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Balrampur News: पंचायत चुनाव हिंसा में पूर्व सांसद रिजवान समेत सभी 11 आरोपी बरी
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बलरामपुर। जिले के बेलीखुर्द पंचायत चुनाव हिंसा प्रकरण में एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश दीप नारायण तिवारी ने बुधवार को फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर, कांग्रेस नेता दीपांकर सिंह सहित सभी 11 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। बरी होने वालों में पूर्व सांसद के दामाद रमीज भी शामिल हैं। फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोप को सिद्ध करने में विफल रहा है।
चार साल पुराने इस प्रकरण ने जिले की राजनीति में लंबे समय तक तनाव बनाए रखा था। अदालत के फैसले के बाद अब यह बहुचर्चित मामला समाप्त हो गया है। इस फैसले से दोनों ही पक्षों के समर्थकों ने राहत की सांस ली है। मामले में न्यायालय ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर, मो. आदिल, आकिब खान, साजिद, सोयब अहमद, पूर्व सांसद के दामाद रमीज, दीपांकर सिंह, शिवेंद्र उर्फ शुभांकर सिंह, शुभम सिंह, शिवम सिंह और विकास यादव को दोषमुक्त करने का आदेश सुनाया।
यह था मामला
यह मामला वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव से जुड़ा है। मतदान समाप्त होने के बाद 26 अप्रैल 2021 को तुलसीपुर क्षेत्र के बेलीखुर्द गांव में पूर्व सांसद रिजवान जहीर और पूर्व जिला पंचायत सदस्य दीपांकर सिंह के समर्थकों में झड़प हो गई थी। विवाद बढ़ा तो गांव में आगजनी और तोड़फोड़ हुई। आरोप था कि दीपांकर सिंह की दो लग्जरी गाड़ियों को जला दिया गया, दो अन्य वाहनों को क्षति पहुंचाई गई और मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की गई। अभियोजन ने कुल 10 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें फरियादी उपनिरीक्षक अजीत कुमार त्रिपाठी के साथ अरुण चौरसिया, अयोध्या सिंह, शैलेंद्र सोलंकी, सुनील यादव, उमेश यादव, राजेंद्र सिंह, रोहित सिंह, अनुसंधान अधिकारी दूधनाथ चतुर्वेदी और चिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार शामिल थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों से न तो यह सिद्ध होता है कि अभियुक्तों ने हिंसक भीड़ बनाकर सरकारी कार्य में बाधा डाला, और न ही यह साबित हुआ कि उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया या जानलेने का प्रयास किया। इस तरह न्यायालय ने साक्ष्य पर्याप्त न होने के कारण सभी आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश कर दिया।
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बरी होने के बाद भी पूर्व सांसद रिजवान को अभी राहत नहीं
बेलीखुर्द पंचायत चुनाव हिंसा प्रकरण में अदालत से बरी होने के बावजूद पूर्व सांसद रिजवान जहीर को फिलहाल राहत नहीं मिल पाएगी। वे इस समय नगर पंचायत तुलसीपुर के तत्कालीन अध्यक्ष फिरोज अहमद उर्फ पप्पू की हत्या के मामले में ललितपुर जेल में बंद हैं। यह हत्या प्रकरण वर्ष 2022 के जनवरी माह की शुरुआत में तुलसीपुर क्षेत्र में हुआ था, जिसने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी थी। पुलिस ने जांच के बाद पूर्व सांसद रिजवान जहीर समेत कई लोगों को इस केस में आरोपी करते हुए 10 जनवरी को गिरफ्तार किया था। पूर्व सांसद रिजवान जिले की राजनीति में लंबे समय से चर्चित और प्रभावशाली नाम रहे हैं। वे बसपा और सपा, दोनों से सांसद रह चुके हैं। लगातार कानूनी मुकदमों में उलझने के कारण उनकी सक्रिय राजनीति पर फिलहाल विराम लग गया है।
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चार साल पुराने इस प्रकरण ने जिले की राजनीति में लंबे समय तक तनाव बनाए रखा था। अदालत के फैसले के बाद अब यह बहुचर्चित मामला समाप्त हो गया है। इस फैसले से दोनों ही पक्षों के समर्थकों ने राहत की सांस ली है। मामले में न्यायालय ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर, मो. आदिल, आकिब खान, साजिद, सोयब अहमद, पूर्व सांसद के दामाद रमीज, दीपांकर सिंह, शिवेंद्र उर्फ शुभांकर सिंह, शुभम सिंह, शिवम सिंह और विकास यादव को दोषमुक्त करने का आदेश सुनाया।
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यह था मामला
यह मामला वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव से जुड़ा है। मतदान समाप्त होने के बाद 26 अप्रैल 2021 को तुलसीपुर क्षेत्र के बेलीखुर्द गांव में पूर्व सांसद रिजवान जहीर और पूर्व जिला पंचायत सदस्य दीपांकर सिंह के समर्थकों में झड़प हो गई थी। विवाद बढ़ा तो गांव में आगजनी और तोड़फोड़ हुई। आरोप था कि दीपांकर सिंह की दो लग्जरी गाड़ियों को जला दिया गया, दो अन्य वाहनों को क्षति पहुंचाई गई और मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की गई। अभियोजन ने कुल 10 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें फरियादी उपनिरीक्षक अजीत कुमार त्रिपाठी के साथ अरुण चौरसिया, अयोध्या सिंह, शैलेंद्र सोलंकी, सुनील यादव, उमेश यादव, राजेंद्र सिंह, रोहित सिंह, अनुसंधान अधिकारी दूधनाथ चतुर्वेदी और चिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार शामिल थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों से न तो यह सिद्ध होता है कि अभियुक्तों ने हिंसक भीड़ बनाकर सरकारी कार्य में बाधा डाला, और न ही यह साबित हुआ कि उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया या जानलेने का प्रयास किया। इस तरह न्यायालय ने साक्ष्य पर्याप्त न होने के कारण सभी आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश कर दिया।
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बरी होने के बाद भी पूर्व सांसद रिजवान को अभी राहत नहीं
बेलीखुर्द पंचायत चुनाव हिंसा प्रकरण में अदालत से बरी होने के बावजूद पूर्व सांसद रिजवान जहीर को फिलहाल राहत नहीं मिल पाएगी। वे इस समय नगर पंचायत तुलसीपुर के तत्कालीन अध्यक्ष फिरोज अहमद उर्फ पप्पू की हत्या के मामले में ललितपुर जेल में बंद हैं। यह हत्या प्रकरण वर्ष 2022 के जनवरी माह की शुरुआत में तुलसीपुर क्षेत्र में हुआ था, जिसने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी थी। पुलिस ने जांच के बाद पूर्व सांसद रिजवान जहीर समेत कई लोगों को इस केस में आरोपी करते हुए 10 जनवरी को गिरफ्तार किया था। पूर्व सांसद रिजवान जिले की राजनीति में लंबे समय से चर्चित और प्रभावशाली नाम रहे हैं। वे बसपा और सपा, दोनों से सांसद रह चुके हैं। लगातार कानूनी मुकदमों में उलझने के कारण उनकी सक्रिय राजनीति पर फिलहाल विराम लग गया है।