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Banda News: पड़ोसी की कच्ची दीवार मकान पर गिरी, किसान और छह माह की बेटी की मौत
Wed, 26 Aug 2026 11:14 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 26 Aug 2026 11:14 PM IST
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फोटो-15-घटनास्थल पर पड़ा मकान का मलबा। संवाद
बबेरू (बांदा)। थाना क्षेत्र के गांव तराया में पड़ोसी के कच्चे मकान की दीवार मंगलवार रात पक्के मकान पर गिर गई।
मलबे की चपेट में आकर घर में सो रहे किसान और उसकी छह माह की बेटी की मौत हो गई। उसकी पत्नी और दूसरी बेटी भी मलबे में दबकर घायल हो गईं। दोनों को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
थाना बबेरू क्षेत्र के तराया गांव निवासी राजेश सिंह गौर (40) किसानी करता था। उसके परिवार में पत्नी सावित्री (35), बेटी लक्ष्मी (3) और रश्मि (छह माह) थीं। राजेश के मकान की दीवारें पक्की थीं जबकि छत पर टिनशेड पड़ा था। पड़ोस में रामदास यादव का कच्चा मकान था, जो राजेश के मकान से ऊंचा था।
मंगलवार रात करीब दो बजे राजेश परिवार के साथ मकान में सो रहा था। तभी रामदास के मकान की कच्ची दीवार अचानक राजेश के मकान पर जा गिरी। दीवार के मलबे के दबाव से राजेश का मकान भी ढह गया। हादसे में पूरा परिवार मलबे में दब गया।
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शोर सुनकर राजेश के परिजन और मोहल्ले के लोग मौके पर पहुंचे। करीब 40-45 मिनट की मशक्कत के बाद मलबा हटाया गया। इसके बाद सावित्री और बेटी लक्ष्मी को जीवित बाहर निकाला गया जबकि राजेश और छह माह की रश्मि की मौत हो चुकी थी।
परिजन सभी को सीएचसी बबेरू ले गए, जहां डॉक्टरों ने राजेश और रश्मि को मृत घोषित कर दिया। सावित्री और लक्ष्मी का प्राथमिक उपचार करने के बाद हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
परिजन शवों को लेकर घर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। मृतक के बड़े भाई फूल सिंह ने बताया कि राजेश तीन भाइयों में सबसे छोटा था। हादसे की जानकारी पर क्षेत्रीय विधायक विशंभर यादव और पूर्व मंत्री शिवशंकर पटेल ने परिजन से मुलाकात कर सांत्वना दी।
सीओ बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी ने बताया दीवार गिरने से मलबे में दबकर पिता-पुत्री की मौत हो गई है। घायल और मां और दूसरी बेटी का उपचार चल रहा है।
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अंधेरी रात में मलबे के ढेर में अपनों को तलाशते रहे
बांदा। राजेश के घर में मंगलवार रात जब पड़ोसी की कच्ची दीवार भरभराकर गिरी तो देखते ही देखते पक्के मकान में पहाड़ जैसा मलबा भर गया। बारिश से कच्ची मिट्टी दलदल में बदल चुकी थी।
मकान गिरने की आवाज सुनकर परिजन और ग्रामीण फावड़े लेकर मौके पर पहुंचे। अंधेरी रात में मलबा हटाकर सावित्री और तीन वर्षीय लक्ष्मी को तो बाहर निकाल लिया गया लेकिन छह माह की रश्मि का कहीं पता नहीं चला।
परिजन कच्ची मिट्टी हटाने के बाद पक्के मकान की ईंटें निकालते रहे। काफी मशक्कत के बाद गेहूं से भरे भारी ड्रम के नीचे राजेश और उसकी छह माह की बेटी रश्मि के शव मिले। दोनों को एक साथ देखकर परिजन बदहवास हो गए। राजेश के बड़े भाई फूल सिंह ने बताया कि मंगलवार शाम राजेश घर आया था। वह अपनी दोनों बेटियों के साथ कुछ देर बाहर बैठकर खेला था।
