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मामा! 23 लाख पेड़ों को मत डूबने दो

Sat, 03 Apr 2021 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Apr 2021 11:15 PM IST
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बांदा। मामा, इतने पेड़ कट जाएंगे तो हमें सांस लेने में दिक्कत होगी। 23 लाख पेड़ मत डूबने दो प्लीज मामा। कुछ ऐसी ही मार्मिक अपीलों के स्लोगन की तख्तियां लेकर बुंदेलखंड के पन्ना जिले (मध्यप्रदेश) के बच्चों और बाशिंदों ने वहां के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (मामा) से फरियाद की। मुख्यमंत्री चौहान होली में अपने परिवार को लेकर पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क आए हुए थे। तभी बच्चों और पर्यावरण प्रेमियों ने उनकी राह पर खड़े होकर यह प्रदर्शन किया।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना में पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र के लगभग 23 लाख पेड़ डूब जाएंगे। विश्व जल दिवस पर 22 मार्च को यूपी-एमपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व शिवराज सिंह चौहान ने केन-बेतवा परियोजना की एमओए (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर कर दिए। इसी के बाद बुंदेलखंड में स्थित पन्ना के स्थानीय बाशिंदे और पर्यावरणविदों ने विरोध तेज कर दिया है। मीडिया भी विरोध में मुखर नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने पन्ना टाइगर रिजर्व में अकोला बफर के जंगल में बाघों का लुत्फ लिया। बरगद के पेड़ का रोपण भी किया।
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मुख्यमंत्री चौहान का यह कार्यक्रम पूरी तरह निजी था, लेकिन इसके बाद भी भनक लग जाने पर कुछ स्थानीय लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर केन-बेतवा लिंक परियोजना से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की तरफ उनका ध्यान आकृष्ट कराने की कोशिश की। इनमें बच्चे भी शामिल थे। पर्यावरणविदों का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना पन्ना टाइगर रिजर्व के लिए अभिशाप है।
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इंसेट---
नदी का नैसर्गिक प्रवाह रोकने से नहीं होगा भला
कार्यकर्ताओं और नागरिकों की दलील है कि केन-बेतवा लिंक से पन्ना को क्या मिलेगा। बरियारपुर बांध का हवाला देकर कहते हैं कि इस बांध का पूरा पानी यूपी के बांदा को जा रहा है। अब यहां की प्राकृतिक वन संपदा को केन-बेतवा लिंक परियोजना से खत्म किया जा रहा, जबकि यह यहां के लोगों के जीवन का आधार है। क्षेत्र के वरिष्ठ जर्नलिस्ट अरुण सिंह का कहना है कि नदी के नैसर्गिक प्रवाह को रोकने, लाखों पेड़-पौधों को काटने और एक आबाद जीवंत वन क्षेत्र को उजाड़ने से कोई भला नहीं हो सकता। इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतान पड़ेंगे। वह कहते हैं कि केन नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एक दशक पूर्व अभियान में 20 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए जा चुके हैं। फिर भी नदी की हालत नहीं सुधरी। इस पर पुनर्विचार की जरूरत है।

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पूर्व सीएम बोले- झुककर हुआ समझौता
एमओयू पर हस्ताक्षर होना अच्छी बात है, लेकिन मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने केंद्र सरकार के दबाव में आकर अनुबंध की शर्तों के विपरीत कई मुद्दों पर झुक कर प्रदेश के हितों के साथ समझौता किया है। वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस परियोजना के अमल को लेकर केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे।
-कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
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