फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   दो दर्जन मारे दस्युओं को मिली मौत, 36 को जेल

दो दर्जन मारे दस्युओं को मिली मौत, 36 को जेल

Thu, 24 Aug 2017 11:47 PM IST
Updated Thu, 24 Aug 2017 11:47 PM IST
विज्ञापन
दो दर्जन मारे दस्युओं को मिली मौत, 36 को जेल
बांदा। पाठा के बीहड़ों में डकैतों की ‘अमर बेल’ की जड़ों में मट्ठा पड़ने का सिलसिला जारी है। बारिश में भले ही पाठा का जंगल हरा-भरा हो जाता है पर वहां पल रही डकैतों की पौध के लिए बारिश के महीने जुलाई और अगस्त काल साबित होते हैं। इस वर्ष भी यह किवदंती सच साबित हुई। पिछले माह जुलाई से लेकर अब तक दो डकैत मारे जा चुके हैं और चार डकैत पुलिस के हाथ चढ़े हैं। इनमें एक लाख रुपये का इनामी गोप्पा यादव और गुरुवार को मुठभेड़ में धरे गए बबुली कोल गैंग के तीन सदस्य शामिल हैं। अब तक कुल मिलाकर दो दर्जन डकैतों को मारा जा चुका है। गुरुवार पाठा में दबोचे गए तीन डकैतों को मिलाकर अब जेल वाले डकैतों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है।
विज्ञापन


1970 से अब तक 47 वर्षों में ददुआ, ठोकिया, रागिया, बलखड़िया, शंकर, पप्पू यादव जैसे कुख्यात सरगनाओं समेत लगभग दो दर्जन डाकुओं का खात्मा किया जा चुका है। ददुआ, ठोकिया, बलखड़िया आदि गिरोहों के हार्डकोर सदस्यों समेत करीब 33 डकैत बांदा जेल में हैं। बबुली कोल और गौरी यादव जैसे इनामी और कुख्यात डकैतों समेत आधा दर्जन छुटभैया गिरोह अभी भी सलामत हैं।
विज्ञापन


पाठा को दस्युओं की दुनिया बनाने का आगाज शिव कुमार कुर्मी उर्फ ददुआ ने 1970 के दशक में किया। रामू पुरवा में 10 लोगों की सामूहिक हत्या समेत कई जघन्य अपराध अंजाम देने वाला ददुआ तीन दशक तक पुलिस को छकाता रहा। पाठा की पहचान बना रहा। 21 जुलाई 2007 को ददुआ और उसके गिरोह के 10 सदस्यों को मानिकपुर के जंगलों में एसटीएफ ने मार गिराया।
विज्ञापन
विज्ञापन


ददुआ के बाद अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया और ज्यादा कुख्यात साबित हुआ। ददुआ ने कभी पुलिस की जान नहीं ली। जबकि ठोकिया पुलिस का जानी दुश्मन रहा। एसटीएफ के आधा दर्जन जवानों की सामूहिक हत्या ठोकिया ने की। बगहिया पुरवा में बच्चों समेत आधा दर्जन लोगों की ठोकिया ने सामूहिक हत्या कर दी और पुरवा फूंक दिया। अंतत: बारिश के मौसम अगस्त 2008 में ठोकिया पुलिस के हाथों मारा गया।

ठोकिया के बाद सुंदर पटेल उर्फ रागिया ने सिर उठाया। बिछियन पुरवा में एक दर्जन लोगों की सामूहिक हत्या कर दी। और भी कई जघन्य अपराध अंजाम दिए। अगस्त 2012 में यह भी मारा गया। इसके बाद सुदेश पटेल उर्फ बलखड़िया ने पाठा की दस्यु बादशाहत संभाली। मानिकपुर में पिता-पुत्र समेत चार लोगों की हत्या कर दर्जनों छोटे-बड़े अपराध अंजाम दिए। जुलाई 2016 में बलखड़िया भी पुलिस के हाथों मार गिराया गया।

राजापुर के जमौली गांव में अकेले दम तीन दिनों तक पुलिस से मुठभेड़ और चार पुलिस कर्मियों को शहीद कर डीआईजी को घायल करने वाला घनश्याम केवट 19 जून 2009 को इसी मुठभेड़ में मारा गया। इसके पहले जून 2006 में शंकर केवट को पुलिस ने मार दिया। बांदा के नरैनी क्षेत्र में नवोदित राजा सिंह को इसी वर्ष गांव वालों ने ढेर कर दिया। इसी वर्ष भी जुलाई और अगस्त पाठा के डाकुओं पर भारी पड़ा।

बीते माह जुलाई के अंत में एक लाख के इनामी गोप्पा यादव को चित्रकूट में एसटीएफ ने जिंदा दबोच लिया। वह जेल में है। इसके चंद दिनों बाद ही अगस्त में 50 हजार के इनामी ललित पटेल को एमपी पुलिस ने मार गिराया। अभी अगस्त चल ही रहा था कि गुरुवार (24 अगस्त) को पाठा के निही चिरैया गांव में पुलिस ने बबुली कोल गैंग को घेर लिया। 24 घंटे से ज्यादा मुठभेड़ चली।


राजू कोल समेत तीन डकैत पुलिस ने जिंदा गिरफ्तार कर लिया। बबुली कोल के भी घायल होने की खबर है। कुल मिलाकर पिछले दो माह के अंदर दो बड़े डकैतों को पुलिस ने मार गिराया और चार को दबोच कर जेल के हवाले कर दिया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि पाठा में कई दशकों से चली आ रही दस्युओं की सल्तनत के दिन अब जल्द ही खत्म होंगे।

-दो माह में दो को मारा, चार को जिंदा दबोचा
-पाठा में डकैतों की सल्तनत का सफाया जारी
-बारिश के दिन डकैतों के लिए बने हैं काल
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed