{"_id":"65ac09168b2e3cc29401c5b3","slug":"the-community-toilet-of-corruption-swallowed-two-lives-ballia-news-c-190-1-bal1001-10687-2024-01-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: भ्रष्टाचार के सामुदायिक शौचालय ने निगल ली दो जिंदगियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: भ्रष्टाचार के सामुदायिक शौचालय ने निगल ली दो जिंदगियां
विज्ञापन
थाना क्षेत्र के गोपालपुर ग्राम पंचायत के उदईछपरा गांव में शनिवार को दोपहर बाद निष्प्रयोजित और जर्जर हो चुके सामुदायिक शौचालय की दीवार गिरने से उसके मलबे के नीचे दबकर दो मासूम बच्चियों की मौत महज इत्तेफाक नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की देन है।
वर्ष 2013-14 में करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत से बने शौचालय का निर्माण अगर तब कायदे से कराया गया होता तो शायद आज यह परिस्थितियां उत्पन्न नहीं हुई होती। सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार ने इस ओर किसी का ध्यान ही नहीं आने दिया। इतना ही नहीं निष्प्रयोज और जर्जर होने के बावजूद भी सामुदायिक शौचालय का ध्वस्तीकरण नहीं होना विभागीय उदासीनता और लापरवाही का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
दो मासूम बहनों की मौत के बाद भी प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत के बावजूद वर्ष 2013-14 में बने सामुदायिक शौचालय को विकास खंड के अधिकारियों ने ध्वस्त नहीं कराया। मानों वह इस तरह की घटना होने का इंतजार कर रहे थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मानक के अनुसार अगर शौचालय बना हुआ होता तो गिरा नहीं होता। शौचालय में झांड झंखाड़ उगने के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान उस पर नहीं गया। जबकि गांव के कुछ जिम्मेदार लोगों का घर पास में ही है। अगर समय रहते जर्जर शौचालय को ध्वस्त करा दिया गया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना भी नहीं होती। कुछ अधिकारियों ने दबे जुबान बताया कि इस तरह के जर्जर व निष्प्रयोजित भवन व शौचालय दर्जनों गांवों में है, लेकिन पंचायतें ध्वस्त नहीं करा रही हैं।
विज्ञापन
सामुदायिक शौचालय का ध्वस्तीकरण क्यों नहीं हुआ, यह जांच का विषय है। जर्जर हालत में निष्प्रयोज्य शौचालय था तो ध्वस्तीकरण हो जाना चाहिए था। इसकी जांच होगी।
- उमेश कुमार सिंह, एडीओ पंचायत बैरिया।
विज्ञापन
वर्ष 2013-14 में करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत से बने शौचालय का निर्माण अगर तब कायदे से कराया गया होता तो शायद आज यह परिस्थितियां उत्पन्न नहीं हुई होती। सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार ने इस ओर किसी का ध्यान ही नहीं आने दिया। इतना ही नहीं निष्प्रयोज और जर्जर होने के बावजूद भी सामुदायिक शौचालय का ध्वस्तीकरण नहीं होना विभागीय उदासीनता और लापरवाही का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
विज्ञापन
दो मासूम बहनों की मौत के बाद भी प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत के बावजूद वर्ष 2013-14 में बने सामुदायिक शौचालय को विकास खंड के अधिकारियों ने ध्वस्त नहीं कराया। मानों वह इस तरह की घटना होने का इंतजार कर रहे थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मानक के अनुसार अगर शौचालय बना हुआ होता तो गिरा नहीं होता। शौचालय में झांड झंखाड़ उगने के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान उस पर नहीं गया। जबकि गांव के कुछ जिम्मेदार लोगों का घर पास में ही है। अगर समय रहते जर्जर शौचालय को ध्वस्त करा दिया गया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना भी नहीं होती। कुछ अधिकारियों ने दबे जुबान बताया कि इस तरह के जर्जर व निष्प्रयोजित भवन व शौचालय दर्जनों गांवों में है, लेकिन पंचायतें ध्वस्त नहीं करा रही हैं।
विज्ञापन
सामुदायिक शौचालय का ध्वस्तीकरण क्यों नहीं हुआ, यह जांच का विषय है। जर्जर हालत में निष्प्रयोज्य शौचालय था तो ध्वस्तीकरण हो जाना चाहिए था। इसकी जांच होगी।
- उमेश कुमार सिंह, एडीओ पंचायत बैरिया।