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खुली बैठकों में मुफ्त लें खतौनी की नकल
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 02 Feb 2015 12:05 AM IST
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भूमि संबंधी वादों के लिए अब एसडीएम कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। तहसील प्रशासन ऐसे वादों को चिह्नित कर पुलिस व राजस्व कर्मियों की संयुक्त टीमें मौके पर जाकर त्वरित निस्तारण करेगी। कैंप लगाकर काश्तकारों को नि:शुल्क खतौनी की नकल उपलब्ध कराई जाएंगी।
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उधर, न्यायालयों में सालों से लंबित जमीन संबंधी वादों का भी वरीयता से निपटारा होगा। शासनादेश का हवाला देते हुए अपर जिलाधिकारी डीएस पांडेय ने बताया कि हरेक तहसील में गांवों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। उप जिलाधिकारियों और क्षेत्राधिकारियों ने तहसील सभागार में मीटिंग कर विवादों के निस्तारण की रूपरेखा तैयार की है।
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सोमवार से अभियान शुरू हो जाएगा। पहले चरण में सभी तहसीलों के 40-40 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों के मामलों का निस्तारण होने के बाद अगले चरण के गांव चिह्नित होंगे। लेखपाल व पुलिस गांव स्तर पर सभाओं का आयोजन करेंगे। इस दौरान वरासत दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
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शासन ने तहसील प्रशासन को भूमि संबधी मामलों के निस्तारण के लिए दो माह का समय दिया है। 31 मार्च के बाद जिलाधिकारी अपने स्तर से जांच कराएंगे। यदि कहीं ऐसे मामले मिले तो तहसीलदार को इसके लिए जिम्मेदार बनाया जाएगा।
उप जिलाधिकारी सदर प्रह्लाद सिंह ने बताया कि मामलों के निस्तारण के लिए गठित की गई टीमों पर वह खुद निगरानी रखेंगे। जहां समस्याएं आएंगी, उनका भी हल निकाला जाएगा। गौरतलब है कि सदर तहसील में ही करीब 1120 मामले भूमि पर कब्जे और वरासत न दर्ज होने के लंबित हैं।
जिलाधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक सदर, नरैनी, बबेरू, अतर्रा और पैलानी तहसीलों में 7,500 मामले भूमि विवाद से संबंधित लंबित हैं। लेखपालों व कानूनगो के ग्रामीण चक्कर लगा रहे हैं। शासन की इस पहल से उनको भागदौड़ से निजात मिलेगी।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी, डीएस पांडेय ने बताया कि सोमवार से संयुक्त टीमें गांवों में सर्वे का काम शुरू कर देंगी। शासनादेश के मुताबिक दो माह के अंदर भूमि विवाद के सभी मामले निस्तारित किए जाएंगे। पुलिस उपाधीक्षक और एसडीएम को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।