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‘गुरु गृह पढ़न गए रघुराई, अल्पकाल विद्या सब पाई’
Banda
Updated Wed, 11 Sep 2013 05:36 AM IST
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बांदा। भगवान श्रीराम ने बाल्य अवस्था में अल्प समय में ही सारी विद्याएं ग्रहण कर लीं थीं। वशिष्ठ व श्रीराम के बीच गुरु-शिष्य के अगूढ़ रिश्ते थे। युवा समाज को इससे सीख लेना चाहिए। ये बातें रामायणी कुटी चित्रकूट से आए महंत श्रीराम हृदयदास ने श्रीराम लीला प्रागी तालाब सभा मंडप में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन प्रवचन में कहीं। उन्होंने कहा कि जन्म की लीला के बाद श्रीराम ने अयोध्या के निवासियों को अपनी बाललीला से आनंदित किया। माता-पिता के आदेश पर गुरुकुल में हर तरह की शिक्षा ग्रहण की, जिससे जगत का कल्याण हो सके।संतों की रक्षा के लिए गुरु विश्वामित्र राजा दशरथ से मांगकर राम-लक्ष्मण को साथ ले गए। उन्होंने अहिल्या समेत जगत का उद्धार किया। आयोजक समिति के सदस्यों के अलावा अशोक त्रिपाठी जीतू, प्रद्युम्न दुबे लालू, सत्येंद्र गुप्ता, विजय गुप्ता, स्वयंवर सिंह, राधे गुप्ता, प्रदीप अग्रवाल, संतोष, रामदत्त पांडेय मौजूद रहे। ब्यूरो
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