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शहनाइयों का अबकी 18 दिन और रहेगा इंतजार
Updated Mon, 30 Oct 2017 11:42 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। चार माह से ठप शादी-ब्याह समेत अन्य शुभ कार्य अबकी देवोत्थानी एकादशी के बाद भी नहीं शुरू होंगे। शादी की शहनाइयों के लिए 18 दिन का और इंतजार करना होगा। इस साल 19 नवंबर के बाद ही सहालग शुरू होगी। दिसंबर तक शादी के महज 14 मुहूर्त मिलेंगे।
ज्योतिषाचार्य क्योटरा निवासी पंडित उमाकांत त्रिवेदी के मुताबिक आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस दिन से भगवान विष्णु सोने चले जाते हैं। इसके बाद से चार माह तक शादी-ब्याह जैसे सभी शुभ कार्य ठप हो जाते हैं।
चार माह बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थानी एकादशी पर विष्णु जागते हैं। इसे प्रबोधनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन तुलसी विवाह के बाद शादी, गृह प्रवेश, तिलक आदि जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस बार 31 अक्तूबर को देवोत्थानी एकादशी पड़ रही है। लेकिन शादी ब्याह के लिए 18 दिन और इंतजार करना होगा। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस बार देव जागने के बाद भी कोई वैवाहिक मुहूर्त नहीं है। बृहस्पति के पश्चिमास्त होने और सूर्य के 16 नवंबर को राशि बदलकर वृश्चिक में आने के तीन दिन बाद यानी 19 नवंबर से शादी की शहनाइयां सुनाई देंगी।
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पाप नाशक है देवोत्थानी एकादशी
बांदा। दीपावली पर्व के 11 दिन बाद पड़ने वाली देव प्रबोधिनी एकादशी इस बार पाप नाशक है। ज्योतिषाचार्य उमाकांत त्रिवेदी के मुताबिक देवोत्थानी एकादशी पर सूर्य व दूसरे ग्रह अपनी स्थिति बदलते हैं। इसका प्रभाव मनुष्य की इंद्रियों पर पड़ता है। इससे बचने के लिए देवोत्थानी एकादशी व्रत सबसे अहम है। इस दिन उपवास रखने व पूजन करने से हजार अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। इस दिन व्रत रखते हुए सूर्योदय से पहले स्नान करें। सूर्य भगवान को अर्घ्य दें। सालिगराम और तुलसी विवाह करें।
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बांदा। चार माह से ठप शादी-ब्याह समेत अन्य शुभ कार्य अबकी देवोत्थानी एकादशी के बाद भी नहीं शुरू होंगे। शादी की शहनाइयों के लिए 18 दिन का और इंतजार करना होगा। इस साल 19 नवंबर के बाद ही सहालग शुरू होगी। दिसंबर तक शादी के महज 14 मुहूर्त मिलेंगे।
ज्योतिषाचार्य क्योटरा निवासी पंडित उमाकांत त्रिवेदी के मुताबिक आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस दिन से भगवान विष्णु सोने चले जाते हैं। इसके बाद से चार माह तक शादी-ब्याह जैसे सभी शुभ कार्य ठप हो जाते हैं।
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चार माह बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थानी एकादशी पर विष्णु जागते हैं। इसे प्रबोधनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन तुलसी विवाह के बाद शादी, गृह प्रवेश, तिलक आदि जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इस बार 31 अक्तूबर को देवोत्थानी एकादशी पड़ रही है। लेकिन शादी ब्याह के लिए 18 दिन और इंतजार करना होगा। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस बार देव जागने के बाद भी कोई वैवाहिक मुहूर्त नहीं है। बृहस्पति के पश्चिमास्त होने और सूर्य के 16 नवंबर को राशि बदलकर वृश्चिक में आने के तीन दिन बाद यानी 19 नवंबर से शादी की शहनाइयां सुनाई देंगी।
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पाप नाशक है देवोत्थानी एकादशी
बांदा। दीपावली पर्व के 11 दिन बाद पड़ने वाली देव प्रबोधिनी एकादशी इस बार पाप नाशक है। ज्योतिषाचार्य उमाकांत त्रिवेदी के मुताबिक देवोत्थानी एकादशी पर सूर्य व दूसरे ग्रह अपनी स्थिति बदलते हैं। इसका प्रभाव मनुष्य की इंद्रियों पर पड़ता है। इससे बचने के लिए देवोत्थानी एकादशी व्रत सबसे अहम है। इस दिन उपवास रखने व पूजन करने से हजार अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। इस दिन व्रत रखते हुए सूर्योदय से पहले स्नान करें। सूर्य भगवान को अर्घ्य दें। सालिगराम और तुलसी विवाह करें।
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