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बांदा में नहीं है कोरोना का एक भी मरीज
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जिला अस्पताल में मॉस्क लगाकर ड्यूटी करते स्वास्थ्य कर्मी।
- फोटो : BANDA
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बांदा। अधिकांश कोरोना वायरस जानलेवा नहीं हैं। इसके लक्षणों में निमोनिया, गले में दर्द, नाक बहना, खांसी-बुखार इत्यादि शामिल है। जिले में फिलहाल कोई भी मरीज कोरोना वायरस का नहीं पाया गया है, लेकिन शासन के निर्देशों पर एहतियाती सभी उपाय किए गए हैं।
संदिग्ध मरीज की जांच के लिए वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया यहां उपलब्ध है। इससे खून का नमूना लेकर जांच के लिए लखनऊ भेजा जाएगा। इसका कोई सटीक इलाज या टीका नहीं है। बचाव ही जरूरी है।
यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने कही है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश के प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में कोरोना से बचाव और इलाज प्रबंधन के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में यहां जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज में विशेष इंतजाम किए गए हैं।
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जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में प्रथम तल पर चार बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इमर्जेंसी के लिए वेंटीलेटर भी है। यहां 24 घंटे डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहेगा। ट्रिपल लेयर मॉस्क, एन-95 मॉस्क और पर्सनल प्रोटेक्शन किट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर प्राइवेट अस्पतालों की भी मदद ली जाएगी। सीएमओ ने कहा कि विदेश से आने वालों पर खास निगाह रखी जा रही है।
वायरसों का समूह है कोरोना
कोरोना वायरसों का समूह है। यह अधिकतर उसी तरह फैलता है, जैसे सर्दी पैदा करने वाले वायरस। यह मुख्य रूप से श्वसनतंत्र (रिस्पेट्री सिस्टम) को प्रभावित करता है। यह वायरल जानवरों से इंसानों में आता है। एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है। अधिकतर कोरोना वायरस जानलेवा नहीं है। इसके लक्षणों में निमोनिया जैसे लक्षण होते हैं। मसलन श्वांस लेने में परेशानी, गले में दर्द, नाक बहना, खांसी, बुखार इत्यादि।
हाथ न मिलाएं, हाथ धोने की आदत बनाएं
भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल रखें। लोगों से हाथ न मिलाएं। बार-बार हाथ धोने की आदत बनाएं। खांसी-जुकाम वाले मरीज से कम से कम 3 फीट की दूरी बनाए रखें। मॉस्क लगाएं। अचानक बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी हो तो तत्काल जांच के लिए जिला अस्पताल लाएं।
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संदिग्ध मरीज की जांच के लिए वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया यहां उपलब्ध है। इससे खून का नमूना लेकर जांच के लिए लखनऊ भेजा जाएगा। इसका कोई सटीक इलाज या टीका नहीं है। बचाव ही जरूरी है।
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यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने कही है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश के प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में कोरोना से बचाव और इलाज प्रबंधन के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में यहां जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज में विशेष इंतजाम किए गए हैं।
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जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में प्रथम तल पर चार बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इमर्जेंसी के लिए वेंटीलेटर भी है। यहां 24 घंटे डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहेगा। ट्रिपल लेयर मॉस्क, एन-95 मॉस्क और पर्सनल प्रोटेक्शन किट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर प्राइवेट अस्पतालों की भी मदद ली जाएगी। सीएमओ ने कहा कि विदेश से आने वालों पर खास निगाह रखी जा रही है।
वायरसों का समूह है कोरोना
कोरोना वायरसों का समूह है। यह अधिकतर उसी तरह फैलता है, जैसे सर्दी पैदा करने वाले वायरस। यह मुख्य रूप से श्वसनतंत्र (रिस्पेट्री सिस्टम) को प्रभावित करता है। यह वायरल जानवरों से इंसानों में आता है। एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है। अधिकतर कोरोना वायरस जानलेवा नहीं है। इसके लक्षणों में निमोनिया जैसे लक्षण होते हैं। मसलन श्वांस लेने में परेशानी, गले में दर्द, नाक बहना, खांसी, बुखार इत्यादि।
हाथ न मिलाएं, हाथ धोने की आदत बनाएं
भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल रखें। लोगों से हाथ न मिलाएं। बार-बार हाथ धोने की आदत बनाएं। खांसी-जुकाम वाले मरीज से कम से कम 3 फीट की दूरी बनाए रखें। मॉस्क लगाएं। अचानक बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी हो तो तत्काल जांच के लिए जिला अस्पताल लाएं।