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छह चालकों के भरोसे जिले के पांच अग्निशमन केंद्र
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बलिया। जनपद में आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। जनपद में अग्निशमन विभाग में 12 के सापेक्ष मात्र छह चालक ही तैनात हैं। अग्निशमन विभाग में छह चालकों के भरोसे 10 गाड़ियां हैं। इसमें चार वाटर टेंडर (बड़ी), चार फायर मिस्ट (छोटी) गाड़ियां हैं। इसके अलावा एक हाई प्रेशर बड़ी तथा एक छोटी हाई प्रेशर गाड़िया है। जनपद में 69 के सापेक्ष 48 फायरमैन उपलब्ध हैं।
जिले में हर साल सैकड़ों आग की घटनाएं होती हैं। सैकड़ों परिवार खुले आसामन के नीचे आने के साथ ही दाने-दाने के लिए मोहताज हो जाते हैं। फिर भी न तो शासन, न ही जिले के जनप्रतिनिधि अग्निशमन केंद्रों पर कर्मचारियों की कमी की बात जोरदार ढंग से उठाते हैं। आकड़े पर गौर करें तो वर्तमान में जिले में कुल पांच अग्निशमन केंद्र संचालित हो रहे है। जबकि एक केंद्र निर्माणाधीन है। जिले में पुलिस लाइन, रसड़ा, बांसडीह, बेल्थरोड में निछुहाडीह, बैरिया में इब्राहिमाबाद में अग्निशमन केंद्र संचालित है। जबकि सिकंदरपुर के गौरामदनपुरा में शिलायांस के बाद निर्माण आरम्भ हो गया है। जनपद में संचालित पांच अग्निशमन केंद्र पर कुल 10 अग्निशमन अधिकारी द्वितीय का मानक है, लेकिन वर्तमान में तीन तैनात है। इसी प्रकार पांच अग्निशमन अधिकारी के सापेक्ष एक भी तैनात नहीं है। जबकि 12 चालक के सापेक्ष मात्र छह चालक पूरे जनपद में तैनात है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी का एक मानक है जो तैनात है। इसी प्रकार मुख्य अग्निशमन अधिकारी द्वितीय का दो है जो तैनात है। वही वर्तमान में 15 रिक्रूट आरक्षी तैनात है जो 15 मई को ट्रेनिंग करने चले जाएंगे। एक अग्निशमन वाहन पर चार कांस्टेबल, एक हवलदार व एक चालक मानक है, लेकिन कमी के कारण आवश्यतकता के अनुसार सिपाहियों को भेजा जाता है। ऐसे में पूरे जिले की अगलगी को कवर करना और आग पर समय रहते नियंत्रण पाने की बात बेमानी नहीं तो और क्या है? चालकों के साथ अन्य कर्मचारियों की कमी की शिकायत उच्चाधिकारियों सहित शासन से की गई है, लेकिन जिले में दर्जनों अग्नि कांडों के होने के बावजूद चालकों सहित अन्य कर्मचारियों की कमी को दूर नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अग्निशमन विभाग से समय रहते मौके पर पहुंचने की उम्मीद करना बेवकूफी ही होगी। इस कमी को दूर करने के लिए जिले का कोई जनप्रतिनिधि भी आवाज नहीं उठा रहा है। इस बाबत मुख्य अग्निशमन अधिकारी धीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि जिले में 12 के सापेक्ष महज छह चालकों से वाहन काम चलाया जा रहा है। ऐसे में एक साथ अलग-अलग तहसीलों में आगलगी की घटना होने पर विभाग बेबस हो जाता है। हालांकि जिले की छह तहसीलों में सिकंदरपुर को छोड़ कर शेष पांच तहसीलों में आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन केंद्र मौजूद है।
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जिले में हर साल सैकड़ों आग की घटनाएं होती हैं। सैकड़ों परिवार खुले आसामन के नीचे आने के साथ ही दाने-दाने के लिए मोहताज हो जाते हैं। फिर भी न तो शासन, न ही जिले के जनप्रतिनिधि अग्निशमन केंद्रों पर कर्मचारियों की कमी की बात जोरदार ढंग से उठाते हैं। आकड़े पर गौर करें तो वर्तमान में जिले में कुल पांच अग्निशमन केंद्र संचालित हो रहे है। जबकि एक केंद्र निर्माणाधीन है। जिले में पुलिस लाइन, रसड़ा, बांसडीह, बेल्थरोड में निछुहाडीह, बैरिया में इब्राहिमाबाद में अग्निशमन केंद्र संचालित है। जबकि सिकंदरपुर के गौरामदनपुरा में शिलायांस के बाद निर्माण आरम्भ हो गया है। जनपद में संचालित पांच अग्निशमन केंद्र पर कुल 10 अग्निशमन अधिकारी द्वितीय का मानक है, लेकिन वर्तमान में तीन तैनात है। इसी प्रकार पांच अग्निशमन अधिकारी के सापेक्ष एक भी तैनात नहीं है। जबकि 12 चालक के सापेक्ष मात्र छह चालक पूरे जनपद में तैनात है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी का एक मानक है जो तैनात है। इसी प्रकार मुख्य अग्निशमन अधिकारी द्वितीय का दो है जो तैनात है। वही वर्तमान में 15 रिक्रूट आरक्षी तैनात है जो 15 मई को ट्रेनिंग करने चले जाएंगे। एक अग्निशमन वाहन पर चार कांस्टेबल, एक हवलदार व एक चालक मानक है, लेकिन कमी के कारण आवश्यतकता के अनुसार सिपाहियों को भेजा जाता है। ऐसे में पूरे जिले की अगलगी को कवर करना और आग पर समय रहते नियंत्रण पाने की बात बेमानी नहीं तो और क्या है? चालकों के साथ अन्य कर्मचारियों की कमी की शिकायत उच्चाधिकारियों सहित शासन से की गई है, लेकिन जिले में दर्जनों अग्नि कांडों के होने के बावजूद चालकों सहित अन्य कर्मचारियों की कमी को दूर नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अग्निशमन विभाग से समय रहते मौके पर पहुंचने की उम्मीद करना बेवकूफी ही होगी। इस कमी को दूर करने के लिए जिले का कोई जनप्रतिनिधि भी आवाज नहीं उठा रहा है। इस बाबत मुख्य अग्निशमन अधिकारी धीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि जिले में 12 के सापेक्ष महज छह चालकों से वाहन काम चलाया जा रहा है। ऐसे में एक साथ अलग-अलग तहसीलों में आगलगी की घटना होने पर विभाग बेबस हो जाता है। हालांकि जिले की छह तहसीलों में सिकंदरपुर को छोड़ कर शेष पांच तहसीलों में आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन केंद्र मौजूद है।
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