{"_id":"60d8ba0a8ebc3ec2012027a0","slug":"save-water-by-taking-inspiration-from-bundelkhand-banda-news-knp6368541181","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांदा: बुंदेलखंड से प्रेरणा लेकर बचाएं पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बांदा: बुंदेलखंड से प्रेरणा लेकर बचाएं पानी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। देश के किसानों में जल संरक्षण का जज्बा जगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड को उदाहरण के रूप में पेश किया है। रविवार को मन की बात में उन्होंने बुंदेलखंड के बांदा (यूपी) और सतना (एमपी) के दो गांवों का विशेष तौर से जिक्र करते हुए कहा कि इन गांवों ने जल संरक्षण में दूर-दूर तक अपनी पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री ने देश के किसानों का आह्वान किया कि इनसे प्रेरणा लेकर पानी बचाएं। मानसून के मौजूदा महत्वपूर्ण समय को न गंवाएं।
मन की बात में देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण के लिए चल रहे प्रयासों को काफी महत्व दिया। कहा कि वह जल संरक्षण को देश सेवा का एक रूप मानते हैं। कहा कि हमें पानी बचाना है, मानसून से घबराना नहीं है। प्रधानमंत्री ने बांदा के अधांव गांव की चर्चा करते हुए कहा कि इस गांव के लोगों ने एक अलग तरह का प्रयास किया है।
अपने अभियान को बड़ा दिलचस्प नाम दिया है। खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में। पीएम ने कहा कि अभियान के तहत गांव के कई सौ बीघा खेतों में ऊंची मेड़ बनाई गई है। इससे बारिश का पानी खेत में इकट्ठा होकर जमीन में जाने लगा है। अब सब लोग खेतों की मेड़ पर पेड़ लगाने की योजना बना रहे हैं। यानि अब किसानों को पेड़, पानी और पैसा मिलेगा।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छे कार्यों से गांव की पहचान दूर-दूर तक हो रही है। प्रधानमंत्री ने सतना के किसान रामलोटन कुशवाहा का भी उदाहरण दिया। कहा कि कुशवाहा ने अपने खेत में देशी म्यूजियम बनाया है। इसमें सैकड़ों औषधीय पौधों और बीजों का संग्रह किया है। इन्हें वह दूर-दूर क्षेत्रों से लाएं हैं। हर साल कई तरह की भारतीय सब्जियां उगाते हैं।
इसे देखने और सीखने बहुत से लोग आते हैं। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि जो लोग भी ऐसे प्रयास कर सकते हैं, जरूर करें। उनके क्षेत्र की पहचान बनेगी। प्रेरणा लेकर अपने आसपास पानी बचाएं। कहा कि मानसून के महत्वपूर्ण समय को हमें गंवाना नहीं है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के किसान भारतीय के भी प्रयासों को सराहा।
विज्ञापन
मन की बात में देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण के लिए चल रहे प्रयासों को काफी महत्व दिया। कहा कि वह जल संरक्षण को देश सेवा का एक रूप मानते हैं। कहा कि हमें पानी बचाना है, मानसून से घबराना नहीं है। प्रधानमंत्री ने बांदा के अधांव गांव की चर्चा करते हुए कहा कि इस गांव के लोगों ने एक अलग तरह का प्रयास किया है।
विज्ञापन
अपने अभियान को बड़ा दिलचस्प नाम दिया है। खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में। पीएम ने कहा कि अभियान के तहत गांव के कई सौ बीघा खेतों में ऊंची मेड़ बनाई गई है। इससे बारिश का पानी खेत में इकट्ठा होकर जमीन में जाने लगा है। अब सब लोग खेतों की मेड़ पर पेड़ लगाने की योजना बना रहे हैं। यानि अब किसानों को पेड़, पानी और पैसा मिलेगा।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छे कार्यों से गांव की पहचान दूर-दूर तक हो रही है। प्रधानमंत्री ने सतना के किसान रामलोटन कुशवाहा का भी उदाहरण दिया। कहा कि कुशवाहा ने अपने खेत में देशी म्यूजियम बनाया है। इसमें सैकड़ों औषधीय पौधों और बीजों का संग्रह किया है। इन्हें वह दूर-दूर क्षेत्रों से लाएं हैं। हर साल कई तरह की भारतीय सब्जियां उगाते हैं।
इसे देखने और सीखने बहुत से लोग आते हैं। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि जो लोग भी ऐसे प्रयास कर सकते हैं, जरूर करें। उनके क्षेत्र की पहचान बनेगी। प्रेरणा लेकर अपने आसपास पानी बचाएं। कहा कि मानसून के महत्वपूर्ण समय को हमें गंवाना नहीं है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के किसान भारतीय के भी प्रयासों को सराहा।