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सुहागन महिलाएं ले रहीं विधवा पेंशन
बहराइच/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2015 09:40 PM IST
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पयागपुर विकास क्षेत्र में पेंशन घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। 40 से अधिक महिलाएं ऐसी हैं जिनके पति जीवित हैं। यह सभी करवाचौथ पर पति की लंबी उम्र के लिए व्रत भी रखती हैं। लेकिन पैसे की लालच में कागजों में विधवा बन गई हैं। इसका खुलासा गांव के लोगों ने किया है। इस मामले में जांच शुरू हुई है। इस पेंशन घोटाले में कई पंचायत प्रतिनिधियों और ग्राम विकास अधिकारियों के जद में आने की संभावना है। घोटाले के जिम्मेदार अपने बचाव में जुट गए हैं। हड़कंप मचा हुआ है।
पैसा हासिल करने के लिए लोग तरह-तरह के खेल करते हैं। कुछ यही खेल पयागपुर विकास खंड क्षेत्र में विधवा पेंशन के मामले में खेला गया है। ग्राम पंचायत नूरपुर में 40 से अधिक ऐसी महिलाएं हैं, जिनके पति जीवित हैं। लेकिन पेंशन हासिल करने के लिए वह विधवा बन गई हैं। इन सभी को प्रतिवर्ष इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक पयागपुर और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से पेंशन का भुगतान उनके खाते में किया जाता है। इनमें 10 से अधिक महिलाएं अनुसूचित जाति व लगभग 30 महिलाएं पिछड़ा वर्ग की शामिल हैं।
दो वर्ष से सुहागन महिलाओं को विधवा पेंशन का लाभ प्रदान किया जा रहा है। इस मामले में नूरपुर निवासी अनिल कुमार व गांव के अन्य लोग अरसे से लगे हुए थे। अनिल ने बैंकों से संपर्क साधा, तब घोटाले का खुलासा हुआ। सभी के स्टेटमेंट निकाले गए, जिससे पता चला कि सुहागन होते हुए भी महिलाएं विधवा पेंशन का लाभ ले रही हैं।
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यह रिपोर्ट जब ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी शोभनाथ चौरसिया के सामने पेश की तो वह भी सकते में आ गए। महिलाओं के परिवार रजिस्टर की नकल, बैंक स्टेटमेंट की स्थिति देखने के बाद खंड विकास अधिकारी ने स्वीकार किया कि कुछ न कुछ गड़बड़झाला जरूर है।
सौंपी गई जांच
खंड विकास अधिकारी ने बताया कि घोटाले के मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीओ आईएसबी शोभाराम मिश्र को जांच सौंपी गई है। पखवारे भर में रिपोर्ट तलब की गई है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद जिन पंचायत प्रतिनिधियों ने विधवा पेंशन का अनुमोदन किया होगा और जिसके हस्ताक्षर पर पेंशन की स्वीकृति मिली होगी। सभी के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की जाएगी।
जांच में 16 नाम की हो चुकी है पुष्टि
ग्रामीणों ने 40 से अधिक अपात्रों के नाम का खुलासा किया है। लेकिन जांच के दौरान नूरपुर निवासी बिट्टो, बृजेश, धनराजा, कृष्णा, लाडिला, मंजू, ननका, रामादेवी, संगीता, सविता, सावित्री, शांती, सुमित्रा, तालुक और तारादेवी के नामों का पता चला है कि यह सुहागन होते हुए भी विधवा पेंशन की लाभार्थी बनी हैं।
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पैसा हासिल करने के लिए लोग तरह-तरह के खेल करते हैं। कुछ यही खेल पयागपुर विकास खंड क्षेत्र में विधवा पेंशन के मामले में खेला गया है। ग्राम पंचायत नूरपुर में 40 से अधिक ऐसी महिलाएं हैं, जिनके पति जीवित हैं। लेकिन पेंशन हासिल करने के लिए वह विधवा बन गई हैं। इन सभी को प्रतिवर्ष इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक पयागपुर और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से पेंशन का भुगतान उनके खाते में किया जाता है। इनमें 10 से अधिक महिलाएं अनुसूचित जाति व लगभग 30 महिलाएं पिछड़ा वर्ग की शामिल हैं।
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दो वर्ष से सुहागन महिलाओं को विधवा पेंशन का लाभ प्रदान किया जा रहा है। इस मामले में नूरपुर निवासी अनिल कुमार व गांव के अन्य लोग अरसे से लगे हुए थे। अनिल ने बैंकों से संपर्क साधा, तब घोटाले का खुलासा हुआ। सभी के स्टेटमेंट निकाले गए, जिससे पता चला कि सुहागन होते हुए भी महिलाएं विधवा पेंशन का लाभ ले रही हैं।
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यह रिपोर्ट जब ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी शोभनाथ चौरसिया के सामने पेश की तो वह भी सकते में आ गए। महिलाओं के परिवार रजिस्टर की नकल, बैंक स्टेटमेंट की स्थिति देखने के बाद खंड विकास अधिकारी ने स्वीकार किया कि कुछ न कुछ गड़बड़झाला जरूर है।
सौंपी गई जांच
खंड विकास अधिकारी ने बताया कि घोटाले के मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीओ आईएसबी शोभाराम मिश्र को जांच सौंपी गई है। पखवारे भर में रिपोर्ट तलब की गई है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद जिन पंचायत प्रतिनिधियों ने विधवा पेंशन का अनुमोदन किया होगा और जिसके हस्ताक्षर पर पेंशन की स्वीकृति मिली होगी। सभी के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की जाएगी।
जांच में 16 नाम की हो चुकी है पुष्टि
ग्रामीणों ने 40 से अधिक अपात्रों के नाम का खुलासा किया है। लेकिन जांच के दौरान नूरपुर निवासी बिट्टो, बृजेश, धनराजा, कृष्णा, लाडिला, मंजू, ननका, रामादेवी, संगीता, सविता, सावित्री, शांती, सुमित्रा, तालुक और तारादेवी के नामों का पता चला है कि यह सुहागन होते हुए भी विधवा पेंशन की लाभार्थी बनी हैं।