{"_id":"611020bd8ebc3e737d32a1a2","slug":"yamuna-reaches-two-meters-above-danger-mark-banda-news-knp6451203100","type":"story","status":"publish","title_hn":"यमुना खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर पहुंची","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमुना खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर पहुंची
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश और राजस्थान के धौलपुर बैराज से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी से उफनाई यमुना नदी रौद्र रूप लेती जा रही है। खतरे का निशान पार कर लगभग दो मीटर ऊपर बह रही है। लगभग पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि हो रही है।
उधर, मध्य प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से बांधों के उफनाने पर केन नदी का जल स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। खतरे से निशान अब महज दो मीटर दूर है। केंद्रीय जल आयोग ने सोमवार को भी दोनों नदियों के बढ़ने का अनुमान जताया है। बाढ़ से बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे पर आवागमन बंद हो गया। कानपुर-लखनऊ जाने के लिए अब वाहन सवारों को लगभग 20 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।
पिछले 24 घंटे में तेजी के साथ जलस्तर बढ़ने से यमुना नदी का जलस्तर रविवार को 101.86 मीटर पर पहुंच गया, जबकि नदी का खतरे का निशान 100 मीटर है। यमुना नदी लगभग दो मीटर के ऊपर बह रही है। यमुना नदी की बाढ़ का पानी तटवर्ती इलाकों में तेजी से घुसने लगा है। आधा सैकड़ा से ज्यादा गांव और मजरे टापू बनने की कगार पर आ गए हैं। उधर, केन नदी का जलस्तर भी करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
विज्ञापन
शनिवार को 101 मीटर पर बह रही केन रविवार को शाम 7 बजे तक 102.10 मीटर पर पहुंच गई। केन का खतरे का निशान 104 मीटर है। दो मीटर रह गई है, लेकिन बाढ़ की संभावना पर प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तैयारियां शुरू कर दी हैं। दोनों नदियों के जलस्तर में तेजी के साथ हो रही वृद्धि से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने जरूरी गृहस्थी के साथ सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन शुरू कर दिया है।
लगभग आधा सैकड़ा से ज्यादा गांवों में पानी घुस गया है। ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के लिए 31 नावों को लगाया गया है। बाढ़ चौकियों को भी सक्रिय कर दिया। यमुना की बाढ़ से बांदा-बहराइच हाईवे ठप हो गया। वाहनों को हमीरपुर और तिंदवारी होकर निकाला जा रहा है।
डीएम ने बाढ़ क्षेत्रों का निरीक्षण किया
बांदा। डीएम आनंद कुमार सिंह ने पैलानी तहसील क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांव सिंधनकलां, पैलानी डेला व मरझा मार्ग का निरीक्षण किया। अधिकारियों को यमुना और केन नदी की बाढ़ पर निचले इलाकों में लगातार निगाह रखने को कहा। लेखपालों को गांवों में सतर्क करने के निर्देश दिए हैं।
एसडीएम रामकुमार ने बताया कि बाढ़ से जसपुरा व कानाखेड़ा फीडर बंद होने पर हमीरपुर फीडर से जोड़कर आपूर्ति बहाल कराई गई है। डीएम ने नाविकों के नाम, पता व मोबाइल नंबर की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार टिमराज सिंह, एसओ पैलानी आदि उपस्थित रहे।
यमुना संग सहयोगी नदियां उफान पर, दर्जनों गांव घिरे
कमासिन/बबेरू। यमुना नदी के उफान पर होने से सहायक नदियां रवाय, बागै, मंदाकिनी का पानी तटवर्ती गांवों में घुस गया है। नदियों में बने रपटा डूबने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। लोग नावों का सहारा ले रहे हैं। पन्नाह और मऊ के नाले का पानी गांवों में घुस गया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पानी में तीन से चार फीट डूबा हुआ है। प्रधान प्रतिनिधि राकेश ने बताया कि औदहा से खेरा-कमासिन मार्ग जलमग्न हो गए।
