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रमजान की कद्र करने वालों के लिए ईनाम है ईद
Updated Mon, 26 Jun 2017 12:23 AM IST
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बांदा। ईद इनाम का दिन है। एक माह तक पूरी पाबंदी से रोजा, नमाज, तरावीह, तिलावत करने वालों को इस दिन ऊपर वाला (ईश्वर) इनाम से नवाजता है। रोजेदार पाक, साफ नए लिबास में ईदगाह जाकर दो रकत विशेष नमाज अदा कर शुक्र अदा करते हैं। ईद उन्हीं की है जिन्होंने रमजान का सम्मान किया।
मदरसा जामिया अरबिया, हथौरा की मस्जिद में एतिकाफ पर बैठे लोगों को अंतिम दिन संबोधित करते हुए मौलाना हाफिज कारी हबीब अहमद ने ये बातें बतौर नसीहत बताईं। कहा कि ईद की असली खुशी के हकदार वही हैं जिन्होंने इस महीने का पूरा-पूरा एहतराम किया। रोजे, नमाज, तरावीह, तिलावत की पाबंदी की।
उन्होंने कहा कि इस्लाम में कई इबादतें हैं। सबका इनाम और बदला अलग-अलग है। लेकिन रोजे के बारे में ऊपर वाले ने वादा किया है कि इसका अज्र और इनाम रोजेदार को वह खुद देगा। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। बदनसीब हैं वो लोग जो इस माह मुबारक की कद्रदानी नहीं करते।
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उन्हें आइंदा इसका एहतेराम करना चाहिए। दारुल उलूम रब्बानियां के मौलाना आमिर मसूदी (अकील मियां) ने कहा कि मुस्लिमों और खासकर रोजदारों के लिए ईद बड़ा तोहफा है। यह लोगों को आपस में मिलजुलकर रहने की भी सीख देता है। ईद की नमाज के बाद गले मिलकर यही मुबारकबाद दी जाती है।
इस्लाम में इस दिन को इनाम का दिन कहा गया है। लेकिन अपने गरीब भाई और पड़ोसियों को हरगिज नहीं भूलना चाहिए। ईद की खुशी में अपने साथ उन्हें भी शामिल करना जरूरी है।
-ईद उन्हीं की जिन्होंने रमजान का किया सम्मान
-खुशियों के इस मौके पर गरीबों को न भूलें
-ईद के मौके पर मौलानाओं ने दी नसीहत
अमर उजाला ब्यूरो
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मदरसा जामिया अरबिया, हथौरा की मस्जिद में एतिकाफ पर बैठे लोगों को अंतिम दिन संबोधित करते हुए मौलाना हाफिज कारी हबीब अहमद ने ये बातें बतौर नसीहत बताईं। कहा कि ईद की असली खुशी के हकदार वही हैं जिन्होंने इस महीने का पूरा-पूरा एहतराम किया। रोजे, नमाज, तरावीह, तिलावत की पाबंदी की।
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उन्होंने कहा कि इस्लाम में कई इबादतें हैं। सबका इनाम और बदला अलग-अलग है। लेकिन रोजे के बारे में ऊपर वाले ने वादा किया है कि इसका अज्र और इनाम रोजेदार को वह खुद देगा। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। बदनसीब हैं वो लोग जो इस माह मुबारक की कद्रदानी नहीं करते।
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उन्हें आइंदा इसका एहतेराम करना चाहिए। दारुल उलूम रब्बानियां के मौलाना आमिर मसूदी (अकील मियां) ने कहा कि मुस्लिमों और खासकर रोजदारों के लिए ईद बड़ा तोहफा है। यह लोगों को आपस में मिलजुलकर रहने की भी सीख देता है। ईद की नमाज के बाद गले मिलकर यही मुबारकबाद दी जाती है।
इस्लाम में इस दिन को इनाम का दिन कहा गया है। लेकिन अपने गरीब भाई और पड़ोसियों को हरगिज नहीं भूलना चाहिए। ईद की खुशी में अपने साथ उन्हें भी शामिल करना जरूरी है।
-ईद उन्हीं की जिन्होंने रमजान का किया सम्मान
-खुशियों के इस मौके पर गरीबों को न भूलें
-ईद के मौके पर मौलानाओं ने दी नसीहत
अमर उजाला ब्यूरो