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बांदा: रकम दोगुनी का झांसा देकर लाखों वसूलकर कंपनी फरार
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बैंक भागने की शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचीं महिलाएं।
- फोटो : BANDA
बांदा। आरडी व एफडी के नाम पर महज पांच साल में रकम दोगुनी करने का लालच दे लाखों रुपया लेकर कंपनी फरार हो गई। पीड़ितों ने कोतवाली में दी तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
कंपनी के स्थानीय निवासी एजेंटों ने कोतवाली में तहरीर देकर लगभग 50 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग सात सालों में कथित कंपनी ने करोड़ों रुपये ऐंठे हैं।
ठगी का शिकार हुए लोगों ने बताया कि शहर के अमर टाकीज के पास वर्ष 2013 से एक क्रेडिट को-आपरेटिव लिमिटेड नामक फाइनेंस कंपनी चल रही थी। यहां इसका कार्यालय था।
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कंपनी ग्राहकों को पांच साल में उनकी रकम दोगुनी करने का झांसा देकर मासिक किस्त लिया करते थे। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके यहां खाता खुलवाकर पैसा जमा करते रहे। बताया जाता रहा है कि कंपनी कृषि मंत्रालय से रजिस्टर्ड है।
पिछले कई महीनों से कंपनी के दफ्तर में ताला पड़ा है। पैसा जमा करने वाले यही समझते रहे कि लॉकडाउन की वजह से बंद है लेकिन कंपनी का कोई व्यक्ति अब तक यहां नहीं आया।
जमाकर्ताओं ने फोन पर संपर्क किया तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि उनसे कोई लेना-देना नहीं है। उधर, जमाकर्ताओं ने वसूली करने वाले एजेटों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। लगभग सभी एजेंट स्थानीय बाशिंदे हैं।
शुक्रवार को एजेंट अवतार कौर, संतवीर सिंह, संतोष चौहान, संगीता चौहान, सुचेता सिंह, उत्तम सिंह, ऊषा सिंह, निशा सिंह, कमला, कृष्णा, चंदा, मंजू देवी, केशर देवी, सरोज, मोना, साधना, बीनू, राजेंद्र नंदा आदि ने कोतवाली जाकर प्रभारी निरीक्षक को तहरीर देते हुए कंपनी के विरुद्ध दर्ज करने की मांग की। उधर, कोतवाली प्रभारी दिनेश सिंह ने बताया कि तहरीर मिल गई है। संस्था की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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कंपनी के स्थानीय निवासी एजेंटों ने कोतवाली में तहरीर देकर लगभग 50 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग सात सालों में कथित कंपनी ने करोड़ों रुपये ऐंठे हैं।
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ठगी का शिकार हुए लोगों ने बताया कि शहर के अमर टाकीज के पास वर्ष 2013 से एक क्रेडिट को-आपरेटिव लिमिटेड नामक फाइनेंस कंपनी चल रही थी। यहां इसका कार्यालय था।
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कंपनी ग्राहकों को पांच साल में उनकी रकम दोगुनी करने का झांसा देकर मासिक किस्त लिया करते थे। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके यहां खाता खुलवाकर पैसा जमा करते रहे। बताया जाता रहा है कि कंपनी कृषि मंत्रालय से रजिस्टर्ड है।
पिछले कई महीनों से कंपनी के दफ्तर में ताला पड़ा है। पैसा जमा करने वाले यही समझते रहे कि लॉकडाउन की वजह से बंद है लेकिन कंपनी का कोई व्यक्ति अब तक यहां नहीं आया।
जमाकर्ताओं ने फोन पर संपर्क किया तो यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि उनसे कोई लेना-देना नहीं है। उधर, जमाकर्ताओं ने वसूली करने वाले एजेटों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। लगभग सभी एजेंट स्थानीय बाशिंदे हैं।
शुक्रवार को एजेंट अवतार कौर, संतवीर सिंह, संतोष चौहान, संगीता चौहान, सुचेता सिंह, उत्तम सिंह, ऊषा सिंह, निशा सिंह, कमला, कृष्णा, चंदा, मंजू देवी, केशर देवी, सरोज, मोना, साधना, बीनू, राजेंद्र नंदा आदि ने कोतवाली जाकर प्रभारी निरीक्षक को तहरीर देते हुए कंपनी के विरुद्ध दर्ज करने की मांग की। उधर, कोतवाली प्रभारी दिनेश सिंह ने बताया कि तहरीर मिल गई है। संस्था की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।