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Banda News: बांदा में मानसून की मेहरबानी, रबी की उम्मीदें बढ़ीं
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बांदा। इस साल बांदा में मानसून किसानों के लिए राहत के साथ नई चुनौती भी लेकर आया है। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की मौसम इकाई के प्रभारी डॉ. दिनेश साह के अनुसार, जनवरी से मई 2026 तक आठ वर्षा-दिवसों में 70.8 एमएम बारिश हुई, जबकि मानसून अवधि में 42 वर्षा-दिवसों में 932.2 एमएम वर्षा दर्ज की गई। वर्ष-2026 में अब तक कुल वर्षा 1,003 मिमी पहुंच गई है। जिले की दीर्घकालीन औसत वार्षिक वर्षा करीब 870 एमएम मानी जाती है। इस लिहाज से इस वर्ष अब तक करीब 133 एमएम यानी 15 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई है। मानसून की अच्छी बारिश से खेतों में पर्याप्त अवशिष्ट नमी तथा खेत-तालाब, जलाशयों और अन्य जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। इसका लाभ आगामी रबी मौसम में विशेषकर वर्षा आधारित और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों को मिल सकता है। चना, मसूर और सरसों जैसी कम पानी वाली फसलों की स्थापना के लिए मिट्टी में बची नमी उपयोगी साबित हो सकती है।
अधिक बारिश से सावधानी भी जरूरी
कम समय में तेज बारिश होने पर खेतों में जलभराव, मिट्टी कटाव और पोषक तत्वों के बहाव की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे फसल वृद्धि प्रभावित होती है। भारी बारिश के बाद नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों की हानि की संभावना को देखते हुए आगामी फसलों में मृदा परीक्षण आधारित व संतुलित उर्वरक प्रबंधन जरूरी होगा। पर्याप्त नमी से खरपतवारों की वृद्धि भी तेज हो सकती है। लगातार अधिक नमी रहने पर कुछ फफूंद जनित रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।
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अधिक बारिश से सावधानी भी जरूरी
कम समय में तेज बारिश होने पर खेतों में जलभराव, मिट्टी कटाव और पोषक तत्वों के बहाव की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे फसल वृद्धि प्रभावित होती है। भारी बारिश के बाद नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों की हानि की संभावना को देखते हुए आगामी फसलों में मृदा परीक्षण आधारित व संतुलित उर्वरक प्रबंधन जरूरी होगा। पर्याप्त नमी से खरपतवारों की वृद्धि भी तेज हो सकती है। लगातार अधिक नमी रहने पर कुछ फफूंद जनित रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।
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