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उल्टी दस्त से दादी-पोते की मौत
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बलरामपुर। नगर से सटे खमौवा गांवा में मंगलवार की सुबह एक ही घर में उल्टी दस्त से दादी-पोते की मौत हो गई। गांव में एक ही घर से दो लोगों की मौत होने पर हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में मंगलवार से ही डेरा डाल रखा है। गांव के लोगों को दवाएं दी जा रही है।
खमौवा गांव निवासी यूनुस का 12 वर्षीय बेटा आसिफ उल्टी दस्त के चलते मंगलवार को दम तोड़ दिया। थोड़ी देर बाद उसकी 65 वर्षीय दादी रबूला की भी मौत उल्टी-दस्त से हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों की तबीयत खराब हुई थी।
दोनों का निजी चिकित्सक के यहां इलाज चल रहा था। गांव में ताबड़तोड़ हुई दो मौतों की सूचना पाते ही एसीएमओ डॉ. अनिल चौधरी, जिला मलेरिया अधिकारी डा. राजेश पांडेय, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी अरविंद मिश्र मौके पर पहुंचे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जोकहिया की टीम ने मंगलवार से ही गांव स्थित मदरसे में कैंप लगाकर दवाएं बांट रही हैं।
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अधीक्षक डॉ. जावेद अख्तर ने बताया कि गांव में कोई बीमार नहीं है। गांव के करीब 400 लोगों को दवाएं दी जा चुकी हैं। ग्रामीण दवाएं तो ले रहे हैं लेकिन बीमारी की सूचना देने से परहेज कर रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि गांव के हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। जागरूकता की कमी के चलते सफाई के प्रति लापरवाह होने के साथ ही ग्रामीण बीमारियां छिपा रहे हैं जो जानलेवा साबित हो सकता है।
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खमौवा गांव निवासी यूनुस का 12 वर्षीय बेटा आसिफ उल्टी दस्त के चलते मंगलवार को दम तोड़ दिया। थोड़ी देर बाद उसकी 65 वर्षीय दादी रबूला की भी मौत उल्टी-दस्त से हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों की तबीयत खराब हुई थी।
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दोनों का निजी चिकित्सक के यहां इलाज चल रहा था। गांव में ताबड़तोड़ हुई दो मौतों की सूचना पाते ही एसीएमओ डॉ. अनिल चौधरी, जिला मलेरिया अधिकारी डा. राजेश पांडेय, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी अरविंद मिश्र मौके पर पहुंचे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जोकहिया की टीम ने मंगलवार से ही गांव स्थित मदरसे में कैंप लगाकर दवाएं बांट रही हैं।
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अधीक्षक डॉ. जावेद अख्तर ने बताया कि गांव में कोई बीमार नहीं है। गांव के करीब 400 लोगों को दवाएं दी जा चुकी हैं। ग्रामीण दवाएं तो ले रहे हैं लेकिन बीमारी की सूचना देने से परहेज कर रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि गांव के हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। जागरूकता की कमी के चलते सफाई के प्रति लापरवाह होने के साथ ही ग्रामीण बीमारियां छिपा रहे हैं जो जानलेवा साबित हो सकता है।