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Banda News: क्रशर संचालक से एक लाख की रिश्वत लेते जेई गिरफ्तार
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फोटो-24-आरोपी जेई सलमान। स्रोत: विजिलेंस
बांदा। विजिलेंस झांसी की टीम ने सोमवार शाम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात अवर अभियंता (जेई) सलमान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि उसने महोबा के क्रशर संचालक से नोटिस पर कार्रवाई न करने के बदले रिश्वत मांगी थी। गिरफ्तारी के बाद जेई के हाथ रसायन से धुलवाए गए तो घोल गुलाबी हो गया।
विजिलेंस के अनुसार महोबा के कोतवाली क्षेत्र के बजरंग चौक निवासी अजय कुमार श्री बालाजी ग्रेनाइट संचालक हैं। उन्होंने शिकायत की थी कि 18 जून 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय से उन्हें बिना सर्वे किए व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा गया था।
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इस पर क्षेत्रीय अधिकारी माधवी कमलवंशी ने उन्हें कार्यालय बुलाया और जेई सलमान से मिलने को कहा। आरोप है कि जेई ने नोटिस पर कार्रवाई न करने के बदले एक लाख रुपये मांगे। शिकायतकर्ता के रकम कम करने की बात कहने पर भी वह तैयार नहीं हुआ। इसके बाद क्रशर संचालक ने विजिलेंस में शिकायत की। गोपनीय जांच में शिकायत सही पाए जाने पर टीम ने जाल बिछाया।
सोमवार शाम करीब पांच बजे इंदिरा नगर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में शिकायतकर्ता के जरिए जेई को फिनॉफ्थलीन पाउडर लगे नोट दिए गए। रुपये लेते ही विजिलेंस टीम ने उसे पकड़ लिया। आरोपी जेई सलमान मूलरूप से मेरठ के थाना भावनपुर के औरंगाबाद रसूलपुर का रहने वाला है। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, बांदा में तैनात था। आवास विकास में वह रह रहा था।
विजिलेंस टीम ने जेई के खिलाफ कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई। क्षेत्रीय अधिकारी का पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। विजिलेंस टीम में प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सिंह, निरीक्षक शेषमणि त्रिपाठी, निरीक्षक सुरेंद्र सिंह समेत 12 लोग शामिल रहे।
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बांदा और महोबा की आधा दर्जन फर्मों को जारी हुए थे नोटिस
बांदा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात जेई की रिश्वत लेते गिरफ्तारी के बाद विभाग में खलबली मची रही।
सूत्रों के अनुसार, बांदा और महोबा की करीब आधा दर्जन फर्मों को नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में नोटिस जारी किए गए थे। इनका निराकरण अभी बाकी है। इसके अलावा एनओसी के लिए किए गए कई आवेदन भी लंबित हैं। सूत्रों का कहना है कि इन आवेदनों को नियमों का हवाला देकर लंबित रखा गया है।
सोमवार को विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान कार्यालय में भी हलचल नजर आई। टीम जब जेई को पकड़कर ले जाने लगी तो वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा। हालांकि, विजिलेंस टीम ने उसे पकड़कर गाड़ी में बैठा लिया। इससे पहले कि कार्यालय में मौजूद लोग कुछ समझ पाते, टीम उसे लेकर वहां से निकल गई। जेई को ले जाने के बाद कार्यालय के बाहर कर्मचारियों का जमावड़ा लग गया। देर तक कार्रवाई को लेकर चर्चा होती रही।
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पहले भी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं कर्मचारी
जिले में पहले भी कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। जून 2024 में मध्याह्न भोजन योजना के जिला समन्वयक भाष्कर आसवानी को दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा था।
इसके अलावा 24 अक्तूबर 2024 को चकबंदी विभाग के लिपिक रामचंद्र को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था। वहीं 20 दिसंबर 2023 को रोडवेज बांदा एआरएम लक्ष्मण सिंह को 11 हजार की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया था।
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आरोप है कि उसने महोबा के क्रशर संचालक से नोटिस पर कार्रवाई न करने के बदले रिश्वत मांगी थी। गिरफ्तारी के बाद जेई के हाथ रसायन से धुलवाए गए तो घोल गुलाबी हो गया।
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विजिलेंस के अनुसार महोबा के कोतवाली क्षेत्र के बजरंग चौक निवासी अजय कुमार श्री बालाजी ग्रेनाइट संचालक हैं। उन्होंने शिकायत की थी कि 18 जून 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय से उन्हें बिना सर्वे किए व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा गया था।
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इस पर क्षेत्रीय अधिकारी माधवी कमलवंशी ने उन्हें कार्यालय बुलाया और जेई सलमान से मिलने को कहा। आरोप है कि जेई ने नोटिस पर कार्रवाई न करने के बदले एक लाख रुपये मांगे। शिकायतकर्ता के रकम कम करने की बात कहने पर भी वह तैयार नहीं हुआ। इसके बाद क्रशर संचालक ने विजिलेंस में शिकायत की। गोपनीय जांच में शिकायत सही पाए जाने पर टीम ने जाल बिछाया।
सोमवार शाम करीब पांच बजे इंदिरा नगर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में शिकायतकर्ता के जरिए जेई को फिनॉफ्थलीन पाउडर लगे नोट दिए गए। रुपये लेते ही विजिलेंस टीम ने उसे पकड़ लिया। आरोपी जेई सलमान मूलरूप से मेरठ के थाना भावनपुर के औरंगाबाद रसूलपुर का रहने वाला है। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, बांदा में तैनात था। आवास विकास में वह रह रहा था।
विजिलेंस टीम ने जेई के खिलाफ कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई। क्षेत्रीय अधिकारी का पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। विजिलेंस टीम में प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सिंह, निरीक्षक शेषमणि त्रिपाठी, निरीक्षक सुरेंद्र सिंह समेत 12 लोग शामिल रहे।
बांदा और महोबा की आधा दर्जन फर्मों को जारी हुए थे नोटिस
बांदा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात जेई की रिश्वत लेते गिरफ्तारी के बाद विभाग में खलबली मची रही।
सूत्रों के अनुसार, बांदा और महोबा की करीब आधा दर्जन फर्मों को नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में नोटिस जारी किए गए थे। इनका निराकरण अभी बाकी है। इसके अलावा एनओसी के लिए किए गए कई आवेदन भी लंबित हैं। सूत्रों का कहना है कि इन आवेदनों को नियमों का हवाला देकर लंबित रखा गया है।
सोमवार को विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान कार्यालय में भी हलचल नजर आई। टीम जब जेई को पकड़कर ले जाने लगी तो वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा। हालांकि, विजिलेंस टीम ने उसे पकड़कर गाड़ी में बैठा लिया। इससे पहले कि कार्यालय में मौजूद लोग कुछ समझ पाते, टीम उसे लेकर वहां से निकल गई। जेई को ले जाने के बाद कार्यालय के बाहर कर्मचारियों का जमावड़ा लग गया। देर तक कार्रवाई को लेकर चर्चा होती रही।
पहले भी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं कर्मचारी
जिले में पहले भी कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। जून 2024 में मध्याह्न भोजन योजना के जिला समन्वयक भाष्कर आसवानी को दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा था।
इसके अलावा 24 अक्तूबर 2024 को चकबंदी विभाग के लिपिक रामचंद्र को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था। वहीं 20 दिसंबर 2023 को रोडवेज बांदा एआरएम लक्ष्मण सिंह को 11 हजार की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया था।

फोटो-24-आरोपी जेई सलमान। स्रोत: विजिलेंस