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आज भी गांव के लोग नहीं भूले खूनी मंजर

Fri, 26 Feb 2016 11:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा Updated Fri, 26 Feb 2016 11:20 PM IST
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The villagers still have not forgotten the bloody scene

बांदा। दिनदहाड़े दो बच्चों समेत चार लोगों को

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गोलियों से भून देने के चर्चित बगहिया पुरवा नरसंहार की सुनवाई 13 साल बाद पूरी हो सकी।

इस मामले में दस्यु ठोकिया समेत 18 नामजद और 25 अज्ञात साथियों को नामजद किया गया था। इस दौरान अंबिका पटेल समेत चार ईनामी खूंखार डकैत पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।

17 जुलाई 2003 को सुबह 7:30 बजे चित्रकूट जनपद के भरतकूप थाना क्षेत्र के बगहिया पुरवा गांव में अंतर्राज्यीय दस्यु सरगना अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया उर्फ डाक्टर ने साथियों के साथ पूरे गांव को चारों ओर से घेरकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।

ग्रामीणों में भगदड़ मच गई। खेतों में मजदूरी करने जा रहा दुगवां (चित्रकूट) निवासी बड़का कोल (45) भागते समय डकैतों की गोलियां का निशाना बन गया। वह पत्थरों के ढेर में गिरकर हो गया। गांव में उसी समय किसी से मिलने आया दुगवां गांव का ही कुटुआ गर्ग (35) पुत्र रामेश्वर भी डकैतों की गोलियों से ढेर हो गया।

जान बचाने की कोशिश में भाग रहे रामकिशोर (38) को भी डकैतों ने मार गिराया। दस्यु दल ने आधा दर्जन घरों के दरवाजे बाहर की कुंडी बंद कर आग लगा दी। घरों में कैद चुन्नी (30) पत्नी प्रकाश पटेल और उसका दो वर्षीय पुत्र छोटा भइया तथा अपने ननिहाल आई महिला बुद्दन की दो वर्षीय पुत्री की बमों के छर्रों और घुटन से मौत हो गई।

इसके अलावा भोला (25) पुत्र राम स्वरूप, राम कृपाल (45) पुत्र छेदीलाल, भगवानदास (6) पुत्र ओम प्रकाश, नथुनिया (27) पत्नी बुल्ली, मुकेश (6) पुत्र राम कृपाल और गौरा (23) पत्नी रज्जू गंभीर रूप से घायल हो गए।

डकैतों से मोर्चा लेने वाले राजू पटेल ने कर्वी कोतवाली में अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया, शंकर केवट, गुड्डा पटेल, चुन्नी पटेल समेत 18 नामजद और 25 अज्ञात बदमाशों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

तब से यह मामला अदालत में चल रहा था। सामूहिक नरसंहार में नामजद पांच लाख के ईनामी ठोकिया, चुन्नी पटेल, गुड्डा पटेल और शंकर केवट पहले ही मुठभेड़ में पुलिस के हाथों मारे जा चुके हैं।

पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके दस्यु अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने अपने जानी दुश्मन ओमनाथ पटेल से बदला लेने के लिए बगहिया पुरवा में दिनदहाड़े धावा बोलकर तांडव किया था। सामूहिक नरसंहार में मरने वालों में ज्यादातर ठोकिया के जानी दुश्मन ओमनाथ पटेल के रिश्तेदार थे।

हालांकि इस हमले में ठोकिया का जानी दुश्मन ओमनाथ पटेल बच निकला था। इस घटना के बाद दस्यु ठोकिया का खौफ लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा। 4 अगस्त 2008 को एसटीएफ ने सिलखोरी गांव में दस्यु ठोकिया को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया।

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