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जमीन से निकला था शिवलिंग

Sun, 23 Aug 2015 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Sun, 23 Aug 2015 10:40 PM IST
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नवाबगंज में स्थित मंगलीनाथ मंदिर शिव भक्तों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। मान्यता है कि दो शतक पूर्व क्षेत्र के कुछ चरवाहे जंगल में मवेशियों को चरा रहे थे। इसी दौरान एक चरवाहा झाड़ियों में पत्थर पर खुरपी रगड़ कर धार लगाने लगा। तभी जमीन से शिवलिंग निकल आया। लोगों ने पूजा अर्चना शुरू कर दी।

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मंगलीनाथ में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि सच्चे भाव से जो भी मन्नत की जाती है, बाबा उसे जरूर पूरी करते हैं। नवाबगंज के अंटहवा गांव के निकट मंगलीनाथ मंदिर है। मान्यता है कि अज्ञातवास के समय जब पांडव क्षेत्र में छिपकर भ्रमण कर रहे थे। उसी समय पांडवों ने शिवलिंग की स्थापना की थी।
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लेकिन इस मान्यता से परे शिव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कुमार सिंह बताते हैं कि मंदिर की स्थापना 200 वर्ष पूर्व लाखौरी ईंटों से की गई थी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के बुजुर्गों के मुताबिक दो शतक पूर्व घना जंगल था। झाड़ियों में पत्थरनुमा चीज देखकर एक चरवाहा उस पर खुरपी रगड़कर धार तेज करने लगा। तभी शिवलिंग जमीन से निकल आया।
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मंदिर के आसपास खेतों में जोताई के दौरान अब भी लाखौरी ईंटे निकलती हैं। कभी चमकदार धातुएं भी मिलती हैं, जिससे लोग अनुमान लगाते हैं कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान यहां पर रहन-सहन रहा होगा। मंदिर में प्रत्येक सोमवार को मेला लगता है।


यहां पर बहराइच, नेपाल, लखीमपुर, सीतापुर, बरेली, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर के श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना के लिए आते हैं। कजरी तीज और महाशिवरात्रि पर कई दिनों तक मेले का माहौल रहता है।

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