फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Whence 20 hours power !

कहां से मिले 20 घंटे बिजली!

Sat, 26 Dec 2015 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Sat, 26 Dec 2015 10:57 PM IST
विज्ञापन
Whence 20 hours power !

बांदा। मुख्यमंत्री और पावर कारपोरेशन द्वारा

विज्ञापन
बुंदेलखंड के गांवों को 20 घंटे बिजली देने के आदेश पर पूरी तरह अमल फिलहाल संभव नहीं है। कारण यहां के सब स्टेशनों पर ओवरलोड तो है ही, कई मशीनें भी जर्जर हैं।

हाल यह है कि चित्रकूटधाम मंडल को बिजली आपूर्ति करने वाले सब स्टेशन की क्षमता 320 एमवीए की है, जबकि लोड 550 एमवीए से भी ज्यादा है।

पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा द्वारा गांवों को रोजाना 20 घंटे नियमित बिजली देने के आदेश को तीन दिन बीत गए, पर किसी भी गांव में 20 घंटे आपूर्ति नहीं हुई।

मुख्यमंत्री की मंशा पूरी हो भी तो कैसे? बुंदेलखंड में बिजली का लोड बहुत बढ़ गया, लेकिन सब स्टेशनों की क्षमता जस की तस है। इसकी बानगी चित्रकूटधाम मंडल है।

मंडल मुख्यालय बांदा में स्थापित 220 केवीए की क्षमता मात्र 320 एमवीए (मेगावाट वोल्ट एंपियर) है, जबकि लोड 550 एमवीए से भी ज्यादा है। यानी 230 एमवीए का ओवरलोड है।

ऐसे में गांवों को 20 घंटे रोजाना आपूर्ति की बात कागजों में ही सच साबित हो सकती है। यही हो भी रहा है। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की निगाहें बुंदेलखंड पर होने से पावर कारपोरेशन के अफसर इस हकीकत को जुबां पर नहीं ला सकते, वरना उनकी नौकरी पर आंच आ जाएगी।

जनप्रतिनिधि और सत्तारूढ़ दल के नेता भी इस मामले में खामोश हैं। इस तकनीकी कमजोरी को सीएम या शासन तक पहुंचाने की जरूरत नहीं समझ रहे।

बुंदेलखंड को 24 और 20 घंटे बिजली आपूर्ति के फरमान जारी हो रहे हैं, लेकिन यहां बिजली का जुगाड़ करने में पावर कारपोरेशन अभियंताओं को पसीना आ रहा है।

चित्रकूटधाम मंडल में प्रदेश के तीन बिजलीघरों से जुगाड़कर 320 एमवीए बिजली हासिल की जा रही है। फतेहपुर से 120, पारीछा (झांसी) से 100 और सिराथू (कौशांबी) से 100 एमवीए बिजली ली जा रही है।

अधिशासी अभियंता (ट्रांसमिशन) उमेश वर्मा का कहना है कि जितनी क्षमता के ट्रांसफार्मर यहां लगे हैं, उतनी ही बिजली ली जा रही है। जब सब स्टेशन की क्षमता बढ़ेगी तो बिजली आपूर्ति भी बढ़ जाएगी।

गांवों को नियमित 20 घंटे बिजली देना किसी चुनौती से कम नहीं। जर्जर लाइनें और ट्रांसफार्मर इसमें रोड़ा बने हुए हैं। बिजली आपूर्ति मंडल मुख्यालय बांदा शहर में ही चौपट है।

यहां शहर को 20 घंटे बिजली आपूर्ति के आदेश हैं, लेकिन शहर का कोई भी फीडर किसी भी दिन 20 घंटे बिजली नहीं दे रहा। कटौती न भी हो तो लगातार आपूर्ति के लोड पर चंद घंटे बाद ही ट्रांसफार्मर, लाइन, सीटी, ओसीबी इत्यादि फुंकने या खराब हो जाने से आपूर्ति ठप हो जाती है।

शहर को जलापूर्ति करने वाला भूरागढ़ फीडर और शहर के अधिकांश इलाके को बिजली देने वाले पीलीकोठी फीडर के हाल बेहाल हैं।

दोनों फीडर एसडीओ और जेई के रहमोकरम पर चलते हैं। प्रदेश सरकार या कारपोरेशन के आदेश को ये ठेंगे पर रखते हैं। रोजाना सुबह छह से आठ बजे के बीच फीडरों को बंद कर देने के बाद भी दर्जनों मोहल्लों मेें जलापूर्ति नहीं हो रही। ठंड के दिनों में भी पेयजल संकट है।

इस बाबत पावर कारपोरेशन मुख्य अभियंता एके सक्सेना ने कहा कि वे जलापूर्ति के समय बिजली चालू रखने के लिए अधिशासी अभियंता (वितरण) को निर्देश दे रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed