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निदप्ेशक ने निलंबित लिपिक को जारी किया प्रण बारओ नोटिस
Updated Wed, 15 Nov 2017 11:22 PM IST
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बलिया। फर्जी नियुक्ति के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से निलंबित लिपिक दयाशंकर वर्मा को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा लखनऊ के निदेशक प्रशासन डा. पूजा पांडेय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें जवाब देन के लिए एक सप्ताह का समय निर्धारित किया है। यदि समयावधि में जवाब नहीं मिलता है तो बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में उल्लेख किया है कि अगर आपकी नियुक्ति 1986 में मुरादाबाद में की गई थी तो उसके संबंध में साक्ष्य सात दिन के भीतर उनके समक्ष प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखे। निदेशक के इस पत्र स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मची हुई है।
सीएमओ कार्यालय में प्रधान लिपिक के रुप में तैनात रहे दयाशंकर को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में उल्लेख किया गया है कि छह अक्तूबर 1986 में मुख्य चिकित्सा अधिकारी मुरादाबाद अस्थाई रुप से कनिष्ठ लिपिक के पद नियुक्ति की गई थी। जिसमें शासन के निर्देश पर किए गए जांच में पाया गया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय मुरादाबाद में कनिष्ठ लिपिक के पद पर की गई नियुक्ति नियमों के अंतर्गत नहीं है। ऐसे में आपके पक्ष सुनने के बाद आपकी सेवाओं के बारे में अवसर प्रदान करते हुए स्वत: स्पष्ट आदेश द्वारा सेवा समाप्त की जाय। इस संबंध में पूर्व में 27 सितंबर 2017 को शासन की ओर से जारी नोटिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया था। जिसे हाईकोर्ट ने रिकाल करते हुए एक सप्ताह के भीतर अनियमित नियुक्ति के संदर्भ में अपना पक्ष रखने को आदेश दिया है। अगर एक सप्ताह के भीतर इस प्रकरण कोई अभ्यावेदन प्राप्त नहीं होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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सीएमओ कार्यालय में प्रधान लिपिक के रुप में तैनात रहे दयाशंकर को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में उल्लेख किया गया है कि छह अक्तूबर 1986 में मुख्य चिकित्सा अधिकारी मुरादाबाद अस्थाई रुप से कनिष्ठ लिपिक के पद नियुक्ति की गई थी। जिसमें शासन के निर्देश पर किए गए जांच में पाया गया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय मुरादाबाद में कनिष्ठ लिपिक के पद पर की गई नियुक्ति नियमों के अंतर्गत नहीं है। ऐसे में आपके पक्ष सुनने के बाद आपकी सेवाओं के बारे में अवसर प्रदान करते हुए स्वत: स्पष्ट आदेश द्वारा सेवा समाप्त की जाय। इस संबंध में पूर्व में 27 सितंबर 2017 को शासन की ओर से जारी नोटिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया था। जिसे हाईकोर्ट ने रिकाल करते हुए एक सप्ताह के भीतर अनियमित नियुक्ति के संदर्भ में अपना पक्ष रखने को आदेश दिया है। अगर एक सप्ताह के भीतर इस प्रकरण कोई अभ्यावेदन प्राप्त नहीं होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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