इसके बाद परिवार ने खाना खाया और सो गया। रात में पड़ोसी की जर्जर कच्ची दीवार अचानक राजेश के मकान पर आ गिरी। मलबे के साथ गेहूं से भरा भारी ड्रम भी राजेश और रश्मि के ऊपर गिर गया। दोनों ड्रम और मलबे के भारी बोझ के नीचे दब गए।
फूल सिंह ने बताया कि रश्मि अक्सर पिता के पास ही रहती थी। हादसे के बाद उसका शव भी पिता के सीने के पास मिला। उन्होंने कहा कि अगर गेहूं का भारी ड्रम दोनों के ऊपर नहीं गिरा होता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने बताया कि पड़ोसी रामदास की कच्ची दीवार काफी पुरानी और मोटी थी। पिछले वर्ष से ही दीवार जर्जर हो चुकी थी।
मंगलवार को दिनभर और रात में हुई बारिश के कारण मिट्टी कमजोर हो गई। आखिरकार दीवार राजेश के मकान पर आ गिरी और परिवार की खुशियां उजड़ गईं।
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पति और बेटी की मौत से टूटा परिवार
राजेश खेती-किसानी कर पत्नी और दो बेटियों का पालन-पोषण करता था। हादसे में राजेश और छह माह की बेटी रश्मि की मौत से परिवार टूट गया है। उसकी पत्नी सावित्री और तीन वर्षीय बेटी लक्ष्मी का मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है। परिजनों के मुताबिक, दोनों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।
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चार-चार लाख का मिलेगा मुआवजा
एसडीएम बबेरू अवनीश कुमार ने बताया कि तरायां में दीवार गिरने से पिता-पुत्री की मौत के मामले में दोनों को दैवीय आपदा के तहत चार-चार लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। इसके साथ ही कृषक दुर्घटना बीमा के तहत एक लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि दी जाएगी। घायलों को भी नियमानुसार मुआवजा मिलेगा।
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मलबे की चपेट में आकर घर में सो रहे किसान और उसकी छह माह की बेटी की मौत हो गई। उसकी पत्नी और दूसरी बेटी भी मलबे में दबकर घायल हो गईं। दोनों को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
थाना बबेरू क्षेत्र के तराया गांव निवासी राजेश सिंह गौर (40) किसानी करता था। उसके परिवार में पत्नी सावित्री (35), बेटी लक्ष्मी (3) और रश्मि (छह माह) थीं। राजेश के मकान की दीवारें पक्की थीं जबकि छत पर टिनशेड पड़ा था। पड़ोस में रामदास यादव का कच्चा मकान था, जो राजेश के मकान से ऊंचा था।
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मंगलवार रात करीब दो बजे राजेश परिवार के साथ मकान में सो रहा था। तभी रामदास के मकान की कच्ची दीवार अचानक राजेश के मकान पर जा गिरी। दीवार के मलबे के दबाव से राजेश का मकान भी ढह गया। हादसे में पूरा परिवार मलबे में दब गया।
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शोर सुनकर राजेश के परिजन और मोहल्ले के लोग मौके पर पहुंचे। करीब 40-45 मिनट की मशक्कत के बाद मलबा हटाया गया। इसके बाद सावित्री और बेटी लक्ष्मी को जीवित बाहर निकाला गया जबकि राजेश और छह माह की रश्मि की मौत हो चुकी थी।
