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आज मस्जिदों में नहीं, घरों में अदा करें जुमा की नमाज
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मस्जिदों में नमाज के लिए न आने की अपील चस्पा करते शहर काजी और पेश इमाम मौलाना अकील मियां।
- फोटो : BANDA
बांदा। 21 दिवसीय लॉकडाउन की घोषणा के बाद 27 मार्च को पड़ रहे पहले जुमा (शुक्रवार) की नमाज मस्जिदों में सामूहिक रूप से नहीं अदा की जाएगी। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने यह फैसला लेते हुए मस्जिदों में नोटिस चस्पा कर दी है। साथ ही रोजाना अदा की जाने वाली पांच वक्त की नमाजें भी लॉकडाउन अवधि तक घरों में ही अदा करने की अपील की है।
कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू किया गया है। कहीं भी और किसी भी रूप में एक साथ लोगों की भीड़ जमा होना खतरे की घंटी है। इसी के मद्देनजर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मजहब की सबसे अहम और फर्ज इबादत नमाज में भी एक साथ इकट्ठा न होने की अपील की है।
शुक्रवार (27 मार्च) को जुमा की साप्ताहिक नमाज चुनिंदा मस्जिदों में होती है। इसमें काफी तादाद में लोग एक साथ नमाज अदा करते हैं, लेकिन लॉकडाउन में इसमें बदलाव कर दिया गया है। यहां के मुख्य मदरसों और धर्मगुरुओं तथा शहर काजियों ने मुस्लिमों से अपील की है कि रोजमर्रा की नमाजें और जुमा की नमाज फिलहाल घरों में ही अदा करें।
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मदरसा जामिया अरबिया, हथौरा के मुफ्ती मौलाना नजीब अहमद काशमी ने कहा कि घरों में ही इबादत कर इंसानों की भलाई और सेहत के लिए दुआ करें। जुमा की नमाज भी घर में अदा करें। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में शरियत का भी यह हुक्म है। उधर, मदरसा दारुल उलूम रब्बानिया के मौलाना और शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और हुकूमत ने कोरोना मर्ज के मद्देनजर जो पाबंदियां लगाई हैं। उसके मद्देनजर सभी मुसलमान रोजाना की पांचों नमाजें और हफ्तेवार जुमा की नमाज घरों पर ही अदा करें।
यही हुक्म मुफ्तियों ने दिया है। मौलानाओं ने कहा है कि मस्जिदों में सिर्फ मुअज्जन अजान देकर इमाम और मस्जिद में रहने वाले चंद कार्यकर्ताओं के साथ नमाज अदा करें। पड़ोस के लोग घरों में ही नमाज पढ़ें। मस्जिदों में इस आशय की नोटिसें भी चस्पा कर दी गई हैं। आल इंडिया काजी बोर्ड के नायब सदर मौलाना सैय्यद मुमताज रब्बानी कहा है कि जुमा की नमाज मस्जिद में न अदा करके घर में जोहर की नमाज अदा करें।
उधर, शहर काजी मौलाना कमरुद्दीन ने भी मुस्लिमों से लॉकडाउन की मुद्दत की अवधि में मस्जिदों में एक साथ इकट्ठा न होने और घरों में ही नमाजें अदा करने की अपील की है। उधर, शहर की नवाबी जामा मस्जिद के मुतवल्ली डा.शेख सादी जमां ने बताया कि उलेमाओं की हुक्म और फतवे के मुताबिक जामा मस्जिद में सामूहिक रूप से जुमा की नमाज नहीं होगी। इमाम मुअज्जिन आदि चंद लोग ही अजान के साथ नमाज अदा करेंगे।
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कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू किया गया है। कहीं भी और किसी भी रूप में एक साथ लोगों की भीड़ जमा होना खतरे की घंटी है। इसी के मद्देनजर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मजहब की सबसे अहम और फर्ज इबादत नमाज में भी एक साथ इकट्ठा न होने की अपील की है।
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शुक्रवार (27 मार्च) को जुमा की साप्ताहिक नमाज चुनिंदा मस्जिदों में होती है। इसमें काफी तादाद में लोग एक साथ नमाज अदा करते हैं, लेकिन लॉकडाउन में इसमें बदलाव कर दिया गया है। यहां के मुख्य मदरसों और धर्मगुरुओं तथा शहर काजियों ने मुस्लिमों से अपील की है कि रोजमर्रा की नमाजें और जुमा की नमाज फिलहाल घरों में ही अदा करें।
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मदरसा जामिया अरबिया, हथौरा के मुफ्ती मौलाना नजीब अहमद काशमी ने कहा कि घरों में ही इबादत कर इंसानों की भलाई और सेहत के लिए दुआ करें। जुमा की नमाज भी घर में अदा करें। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में शरियत का भी यह हुक्म है। उधर, मदरसा दारुल उलूम रब्बानिया के मौलाना और शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और हुकूमत ने कोरोना मर्ज के मद्देनजर जो पाबंदियां लगाई हैं। उसके मद्देनजर सभी मुसलमान रोजाना की पांचों नमाजें और हफ्तेवार जुमा की नमाज घरों पर ही अदा करें।
यही हुक्म मुफ्तियों ने दिया है। मौलानाओं ने कहा है कि मस्जिदों में सिर्फ मुअज्जन अजान देकर इमाम और मस्जिद में रहने वाले चंद कार्यकर्ताओं के साथ नमाज अदा करें। पड़ोस के लोग घरों में ही नमाज पढ़ें। मस्जिदों में इस आशय की नोटिसें भी चस्पा कर दी गई हैं। आल इंडिया काजी बोर्ड के नायब सदर मौलाना सैय्यद मुमताज रब्बानी कहा है कि जुमा की नमाज मस्जिद में न अदा करके घर में जोहर की नमाज अदा करें।
उधर, शहर काजी मौलाना कमरुद्दीन ने भी मुस्लिमों से लॉकडाउन की मुद्दत की अवधि में मस्जिदों में एक साथ इकट्ठा न होने और घरों में ही नमाजें अदा करने की अपील की है। उधर, शहर की नवाबी जामा मस्जिद के मुतवल्ली डा.शेख सादी जमां ने बताया कि उलेमाओं की हुक्म और फतवे के मुताबिक जामा मस्जिद में सामूहिक रूप से जुमा की नमाज नहीं होगी। इमाम मुअज्जिन आदि चंद लोग ही अजान के साथ नमाज अदा करेंगे।