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Banda News: तालाबों की अनदेखी से सूखे कुएं और हैंडपंप, गहरा रहा पानी संकट

Thu, 20 Apr 2023 01:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Apr 2023 01:05 AM IST
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Dry wells and handpumps due to neglect of ponds, deepening water crisis
बांदा। तालाबों की अनदेखी और साल-दर साल बारिश में आती कमी से बुंदेलखंड में पानी का संकट गहराता जा रहा है। पहले बुंदेलखंड में बारिश का औसत तकरीबन 1200 मिलीमीटर से अधिक का था, अब यह 850 मिलीमीटर पर आ गया है। इस कारण यहां के तालाब पूरी तरह नहीं भर पाते। अतिक्रमण के चलते तालाबों का अस्तित्व खत्म होने से बारिश का ज्यादातर पानी बहकर नदियों में चला जाता है। इससे भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे खिसकता जा रहा है। इस कारण कुएं और हैंडपंप सूख गए हैं। उधर, बांदा जिले के जखनी गांव के बाशिंदों ने तालाबों का महत्व समझा। बारिश का पानी सहेजा तो पानी के संकट से उन्हें निजात मिल गई। पूरे साल गांव में पानी का संकट नहीं रहता।
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चटियल धरती पर बसे बुंदेलखंड में पहले बारिश का पानी सहेजने की प्रथा थी। गांवों और खेतों में बने बड़े-बड़े तालाबों में बारिश का पानी इकट्ठा कर लिया जाता था। तब बारिश भी पर्याप्त होती थी। तालाब भरने से भूमिगत जलस्तर ऊपर होने से कुओं में भी पर्याप्त पानी रहता था। धीरे-धीरे तालाबों की अनदेखी की जाने लगी। अतिक्रमण से तालाब सिकुड़ते गए और बारिश भी अब कम होती है। यही कारण है कि बुंदेलखंड में साल-दर-साल पीने के पानी का संकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। नतीजतन नदियां सिकुड़ रही हैं। तालाब सूख रहे हैं। हैंडपंप और ट्यूबवेल जवाब दे रहे हैं। इन्हीं सब कारणों से गर्मी में हाहाकार के हालात बन जाते हैं।
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जिले में कुल 471 ग्राम पंचायत हैं। भूजल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में बांदा में औसत बारिश 1236 मिलीमीटर थी। भूजल स्तर औसतन 7.45 से 8.85 मीटर तक नीचे चला गया। छह साल बाद अब औसत वर्ष 850 मिमी रह गई। भूजल स्तर 9.15 से 10.50 मीटर तक नीचे चला गया है। नतीजे हैंडपंप और ट्यूबवेल जवाब देने लगे। पानी आपूर्ति की क्षमता घट गई। जिले में 7508 कुओं में लगभग 3500 कुएं सूख चुके हैं। इनमें करीब छह सैकड़ा कुएं कचरा आदि डालने से खत्म हो गए। इसी तरह 2292 तालाबों में लगभग 1193 ही बचे हैं। ज्यादातर तालाबों में कब्जा हो गया। पानी के स्रोत खत्म होने से बड़ी संख्या में तालाब सूखे पड़े हैं।
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जल संरक्षण में नायाब है जखनी, लबालब हैं तालाब और कुएं
जल संकट से जूझ रहे बुंदेलखंड के बांदा जिले का जखनी गांव जल संरक्षण में अपनी पहचान देश स्तर पर बना चुका है। यह शासन-प्रशासन को आइना दिखा रहा है। इस गांव के ग्रामीणों ने बारिश की एक-एक बूंद सहेजने की कोशिश की है। शहर मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित जखनी जलग्राम के नाम से जाना जाता है। आलम यह है कि इस गांव का जलस्तर पूरे बुंदेलखंड में अच्छा है।
दावा है कि 5 से 8 मीटर में ही पानी मिल जाता है। हाल ही में पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे गए सर्वोदय आदर्श जलग्राम स्वराज अभियान समिति संरक्षक उमाशंकर पांडेय ने बताया कि घरों से निकलने वाला गंदा पानी भी सहेजा जाता है। बारिश की एक बूंद भी बर्बाद नहीं हो पाती। गांव में छह तालाब हैं, सभी पानी से भरे हैं। गर्मी में भी जीवित रहते हैं। गांव में 27 कुएं हैं। इनमें 12 सार्वजनिक और 15 कुएं किसानों के हैं। सभी में पानी है। 36 हैंडपंप लगे हैं। सभी पानी दे रहे हैं। किसानों ने मेड़ बनाकर पानी संरक्षित करते हैं। ग्रामीणों और किसानों की मेहनत से गांव में कभी पानी संकट नहीं हो सका।


वर्जन...
गर्मी में पानी के अधिक दोहन से भूजल स्तर नीचे चला जाता है। हैंडपंप, ट्यूबवेल आदि की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। रिबोर तक कराना पड़ता है। भूजल स्तर को संवारने के लिए जल संरक्षण जरूरी है। 300 वर्ग मीटर से अधिक एरिया वाले पुराने भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए पत्र भेजे गए हैं। नए बन रहे स्कूल भवनों में सिस्टम लगाए जा रहे हैं। -एसएस सिंह, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ विभाग, बांदा।
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