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छुट्टी के दिन उठाया मेले का लुत्फ
ballia
Updated Sun, 03 Dec 2017 11:28 PM IST
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सुदिष्ट बाबा समाधि स्थल पर लगे धनुष यज्ञ में मेले में श्रृगांर की सामग्री खरीदती महिलाएं।
- फोटो : ballia
धनुषयज्ञ मेला में रविवार को भी मेलार्थियों की खासी भीड़ रही। छुट्टी के दिन होने की वजह से मेलार्थी पूरे दिन मेले का आनंद उठाते रहे। जहां बच्चों ने चर्खी झूले का मजा लिया तो वहीं परिवार के लोग खरीदारी करने में व्यस्त रहे।
संत सुदिष्ट बाबा के समाधि स्थल के पास लगे धनुष यज्ञ मेले का शुभारंभ 23 नवंबर को हुआ था। करीब चार-पांच दिनों तक मेले में विशेष रौनक नहीं दिखाई दिया, लेकिन अब मेला पूरे शबाब पर है, बिहार से भी सैकड़ों के तादाद में मेलार्थी मेले में पहुंचकर अपने जरूरी सामानों की खरीदारी कर रहे हैं। शनिवार को छुट्टी का दिन होने से मेले में खूब भीड़ थी, लेकिन रविवार को उससे दोगुनी भीड़ हुई। मेला में सबसे अधिक ऊनी वस्त्र व बक्सों की खरीदारी की जा रही है। जबकि महिलाओं की भीड़ मीना बाजार में उमड़ रही है।
बड़े दुकानदारों के अपेक्षा हरेक माल 10 रुपया व 20 रुपया के दुकानदारों की चांदी कट रही है। भीड़ के कारण छोटे बच्चे और महिलाएं अपने परिवार से बिछड़ते रहें, लेकिन उन्हें मिलाने का कार्य मेला कार्यालय के लोग करते रहे, हर आधे घंटे के अन्तराल पर कोई न कोई व्यक्ति बिछड़े व्यक्ति का नाम एलाउंस कर साई दरवार में मिलने का कार्य चलता रहा। भीड़ के कारण मिष्ठान की दूकानों पर बैठने के लिए जगह नहीं थी, जमकर जलेबियों संग सब्जी परोसे गये। मेले की यह खासियत है कि यहां लोग बड़ी दूर-दूर से जलेबी के साथ सब्जी खाने जरूर आते हैं।
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संत सुदिष्ट बाबा के समाधि स्थल के पास लगे धनुष यज्ञ मेले का शुभारंभ 23 नवंबर को हुआ था। करीब चार-पांच दिनों तक मेले में विशेष रौनक नहीं दिखाई दिया, लेकिन अब मेला पूरे शबाब पर है, बिहार से भी सैकड़ों के तादाद में मेलार्थी मेले में पहुंचकर अपने जरूरी सामानों की खरीदारी कर रहे हैं। शनिवार को छुट्टी का दिन होने से मेले में खूब भीड़ थी, लेकिन रविवार को उससे दोगुनी भीड़ हुई। मेला में सबसे अधिक ऊनी वस्त्र व बक्सों की खरीदारी की जा रही है। जबकि महिलाओं की भीड़ मीना बाजार में उमड़ रही है।
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बड़े दुकानदारों के अपेक्षा हरेक माल 10 रुपया व 20 रुपया के दुकानदारों की चांदी कट रही है। भीड़ के कारण छोटे बच्चे और महिलाएं अपने परिवार से बिछड़ते रहें, लेकिन उन्हें मिलाने का कार्य मेला कार्यालय के लोग करते रहे, हर आधे घंटे के अन्तराल पर कोई न कोई व्यक्ति बिछड़े व्यक्ति का नाम एलाउंस कर साई दरवार में मिलने का कार्य चलता रहा। भीड़ के कारण मिष्ठान की दूकानों पर बैठने के लिए जगह नहीं थी, जमकर जलेबियों संग सब्जी परोसे गये। मेले की यह खासियत है कि यहां लोग बड़ी दूर-दूर से जलेबी के साथ सब्जी खाने जरूर आते हैं।
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