ब्लाक जाने के लिए लोग मरका होकर जा रहे हैं। उधर, यमुना के किनारे के गांव खेरा, खटान, अमेढ़ी, मटेहना, कठार, दादौं, राघोपुर, अछरील, जोरावरपुर, लखनपुर के अलावा बागै नदी के तटवर्ती गांव इटर्रा, बढ़ौनी, घौसड़ गांव पानी से घिर गए हैं। उधर, बबेरू के औगासी में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से समगरा, बाकल, मरका, निभौर, समसुददीनपुर, मझीवां सहित एक दर्जन गांवों में पानी घुसने लगा है।
प्रशासन ने गांवों को खाली कराना शुरू कर दिया है। एसडीएम महेंद्र प्रताप सिंह ने गांवों को खाली करने का अलर्ट जारी किया है।
बाढ़ प्रभावित गांवों का लिया जायजा
बबेरू। पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र इटर्रा, अछरील, लखनपुर, जोरावरपुर आदि गांवों का जायजा लिया। पीड़ितों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ से जहां कच्चे मकान गिर गए है, वहीं सैकड़ों बीघा जमीन पर बोई खरीफ की फसल नष्ट हो गई।
छेदीलाल, शिव बहादुर यादव, पुत्तन सिंह, अखिलेश पाल, ज्ञान सिंह यादव, महंत इंद्रपाल यादव, कमलेश चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।
यमुना में बाढ़ से 42 मजरों की आपूर्ति लड़खड़ाई
बेंदाघाट। मध्य प्रदेश की घाटियों में हो रही बारिश व बांधों से छोड़े जा रहे पानी से यमुना उफान पर है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। समगरा से आई विद्युत मेनलाइन के 3 खंभों के तार जलालपुर गांव के पास बाढ़ के पानी में डूबने से तीन दिन से जौहरपुर सब स्टेशन की विद्युत आपूर्ति लड़खड़ा गई है। इस सब स्टेशन से जुड़े बेंदा समेत 42 मजरों में केवल बल्ब के सिर्फ लाल तार ही जल रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने बेंदाघाट में विद्युत आपूर्ति व जलालपुर के पास खंभों का उच्चीकरण करने को लेकर बांदा-फतेहपुर हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया था। तब अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन देकर जाम खुलवाया था, लेकिन तब से अब तक खंभों का उच्चीकरण नहीं हुआ। महिलाओं को घरों में गेहूं पीसना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था सुधार की मांग की है।
यमुना का पानी बेंदाखास में घुसा
बेंदाघाट। यमुना नदी में आई बाढ़ से बेंदाखास गांव के निचले इलाकों में पानी भर गया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेंदाखास भी बाढ़ की चपेट में है। उधर, जलालपुर के मजरा गौरा में भी पानी भर गया है। बाढ़ से बेंदा, अमलीकौर, गौरा जलालपुर, माचा, माचाहार, टोलियां आदि गांवों में किसानों द्वारा बोई गई ज्वार, अरहर, अंडी, उर्द, मूंग, तिल की हजारों बीघे की फसल सड़कर नष्ट हो गई।
यमुना के पानी से उसरा नाला भी उफना गया है। इससे जलालपुर, अमलीकौर, माचा, माचाहार, बबेरू जाने का रास्ता बंद हो गया है। लोगों को बबेरू, कमासिन जाने के लिए तिंदवारी से होकर जाना पड़ रहा है।
चिल्ला-कानपुर मार्ग में भरा पानी, चल रही नाव
खप्टिहा कलां। बांदा वाया चिल्ला-कानपुर मार्ग में यमुना का पानी सड़क के ऊपर से बह रहा, जिससे दोनों तरफ से आवागमन ठप है। यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ने से चिल्ला से महज 10 से 12 किमी की दूरी पर ललौली (फतेहपुर) गांव का मार्ग ठप हो गया है। यहां सड़क पर नाव चल रही हैं। कोई इधर से उधर न जाए इसके लिए डेढ़ सेक्शन पीएसी बटालियन लगा दी गई है।
उधर, एसडीएम पैलानी रामकुमार, तहसीलदार शिवराज सिंह बाढ़ग़्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। चिल्ला के समीप यमुना की बाढ़ से चिल्ला, दोहतरा, खजूरी, पदारथपुर, सहित दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां 17 बाढ़ चौकी व 3 सेक्टर बनाए गए हैं।
