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सुहास सुब्रमण्यन से पिया डांडिया: अमेरिका मध्यावधि चुनाव में कौन-कौन भारतवंशी जीते? जानिए क्या है स्थिति
Wed, 04 Nov 2026 08:25 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Wed, 04 Nov 2026 08:25 AM IST
सार
अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के चेहरों की चर्चा तेज है। चुनावी नतीजों में पिया डांडिया ने पहली बार जीत हासिल की, तो सुहास सुब्रमण्यम ने अपनी सीट बरकरार रखी। वहीं, अरुणा मिलर को भी दोबारा लेफ्टिनेंट गवर्नर बनने का मौका मिला। आइए जानते हैं, किस-किस भारतीय मूल के चेहरे ने जीत हासिल की है। पढ़ें पूरी खबर
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अमेरिका मध्यावधि चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारतीय-अमेरिकी पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीत लिया है। उन्होंने इस चुनाव में मरीन वेटरन (पूर्व सैनिक) केसी असकर को हराया।
कितने प्रतिशत वोट मिले?
मंगलवार को घोषित नतीजों के अनुसार, हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल डांडिया ने 51.9 प्रतिशत वोट हासिल किए और वह नई भारतीय-अमेरिकी अमेरिकी कांग्रेसवुमन बन गई हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी असकर को 49.1 प्रतिशत वोट मिले।
कौन हैं पिया डांडिया?
कैंपेन की वेबसाइट के अनुसार, डांडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी हैं। उन्होंने अपना करियर समुदायों को मजबूत बनाने में समर्पित किया है। एक हाई स्कूल प्रिंसिपल, पॉलिसी लीडर और टेक्नोलॉजी इनोवेटर के रूप में। फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मी और पली-बढ़ीं डांडिया ने अपने करियर की शुरुआत एक टीचर के रूप में की थी और वह हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल भी रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक डांडिया ने अपने करियर के शुरुआती दौर में दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में बच्चों को पढ़ाया, इस अनुभव ने उन्हें आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से अवगत कराया।
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उन्होंने एक हाई स्कूल की स्थापना की, जिसका लक्ष्य कम आय वाले छात्रों के जीवन की दिशा बदलना था, ताकि उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता के रास्ते पर लाया जा सके। उनके हाई स्कूल से पास होने वाले सभी छात्रों को कॉलेज में दाखिला मिला, जबकि उनमें से 86 प्रतिशत छात्र कम आय वाले परिवारों से आते थे। कैंपेन वेबसाइट के अनुसार, 28 साल की उम्र में वह अपने स्कूल की फाउंडिंग प्रिंसिपल बनीं, जिससे वह देश की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में से एक बन गईं।
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कितने प्रतिशत वोट मिले?
मंगलवार को घोषित नतीजों के अनुसार, हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल डांडिया ने 51.9 प्रतिशत वोट हासिल किए और वह नई भारतीय-अमेरिकी अमेरिकी कांग्रेसवुमन बन गई हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी असकर को 49.1 प्रतिशत वोट मिले।
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कौन हैं पिया डांडिया?
कैंपेन की वेबसाइट के अनुसार, डांडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी हैं। उन्होंने अपना करियर समुदायों को मजबूत बनाने में समर्पित किया है। एक हाई स्कूल प्रिंसिपल, पॉलिसी लीडर और टेक्नोलॉजी इनोवेटर के रूप में। फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मी और पली-बढ़ीं डांडिया ने अपने करियर की शुरुआत एक टीचर के रूप में की थी और वह हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल भी रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक डांडिया ने अपने करियर के शुरुआती दौर में दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में बच्चों को पढ़ाया, इस अनुभव ने उन्हें आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से अवगत कराया।
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उन्होंने एक हाई स्कूल की स्थापना की, जिसका लक्ष्य कम आय वाले छात्रों के जीवन की दिशा बदलना था, ताकि उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता के रास्ते पर लाया जा सके। उनके हाई स्कूल से पास होने वाले सभी छात्रों को कॉलेज में दाखिला मिला, जबकि उनमें से 86 प्रतिशत छात्र कम आय वाले परिवारों से आते थे। कैंपेन वेबसाइट के अनुसार, 28 साल की उम्र में वह अपने स्कूल की फाउंडिंग प्रिंसिपल बनीं, जिससे वह देश की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में से एक बन गईं।
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में काम कर चुके भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम एक बार फिर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य चुने गए हैं। 40 वर्षीय सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की। उन्हें 61.5 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डेव बेकविथ को 36.4 प्रतिशत मत मिले।
भारतीय माता-पिता के घर ह्यूस्टन में हुआ जन्म
ह्यूस्टन में भारतीय माता-पिता के घर जन्मे सुब्रमण्यम ने न्यू ऑरलियन्स की टुलने यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान सेवा भाव सीखा। वहां उन्होंने 'हरिकेन कैटरीना' से प्रभावित समुदायों के पुनर्निर्माण के लिए स्वयंसेवकों को संगठित करने में मदद की थी।
ओबामा प्रशासन में व्हाइट हाउस के तकनीकी नीति सलाहकार रहे
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से ऑनर्स के साथ लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद सुब्रमण्यम ने राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी नीति सलाहकार के रूप में काम किया। व्हाइट हाउस में काम करने के बाद उन्होंने लाउडन काउंटी में अपना छोटा व्यवसाय शुरू किया। साथ ही, उन्होंने स्वयंसेवक EMT (आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन) और फायरफाइटर के रूप में भी सेवाएं दीं।
