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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   Tigers and leopards in the breeding season would disturb the hostility attack

बाघ और तेंदुओं के प्रजननकाल में डालेंगे खलल तो झेलेंगे हमले

Sun, 25 Oct 2015 11:02 PM IST
बहराइच/अमर उजाला ब्यूरो
बहराइच/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 25 Oct 2015 11:02 PM IST
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इस दौर में बाघ व तेंदुओं का व्यवहार भी परिवर्तित रहता है। ऐसे में तनिक सी दखलंदाजी हमले का कारण बनती है। यह स्थिति जनवरी माह तक बरकरार रहेगी।

इसके चलते जंगल से सटे गांव के लोगों को एहतियात बरत कर ही सुरक्षा मिल सकेगी। इस मामले में वनाधिकारियों ने जंगल से सटे गांवों में अलर्ट भी जारी कर दिया हे।

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कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र से सटे आबादी के इलाकों में बाघ व तेंदुओं के हमले अचानक बढ़े हैं। इससे वन विभाग भी चिंतित है। 551 वर्ग किलोमीटर में फैले कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में इस समय 33 बाघ विहार कर रहे हैं।

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जबकि तेंदुओं की संख्या लगभग 58 के आसपास है। जंगल के ककरहा, मोतीपुर, सुजौली, कतर्नियाघाट, निशानगाड़ा वन रेंजो से 42 गांव सटे हुए हैं। इनमें लगभग 38 हजार की आबादी निवास करती है।

 अधिकांश ग्रामीण जंगल पर आश्रित होते हैं। कभी सूखी लकड़ी तो कभी एक गांव से दूसरे गांव को आवागमन के लिए जंगल के रास्तों को अख्तियार करते हैं। इतना ही नहीं ग्रामीणों के खेत भी जंगल से सटेे हें।

जिनमें गन्ना, मक्का और धान की फसल लगी है। इन खेतों में वन्यजीवों को जंगल सा माहौल मिलता है। ऐसे में ग्रामीणों के खेत और जंगल के रास्तों से गुजरने पर वन्यजीवों के रहन सहन में खलल पड़ रहा है।

वन्यजीव विशेषज्ञ व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन की मानें तो शीतकाल की शुरुआत बाघ और तेंदुओं के प्रजनन काल की भी शुरुआत होती है।

कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी की मानें तो ठंड शुरू होते ही बाघों व तेंदुओं का प्रजनन काल शुरू हो जाता है।

ऐसे में यह वन्य जीव अपने क्षेत्र में मनुष्यों की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि जनवरी माह तक का समय प्रजनन काल होता है।

इस दौर में बाघ व तेंदुओं का व्यवहार भी परिवर्तित रहता है। ऐसे समय में कभी-कभी बाघ व तेंदुए आबादी की ओर भी रुख करते हैं। इसलिए उनकी आक्रामकता स्वयं बढ़ जाती है।

अलर्ट की गई इको विकास समितियां

प्रभागीय वनाधिकारी ने कहा कि निरंतर हो रहे हमलों को देखते हुए इको विकास समितियों के पदाधिकारियों को ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए अलर्ट किया गया है। निरंतर जागरूकता गोष्ठियों का भी आयोजन हो रहा है। खेत खलिहान जाने के दौरान भी ग्रामीणों को समूह में जाने को कहा गया है।

नेपाल से भी आते हैं बाघ

कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा है। नेपाल का रायल वर्दिया नेशनल पार्क खाता कारीडोर के माध्यम से कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से जुड़ा है।

प्रजनन काल में नेपाल के रायल वर्दिया नेशनल पार्क के भी बाघ अक्सर चहलकदमी करते हुए कतर्निया के जंगलों में पहुंच जाते हैं। डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि कतर्निया की आबोहवा बाघों को रास आ रही है।

ऐसे में प्रजनन काल का समय काफी संवेदनशील रहता है। इसके लिए रेज अधिकारियों और वन कर्मियों को भी गश्त के विशेष दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

 

हाल ही में हुए हमले एक नजर में-

7 सितंबर- मोतीपुर रेंज के खड़िया गांव में मवेशी को बनाया निवाला

10 सितंबर कतर्नियाघाट रेंज के जमुनिहा कारीकोट गांव में बच्चे को किया घायल

24 सितंबर- निशानगाड़ा व कतर्नियाघाट रेंज के आजमगढ़पुरवा व गिरिजापुरी में दो मवेशियों की जान ली

10 अक्तूबर- गिरिजापुरी कालोनी में मवेशी का किया शिकार

16 अक्तूबर- ककरहा रेंज के गांव से बकरी उठा ले गया तेंदुआ22 अक्तूबर- ककरहा रेंज के गंगापुर साफन के निकट बछिया का किया शिकार

24 अक्तूबर- कतर्नियाघाट रेंज के चहलवा कुरकुरी कुंआ गांव में बालक पर हमला कर किया घायल

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