दूसरी ओर पैलानी एसओ उमेश कुमार सिंह, चौकी इंचार्ज ओम प्रकाश द्विवेदी सहित पुलिस बल नाव से केन नदी के उस पार बसे मजरे छनिहा डेरा, सेमरा डेरा, शिवपाल डेरा, पंडित डेरा में लोगों को सचेत करने में जुटे हैं।
विज्ञापन
उधर, मध्य प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से बांधों के उफनाने पर केन नदी का जल स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। खतरे से निशान अब महज दो मीटर दूर है। केंद्रीय जल आयोग ने सोमवार को भी दोनों नदियों के बढ़ने का अनुमान जताया है। बाढ़ से बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे पर आवागमन बंद हो गया। कानपुर-लखनऊ जाने के लिए अब वाहन सवारों को लगभग 20 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
पिछले 24 घंटे में तेजी के साथ जलस्तर बढ़ने से यमुना नदी का जलस्तर रविवार को 101.86 मीटर पर पहुंच गया, जबकि नदी का खतरे का निशान 100 मीटर है। यमुना नदी लगभग दो मीटर के ऊपर बह रही है। यमुना नदी की बाढ़ का पानी तटवर्ती इलाकों में तेजी से घुसने लगा है। आधा सैकड़ा से ज्यादा गांव और मजरे टापू बनने की कगार पर आ गए हैं। उधर, केन नदी का जलस्तर भी करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
विज्ञापन
शनिवार को 101 मीटर पर बह रही केन रविवार को शाम 7 बजे तक 102.10 मीटर पर पहुंच गई। केन का खतरे का निशान 104 मीटर है। दो मीटर रह गई है, लेकिन बाढ़ की संभावना पर प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तैयारियां शुरू कर दी हैं। दोनों नदियों के जलस्तर में तेजी के साथ हो रही वृद्धि से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने जरूरी गृहस्थी के साथ सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन शुरू कर दिया है।
लगभग आधा सैकड़ा से ज्यादा गांवों में पानी घुस गया है। ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के लिए 31 नावों को लगाया गया है। बाढ़ चौकियों को भी सक्रिय कर दिया। यमुना की बाढ़ से बांदा-बहराइच हाईवे ठप हो गया। वाहनों को हमीरपुर और तिंदवारी होकर निकाला जा रहा है।
डीएम ने बाढ़ क्षेत्रों का निरीक्षण किया
बांदा। डीएम आनंद कुमार सिंह ने पैलानी तहसील क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांव सिंधनकलां, पैलानी डेला व मरझा मार्ग का निरीक्षण किया। अधिकारियों को यमुना और केन नदी की बाढ़ पर निचले इलाकों में लगातार निगाह रखने को कहा। लेखपालों को गांवों में सतर्क करने के निर्देश दिए हैं।
एसडीएम रामकुमार ने बताया कि बाढ़ से जसपुरा व कानाखेड़ा फीडर बंद होने पर हमीरपुर फीडर से जोड़कर आपूर्ति बहाल कराई गई है। डीएम ने नाविकों के नाम, पता व मोबाइल नंबर की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार टिमराज सिंह, एसओ पैलानी आदि उपस्थित रहे।
यमुना संग सहयोगी नदियां उफान पर, दर्जनों गांव घिरे
कमासिन/बबेरू। यमुना नदी के उफान पर होने से सहायक नदियां रवाय, बागै, मंदाकिनी का पानी तटवर्ती गांवों में घुस गया है। नदियों में बने रपटा डूबने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। लोग नावों का सहारा ले रहे हैं। पन्नाह और मऊ के नाले का पानी गांवों में घुस गया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पानी में तीन से चार फीट डूबा हुआ है। प्रधान प्रतिनिधि राकेश ने बताया कि औदहा से खेरा-कमासिन मार्ग जलमग्न हो गए।
ब्लाक जाने के लिए लोग मरका होकर जा रहे हैं। उधर, यमुना के किनारे के गांव खेरा, खटान, अमेढ़ी, मटेहना, कठार, दादौं, राघोपुर, अछरील, जोरावरपुर, लखनपुर के अलावा बागै नदी के तटवर्ती गांव इटर्रा, बढ़ौनी, घौसड़ गांव पानी से घिर गए हैं। उधर, बबेरू के औगासी में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से समगरा, बाकल, मरका, निभौर, समसुददीनपुर, मझीवां सहित एक दर्जन गांवों में पानी घुसने लगा है।
प्रशासन ने गांवों को खाली कराना शुरू कर दिया है। एसडीएम महेंद्र प्रताप सिंह ने गांवों को खाली करने का अलर्ट जारी किया है।
बाढ़ प्रभावित गांवों का लिया जायजा
बबेरू। पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र इटर्रा, अछरील, लखनपुर, जोरावरपुर आदि गांवों का जायजा लिया। पीड़ितों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ से जहां कच्चे मकान गिर गए है, वहीं सैकड़ों बीघा जमीन पर बोई खरीफ की फसल नष्ट हो गई।
छेदीलाल, शिव बहादुर यादव, पुत्तन सिंह, अखिलेश पाल, ज्ञान सिंह यादव, महंत इंद्रपाल यादव, कमलेश चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।
यमुना में बाढ़ से 42 मजरों की आपूर्ति लड़खड़ाई
बेंदाघाट। मध्य प्रदेश की घाटियों में हो रही बारिश व बांधों से छोड़े जा रहे पानी से यमुना उफान पर है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। समगरा से आई विद्युत मेनलाइन के 3 खंभों के तार जलालपुर गांव के पास बाढ़ के पानी में डूबने से तीन दिन से जौहरपुर सब स्टेशन की विद्युत आपूर्ति लड़खड़ा गई है। इस सब स्टेशन से जुड़े बेंदा समेत 42 मजरों में केवल बल्ब के सिर्फ लाल तार ही जल रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने बेंदाघाट में विद्युत आपूर्ति व जलालपुर के पास खंभों का उच्चीकरण करने को लेकर बांदा-फतेहपुर हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया था। तब अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन देकर जाम खुलवाया था, लेकिन तब से अब तक खंभों का उच्चीकरण नहीं हुआ। महिलाओं को घरों में गेहूं पीसना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था सुधार की मांग की है।
यमुना का पानी बेंदाखास में घुसा
बेंदाघाट। यमुना नदी में आई बाढ़ से बेंदाखास गांव के निचले इलाकों में पानी भर गया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेंदाखास भी बाढ़ की चपेट में है। उधर, जलालपुर के मजरा गौरा में भी पानी भर गया है। बाढ़ से बेंदा, अमलीकौर, गौरा जलालपुर, माचा, माचाहार, टोलियां आदि गांवों में किसानों द्वारा बोई गई ज्वार, अरहर, अंडी, उर्द, मूंग, तिल की हजारों बीघे की फसल सड़कर नष्ट हो गई।
यमुना के पानी से उसरा नाला भी उफना गया है। इससे जलालपुर, अमलीकौर, माचा, माचाहार, बबेरू जाने का रास्ता बंद हो गया है। लोगों को बबेरू, कमासिन जाने के लिए तिंदवारी से होकर जाना पड़ रहा है।
चिल्ला-कानपुर मार्ग में भरा पानी, चल रही नाव
खप्टिहा कलां। बांदा वाया चिल्ला-कानपुर मार्ग में यमुना का पानी सड़क के ऊपर से बह रहा, जिससे दोनों तरफ से आवागमन ठप है। यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ने से चिल्ला से महज 10 से 12 किमी की दूरी पर ललौली (फतेहपुर) गांव का मार्ग ठप हो गया है। यहां सड़क पर नाव चल रही हैं। कोई इधर से उधर न जाए इसके लिए डेढ़ सेक्शन पीएसी बटालियन लगा दी गई है।
उधर, एसडीएम पैलानी रामकुमार, तहसीलदार शिवराज सिंह बाढ़ग़्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। चिल्ला के समीप यमुना की बाढ़ से चिल्ला, दोहतरा, खजूरी, पदारथपुर, सहित दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां 17 बाढ़ चौकी व 3 सेक्टर बनाए गए हैं।
दूसरी ओर पैलानी एसओ उमेश कुमार सिंह, चौकी इंचार्ज ओम प्रकाश द्विवेदी सहित पुलिस बल नाव से केन नदी के उस पार बसे मजरे छनिहा डेरा, सेमरा डेरा, शिवपाल डेरा, पंडित डेरा में लोगों को सचेत करने में जुटे हैं।