2019 में वर्जीनिया की विधानसभा के लिए चुने गए
सुब्रमण्यम 2019 में वर्जीनिया जनरल असेंबली के लिए चुने गए थे और उन्होंने वहां दो कार्यकाल पूरे किए। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए 2024 में चुने जाने से पहले वह वर्जीनिया राज्य सीनेट के सदस्य भी रहे थे। अब वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत हासिल कर उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना स्थान बरकरार रखा है।
भारतीय माता-पिता के घर ह्यूस्टन में हुआ जन्म
ह्यूस्टन में भारतीय माता-पिता के घर जन्मे सुब्रमण्यम ने न्यू ऑरलियन्स की टुलने यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान सेवा भाव सीखा। वहां उन्होंने 'हरिकेन कैटरीना' से प्रभावित समुदायों के पुनर्निर्माण के लिए स्वयंसेवकों को संगठित करने में मदद की थी।
ओबामा प्रशासन में व्हाइट हाउस के तकनीकी नीति सलाहकार रहे
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से ऑनर्स के साथ लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद सुब्रमण्यम ने राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी नीति सलाहकार के रूप में काम किया। व्हाइट हाउस में काम करने के बाद उन्होंने लाउडन काउंटी में अपना छोटा व्यवसाय शुरू किया। साथ ही, उन्होंने स्वयंसेवक EMT (आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन) और फायरफाइटर के रूप में भी सेवाएं दीं।
2019 में वर्जीनिया की विधानसभा के लिए चुने गए
सुब्रमण्यम 2019 में वर्जीनिया जनरल असेंबली के लिए चुने गए थे और उन्होंने वहां दो कार्यकाल पूरे किए। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए 2024 में चुने जाने से पहले वह वर्जीनिया राज्य सीनेट के सदस्य भी रहे थे। अब वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत हासिल कर उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना स्थान बरकरार रखा है।
अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में एक और कार्यकाल जीता
मैरीलैंड में, भारतीय-अमेरिकी लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने एक और कार्यकाल हासिल किया है। यह जीत तब पक्की हुई जब एनबीसी न्यूज ने डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर के फिर से चुने जाने का अनुमान जताया।
मिलर, जो डेमोक्रेटिक टिकट पर मूर के साथ चुनाव लड़ रही थीं, उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के लेफ्टिनेंट गवर्नर उम्मीदवार रॉब क्रोप को हराया। क्रोप, राज्य के पूर्व डेलीगेट डैन कॉक्स के साथी उम्मीदवार (रनिंग मेट) थे।
उनके फिर से चुने जाने से देश के सबसे ऊंचे राज्य कार्यकारी पदों में से एक में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व बना रहेगा। इस बीच, अन्य भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत अभी तय नहीं हुई है, क्योंकि वोटों की गिनती और नतीजों का आना जारी है। इनमें नॉर्थ कैरोलिना से रिपब्लिकन महेश गनोर्कर, कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट रो खन्ना, और टेक्सास से डेमोक्रेट अमी बेरा तथा पूजा सेठी शामिल हैं।
मैरीलैंड में, भारतीय-अमेरिकी लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने एक और कार्यकाल हासिल किया है। यह जीत तब पक्की हुई जब एनबीसी न्यूज ने डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर के फिर से चुने जाने का अनुमान जताया।
मिलर, जो डेमोक्रेटिक टिकट पर मूर के साथ चुनाव लड़ रही थीं, उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के लेफ्टिनेंट गवर्नर उम्मीदवार रॉब क्रोप को हराया। क्रोप, राज्य के पूर्व डेलीगेट डैन कॉक्स के साथी उम्मीदवार (रनिंग मेट) थे।
उनके फिर से चुने जाने से देश के सबसे ऊंचे राज्य कार्यकारी पदों में से एक में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व बना रहेगा। इस बीच, अन्य भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत अभी तय नहीं हुई है, क्योंकि वोटों की गिनती और नतीजों का आना जारी है। इनमें नॉर्थ कैरोलिना से रिपब्लिकन महेश गनोर्कर, कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट रो खन्ना, और टेक्सास से डेमोक्रेट अमी बेरा तथा पूजा सेठी शामिल हैं।
कौन-कौन हैं मैदान में?
विवेक रामास्वामी
केरल से आए प्रवासियों के बेटे, रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी, ओहायो के गवर्नर चुनाव में फिलहाल पीछे चल रहे हैं। रामास्वामी, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल है और जिन्होंने मई में रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव जीता था, एमी एक्टन से लगभग 2,00,000 वोटों से पीछे हैं।
प्रमिला जयपाल बनाम नीरव सेठ
वाशिंगटन के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में, केरल मूल की प्रमिला जयपाल का मुकाबला रिपब्लिकन नीरव सेठ से है, जो गुजरात में जन्मे पूर्व अमेरिकी मरीन हैं। जयपाल 2017 से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और वह अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (अमेरिकी प्रतिनिधि सभा) के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं।
विवेक रामास्वामी
केरल से आए प्रवासियों के बेटे, रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी, ओहायो के गवर्नर चुनाव में फिलहाल पीछे चल रहे हैं। रामास्वामी, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल है और जिन्होंने मई में रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव जीता था, एमी एक्टन से लगभग 2,00,000 वोटों से पीछे हैं।
प्रमिला जयपाल बनाम नीरव सेठ
वाशिंगटन के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में, केरल मूल की प्रमिला जयपाल का मुकाबला रिपब्लिकन नीरव सेठ से है, जो गुजरात में जन्मे पूर्व अमेरिकी मरीन हैं। जयपाल 2017 से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और वह अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (अमेरिकी प्रतिनिधि सभा) के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं।