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दरकिनार नियमावली, खदानों में भारी हैं बाहुबली

Sat, 25 Jan 2020 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jan 2020 12:03 AM IST
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Rules bypassing, Bahubali are heavy in mines
बांदा में बालू खदान में ट्रकों की भरमार। - फोटो : BANDA
बांदा। खनिज नियम और बालू खदानों में जमीन-आसमान का अंतर है। नियम कुछ है और खदानों में चल रहा कुछ और है। हाल ही में जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत खनिज विभाग से मिली सूचना से यही खुलासा हुआ है।
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जन सूचना में बांदा के खान निरीक्षक ने महोबा निवासी पंकज सिंह परिहार को दी सूचना में बताया है कि बालू/मौरंग की बिक्री संबंधी सूचना का खदान में साइन बोर्ड लगाया जाना जरूरी है। पट्टाधारकों को इसके आदेश दिए गए हैं। जन सूचना में यह भी बताया है कि हैवी पोकलैंड मशीनों से खनन की अनुमति नहीं दी गई है।
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ईएमएम-11 (रवन्ना) पट्टाधारक खुद आनलाइन बनाते हैं। जन सूचना में बताए गए यह नियम और खदानों में हो रहे खनन में अंतर है। अधिकांश खदानों में रॉयल्टी दर, पट्टाधारक का नाम, क्षेत्रफल, गाटा संख्या, खदान का नाम आदि संबंधी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।
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इसके अलावा हैवी पोकलैंड मशीनों से अंधाधुंध बालू निकाली जा रही है। यहां तक कि नदियों की जलधारा में मशीनें उतारकर पानी की सतह से बालू का खनन हो रहा है। उधर, खान निरीक्षक वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बालू मौरंग का खनन उत्तर प्रदेश उप खनिज परिहार्य नियमावली 1963 के तहत किया जा रहा है। नियमावली के प्रावधानों या पट्टा शर्तों का उल्लंघन करने पर पट्टाधारक को कारण बताओ नोटिस दिया जाता है और गुणदोष के आधार पर निस्तारण किया जाता है।
निदेशक ने खुद पकड़ी खनन और परिवहन में अंधेरगर्दी
बांदा। खनन और परिवहन में चल रही अंधेरगर्दी प्रदेश की भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशक डा.रोशन जैकब (आईएएस) ने भी रंगेहाथ पकड़ी है। इसमें चित्रकूटधाम के बांदा, हमीरपुर, महोबा भी शामिल हैं। निदेशक ने यहां के जिलाधिकारियों को संयुक्त टीम द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के साथ अपना पत्र भेजा है।
निदेशक ने कानपुर नगर, फतेहपुर और झांसी समेत बांदा, हमीरपुर व महोबा के जिलाधिकारियों को पिछले माह भेजे पत्र में कहा है कि निदेशालय की टीम ने लखनऊ के आसपास सघन जांच की थी। इसमें पाया गया कि प्रपत्र (रवन्नों) में वाहन संख्या और समय में छेड़छाड़ (संशोधन) करके तीन अलग वाहनों में बालू ढोई गई।
साथ ही मध्य प्रदेश से आने वाले वाहनों में राज्य द्वारा निर्गत वैध पत्र (ईटीपी) से भिन्न प्रपत्र ट्रक चालकों द्वारा टीम को दिखाया गया। जबकि यह प्रपत्र सिर्फ मध्य प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उपयोग के लिए ही अधिकृत है। अंतरराज्यीय परिवहन के लिए नहीं। राजस्व हित में ऐसे परिवहन प्रपत्र से खनिज का परिवहन प्रतिबंधित किया जाना जरूरी है।
पानी में मशीन से नहीं हो सकता खनन
बांदा। समाजसेवी और प्रवास सोसायटी के आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि खनिज परिहार्य नियमावली के 47वें संशोधन 2019 के मुताबिक पट्टाधारक नदी की जलधारा अथवा जहां पानी कम हो वहां मशीन से खनन नहीं कर सकता। साथ ही नदी में तीन मीटर की गहराई तक ही खनन किया जा सकता है।

इसका उल्लंघन करने पर पांच लाख रुपये की दर से जुर्माना वसूलने का प्राविधान है। कहा कि खदान संचालक ज्यादातर एमएम प्रपत्र-एक माइनिंग प्लान में जमा ही नहीं करते। सीमांकन से अधिक उत्खनन कराते हैं। मशीनों से खनन और लोडिंग के चलते स्थानीय मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा। सूर्यास्त के बाद भी मशीनों से खनन हो रहा है। बुंदेलखंड की लाइफ लाइन केन नदी को मिटाने पर आमादा हैं।
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