परिजन सभी को सीएचसी बबेरू ले गए, जहां डॉक्टरों ने राजेश और रश्मि को मृत घोषित कर दिया। सावित्री और लक्ष्मी का प्राथमिक उपचार करने के बाद हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
परिजन शवों को लेकर घर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। मृतक के बड़े भाई फूल सिंह ने बताया कि राजेश तीन भाइयों में सबसे छोटा था। हादसे की जानकारी पर क्षेत्रीय विधायक विशंभर यादव और पूर्व मंत्री शिवशंकर पटेल ने परिजन से मुलाकात कर सांत्वना दी।
सीओ बबेरू कृष्णकांत त्रिपाठी ने बताया दीवार गिरने से मलबे में दबकर पिता-पुत्री की मौत हो गई है। घायल और मां और दूसरी बेटी का उपचार चल रहा है।
अंधेरी रात में मलबे के ढेर में अपनों को तलाशते रहे
बांदा। राजेश के घर में मंगलवार रात जब पड़ोसी की कच्ची दीवार भरभराकर गिरी तो देखते ही देखते पक्के मकान में पहाड़ जैसा मलबा भर गया। बारिश से कच्ची मिट्टी दलदल में बदल चुकी थी।
मकान गिरने की आवाज सुनकर परिजन और ग्रामीण फावड़े लेकर मौके पर पहुंचे। अंधेरी रात में मलबा हटाकर सावित्री और तीन वर्षीय लक्ष्मी को तो बाहर निकाल लिया गया लेकिन छह माह की रश्मि का कहीं पता नहीं चला।
परिजन कच्ची मिट्टी हटाने के बाद पक्के मकान की ईंटें निकालते रहे। काफी मशक्कत के बाद गेहूं से भरे भारी ड्रम के नीचे राजेश और उसकी छह माह की बेटी रश्मि के शव मिले। दोनों को एक साथ देखकर परिजन बदहवास हो गए। राजेश के बड़े भाई फूल सिंह ने बताया कि मंगलवार शाम राजेश घर आया था। वह अपनी दोनों बेटियों के साथ कुछ देर बाहर बैठकर खेला था।
इसके बाद परिवार ने खाना खाया और सो गया। रात में पड़ोसी की जर्जर कच्ची दीवार अचानक राजेश के मकान पर आ गिरी। मलबे के साथ गेहूं से भरा भारी ड्रम भी राजेश और रश्मि के ऊपर गिर गया। दोनों ड्रम और मलबे के भारी बोझ के नीचे दब गए।
फूल सिंह ने बताया कि रश्मि अक्सर पिता के पास ही रहती थी। हादसे के बाद उसका शव भी पिता के सीने के पास मिला। उन्होंने कहा कि अगर गेहूं का भारी ड्रम दोनों के ऊपर नहीं गिरा होता तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने बताया कि पड़ोसी रामदास की कच्ची दीवार काफी पुरानी और मोटी थी। पिछले वर्ष से ही दीवार जर्जर हो चुकी थी।
मंगलवार को दिनभर और रात में हुई बारिश के कारण मिट्टी कमजोर हो गई। आखिरकार दीवार राजेश के मकान पर आ गिरी और परिवार की खुशियां उजड़ गईं।
पति और बेटी की मौत से टूटा परिवार
राजेश खेती-किसानी कर पत्नी और दो बेटियों का पालन-पोषण करता था। हादसे में राजेश और छह माह की बेटी रश्मि की मौत से परिवार टूट गया है। उसकी पत्नी सावित्री और तीन वर्षीय बेटी लक्ष्मी का मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है। परिजनों के मुताबिक, दोनों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।
चार-चार लाख का मिलेगा मुआवजा
एसडीएम बबेरू अवनीश कुमार ने बताया कि तरायां में दीवार गिरने से पिता-पुत्री की मौत के मामले में दोनों को दैवीय आपदा के तहत चार-चार लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। इसके साथ ही कृषक दुर्घटना बीमा के तहत एक लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि दी जाएगी। घायलों को भी नियमानुसार मुआवजा मिलेगा।

फोटो-15-घटनास्थल पर पड़ा मकान का मलबा। संवाद

फोटो-15-घटनास्थल पर पड़ा मकान का मलबा। संवाद