती हो गई। बृहस्पतिवार को गर्भवती महिला सीएचसी बड़ागांव पहुंची तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां पर प्रसूता को हाथ न लगाना पड़े इसके लिए लखनऊ के क्वीन मेरी अस्पताल रेफर कर दिया। साथ आई आशा बहू शहर के एक निजी अस्पताल में कमीशन खोरी के चक्कर में ले जाकर भर्ती करा दिया।
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के करंद निवासी प्रेमा पत्नी धर्मवीर ने सीएचसी बड़ागांव में एक वर्ष पूर्व नसबंदी कराई थी। महिला के दो बच्चे पहले से हैं। नसबंदी के बाद महिला फिर से गर्भवती हो गई। महिला ने सीएचसी जाकर इसकी जानकारी दी तो वहां पर पहले से ही गर्भ ठहरने की बात बताई गई। पति का आरोप है कि चिकित्सकों ने प्रसव कराने की सलाह दी थी। प्रसव का समय पूरा होने पर पीड़ित प्रसूता को लेकर सीएचसी बड़ागांव पहुंचा। जहां अपनी कमी छुपाने के लिए वहां पर प्रसव करने के बजाए जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में नसबंदी के बाद गर्भवती होने की जानकारी होते ही उसे भर्ती करने के बजाए लखनऊ के क्वीनमेरी अस्पताल रेफर कर दिया। प्रसूता के साथ आई गांव की ही आशा बहू विमला देवी ने उसे शहर के एक निजी अस्पताल में जान पहचान होने की बात कहते हुए ले जाकर भर्ती करा दिया। पीड़ित का कहना है कि परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण दो बच्चे ही चाहता था। अब तीसरे बच्चे का पालन पोषण की समस्या उत्पन्न होगी। प्रसूता के पति ने सीएमओ से मामले की शिकायत की है।
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नसबंदी के बाद महिला के गर्भवती होने की शिकायत मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी। प्रसूता को सहायता राशि जांच के बाद दिलाई जाएगी।
- डॉ. रमेश चंद्र, सीएमओ
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बाराबंकी। एक महिला नसबंदी के बाद भी गर्भवती हो गई। बृहस्पतिवार को गर्भवती महिला सीएचसी बड़ागांव पहुंची तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां पर प्रसूता को हाथ न लगाना पड़े इसके लिए लखनऊ के क्वीन मेरी अस्पताल रेफर कर दिया। साथ आई आशा बहू शहर के एक निजी अस्पताल में कमीशन खोरी के चक्कर में ले जाकर भर्ती करा दिया।
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के करंद निवासी प्रेमा पत्नी धर्मवीर ने सीएचसी बड़ागांव में एक वर्ष पूर्व नसबंदी कराई थी। महिला के दो बच्चे पहले से हैं। नसबंदी के बाद महिला फिर से गर्भवती हो गई। महिला ने सीएचसी जाकर इसकी जानकारी दी तो वहां पर पहले से ही गर्भ ठहरने की बात बताई गई। पति का आरोप है कि चिकित्सकों ने प्रसव कराने की सलाह दी थी। प्रसव का समय पूरा होने पर पीड़ित प्रसूता को लेकर सीएचसी बड़ागांव पहुंचा। जहां अपनी कमी छुपाने के लिए वहां पर प्रसव करने के बजाए जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में नसबंदी के बाद गर्भवती होने की जानकारी होते ही उसे भर्ती करने के बजाए लखनऊ के क्वीनमेरी अस्पताल रेफर कर दिया। प्रसूता के साथ आई गांव की ही आशा बहू विमला देवी ने उसे शहर के एक निजी अस्पताल में जान पहचान होने की बात कहते हुए ले जाकर भर्ती करा दिया। पीड़ित का कहना है कि परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण दो बच्चे ही चाहता था। अब तीसरे बच्चे का पालन पोषण की समस्या उत्पन्न होगी। प्रसूता के पति ने सीएमओ से मामले की शिकायत की है।
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नसबंदी के बाद महिला के गर्भवती होने की शिकायत मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी। प्रसूता को सहायता राशि जांच के बाद दिलाई जाएगी।
- डॉ. रमेश चंद्र, सीएमओ