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करोड़ों खर्च के बाद भी सामुदायिक शौचालयों पर लटक रहा ताला
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स्टोरी- चित्तौरा के डीहा में बंद पड़ा सामुदायिक शौचालय।
- फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के विभिन्न गांवों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों में ताला लटक रहा है। इन शौचालयों के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन इनका गांवों में कोई उपयोग नहीं हो रहा रहा है। विभाग का दावा है कि 1045 ग्राम पंचायतों की 933 शौचालय पूर्ण हैं और संचालन के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को हैंडओवर कर दिया गया है। अमर उजाला की टीम ने जब सामुदायिक शौचालयों की स्थिति की तस्दीक की तो विभाग के दावों की हवा निकल गई। तस्दीक किए गए एक भी सामुदायिक शौचालय का प्रयोग नहीं होता पाया गया।
क्या थी योजना
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के 14 विकास खंड क्षेत्रों के 1045 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण करवाया गया है। शौचालयों के पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महत्वाकांक्षी योजना मिशन शक्ति के तहत शौचालयों के संचालन की बागडोर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथों में देने की बात कही गई थी। लेकिन प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री दोनों के महत्वाकांक्षी योजनाओं को जिले में गति मिलती नहीं दिख रही है। विभाग की ओर से 933 शौचालयों को पूरी तरह से पूर्ण होने का दावा और सभी 933 शौचालयों को स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को हैंडओवर करने की बात तो कही जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। जिले के कई सामुदायिक शौचालयों पर ताला लटकता नजर आ रहा है। इसके साथ ही कई शौचालय बदहाल हालत में भी देखे जा रहे हैं।
करवाई जाएगी जांच
जिले में 1045 शौचालयों में से 933 पूरी तरह पूर्ण हैं और इन्हें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को हैंडओवर कर दिया गया है। महिलाएं इन्हें संचालित भी कर रही हैं। कुछ शौचालय कुछ कारणों से अभी पूर्ण नहीं हैं, उनके भी पूर्ण होने की प्रक्रिया आखिरी चरण में है। शौचालयों पर ताला लटकने व संचालन न होने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जांच करवाकर संचालन करवाया जाएगा और दोषियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -उमाकांत पांडेय, डीपीआरओ
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क्या थी योजना
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के 14 विकास खंड क्षेत्रों के 1045 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण करवाया गया है। शौचालयों के पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महत्वाकांक्षी योजना मिशन शक्ति के तहत शौचालयों के संचालन की बागडोर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथों में देने की बात कही गई थी। लेकिन प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री दोनों के महत्वाकांक्षी योजनाओं को जिले में गति मिलती नहीं दिख रही है। विभाग की ओर से 933 शौचालयों को पूरी तरह से पूर्ण होने का दावा और सभी 933 शौचालयों को स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को हैंडओवर करने की बात तो कही जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। जिले के कई सामुदायिक शौचालयों पर ताला लटकता नजर आ रहा है। इसके साथ ही कई शौचालय बदहाल हालत में भी देखे जा रहे हैं।
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करवाई जाएगी जांच
जिले में 1045 शौचालयों में से 933 पूरी तरह पूर्ण हैं और इन्हें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को हैंडओवर कर दिया गया है। महिलाएं इन्हें संचालित भी कर रही हैं। कुछ शौचालय कुछ कारणों से अभी पूर्ण नहीं हैं, उनके भी पूर्ण होने की प्रक्रिया आखिरी चरण में है। शौचालयों पर ताला लटकने व संचालन न होने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जांच करवाकर संचालन करवाया जाएगा और दोषियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -उमाकांत पांडेय, डीपीआरओ
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